हे प्रभु भगवान मैं तुम्हें आंखों में बसा लूं दिल में बिठा लु। तुझसे प्रीत करलु तू मेरा स्वामी है तू मेरा भगवान नाथ है आज यह दिल तुझे देखना चाहता है। तुझ में समा जाना चाहता है तुम्हारा बन जाना चाहता है तुम मेरे प्राण प्रिय स्वामी हो।हे मेरे मालिक दिल की धड़कन तुम्हें पुकारती है । हे नाथ हर क्षण दिल बाहर भीतर ढुंढता है मेरे स्वामी भगवान् नाथ कंहा है। हे परमात्मा तुम मेरी आत्मा की पुकार हो। कब ये दिल तुम से तृप्त होगा। परम पिता परमात्मा को प्रणाम है जय श्री राम
अनीता गर्ग
Oh Lord God, let me sit you in my eyes and sit in my heart. I love you, you are my lord, you are my lord Nath, today this heart wants to see you. Wants to be absorbed in you, wants to become yours, you are my dear master of life. O my master, the heartbeat calls out to you. O Nath, every moment the heart searches outside and inside, where is my lord Bhagwan Nath. O God, you are the call of my soul. When will this heart be satisfied with you? Salutations to the Supreme Father, the Supreme Soul, Jai Shri Ram
Anita Garg