भक्ति मार्ग (Bhakti Marg)

अनन्य भक्ति ॥

बिना किसी व्यवधान के अनन्य भाव से मेरा चिंतन करना, एकान्त स्थान में रहने की इच्छा करना, किसी भी प्राणी

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प्रभु – की – भक्ति

प्रभु की भक्ति चाहे कितने कष्ट, कठिनाइयां, निन्दा तथा हानि सहन करने पर प्राप्त हो तो सस्ता सौदा समझो क्योंकि

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भक्ती बंधी हुई

भक्ति हम सबको दिखाकर करते हैं तब भक्ति के अन्दर दृढता को पकड़ नहीं सकते हैं। खुली वस्तु पर सबकी

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प्रभु संकीर्तन 6

सत्य को,सदैव तीन चरणों,से गुजरना होता है.उपहास.विरोध.अनंत स्वीकृति…🌹🌺🌷पानी की एक बूंद गर्म तवे पर पड़े तो मिट जाती है,कमल के

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सच्चा रिश्ता

🙏मोह में फंसकर आप परमात्मा जैसे प्यारे रिश्ते को कैसे भूल जाते हैं !संसार में अगर कोई भी रिश्ता सच्चा

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