कृष्ण

राधे को उपहार

   “अब मै अपनी आँखें खोलूं …कान्हा जी???…मै यहाँ पेड़ के पीछे और देर खड़ी नहीं रह सकती…” श्रीराधे बरगद

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प्रेम की प्रकाष्ठा

. “.प्रेम की प्रकाष्ठा” दिव्य अलौकिक, अनन्य, अनन्त,आत्मा और परमात्मा का मिलन है। श्री श्यामा श्याम आठों पहर एक दुसरे

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” निष्कामता “

जब तक व्यक्ति के भीतर पाने की इच्छा शेष है, तब तक उसे दरिद्र ही समझना चाहिए। श्री सुदामा जी

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वृन्दावन सुधि आवत

जब जब वृन्दावन सुधि आवत ।हृदयाकाश विरहघन उमड़त असुवन धार नैन-भरि लावत ॥फड़क उठत प्रति रोम रोम तन, मति बौरात

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