साधारण व्यक्ति बन भगवान को भजना

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सच्चा सिमरण गृहस्थ धर्म में ही सम्भव है। जंहा कोई हमें पुजने वाला नहीं है।हम गृहस्थ धर्म में कितना ही भगवान का नाम सिमरण करे पर घर में आपको सम्बन्ध उसी रुप में निभाने होते हैं। घर में कितनी ही पुजा करके भी आप पुजक नही बन सकते हैं। घर कर्त्तव्य प्रेम और सच्चाई पर चलते हैं। जो भक्ती मार्ग को दृढ़ बनाते हैं। हम कर्म करके प्रभु प्राण के जितने नजदीक होगें उतने हम बैठे भगवान को भज कर सत्यता के मार्ग पर नहीं बढ सकते हैं। हमारे भगवान राम जी और कृष्ण जी गृहस्थ ही है। रामायण को सौ बार पढे तब भी हमे कहीं यह पढने को नहीं मिलेगा कि भगवान बैठे बैठे भगवान का सिमरण कर के गये है ।कर्म करते हुए कब भगवान दर्शन देकर चले जाते हैं भक्त समझ नहीं पाता है


कर्म में भक्ति के प्रवेश करने पर कर्म करते हुए भगवान दर्शन दे जाऐगे ।कर्म हमे ऐसे करना है कि हाथ कार्य कर रहे हैं। मुख से सिमरण चल रहा है। अन्तर्मन में स्तुति चल रही है। कभी भक्त अन्तर्मन से प्रभु प्राण नाथ को नमन करता है तो कभी अन्तर्मन से अपने स्वामी के साथ सम्बन्ध को दृढ़ करता है। भाव से भरा हुआ कर्म करते हुए भगवान मे खो जाता है। तब भगवान लीला करने आते हैं। जय श्री राम
अनीता गर्ग



True Simran is possible only in the householder religion. Where no one is going to worship us. No matter how much we remember the name of God in the householder religion, but in the house you have to maintain the relationship in the same way. You cannot become a worshiper even after doing so much worship at home. Home duties run on love and truth. Those who make the path of devotion firm. The closer we are to the Lord Prana by doing our deeds, the more we cannot move on the path of truth by worshiping the sitting God. Our Lord Ram ji and Krishna ji are householders. Even after reading the Ramayana a hundred times, we will not get to read that God has gone by worshiping God while sitting. The devotee does not understand when God leaves after giving darshan while doing Karma.

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