एक सत्संगी के जीवन में प्रतीक्षा, परीक्षा और समीक्षा का क्या महत्व है ?

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तीन बातें भक्त के जीवन में जरूर होनी चाहिएं ,  प्रतीक्षा, परीक्षा और समीक्षा। भक्ति के मार्ग में प्रतीक्षा बहुत

आवश्यक है। प्रभु जरूर आयेंगे , कृपा करेंगे , ऐसा विश्वास रखते हुए प्रतीक्षा करें। आज भगवान भोग लगाने आयेंगे। भगवान के लिए भोग बन रहा है भगवान बस अब आने ही वाले हैं उत्सव हो रहा है ऋषि मुनियों की बङी भारी भीड़ लगी हुई है सभी राम कृष्ण हरि राम कृष्ण हरि हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे सभी भगवान की बाट जोह रहे हैं यह सब एक भक्त ह्दय मे लीला चल रही है। भक्त के अन्तर्मन के भाव है भगवान आ रहे हैं। बहुत बड़ी प्रतीक्षा के बाद शबरी की कुटिया में प्रभु आये थे।
     परीक्षा- संसार की परीक्षा करते रहें। इस संसार में सब अपने कारणों से जी रहे हैं। किसी के भी महत्वाकांक्षा के मार्ग पर बाधा बनोगे वही तुम्हारा अपना , पराया हो जायेगा। संसार का तो प्रेम भी छलावा है। संसार को जितना जल्दी समझ लो तो अच्छा है ताकि प्रभु के मार्ग पर तुम जल्दी आगे बढ़ो।

     समीक्षा- अपनी समीक्षा रोज करते रहो, आत्मचिन्तन करो। जीवन उत्सव कैसे बने ? प्रत्येक क्षण उल्लासमय कैसे बने ? जीवन संगीत कैसे बने, यह चिन्तन जरूर करना। कुछ छोड़ना पड़े तो छोड़ने की हिम्मत करना और कुछ पकड़ना पड़े तो पकड़ने की हिम्मत रखना। अपनी समीक्षा से ही आगे के रास्ते दिखेंगे।

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