
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि सादर भारत शीश धरी लीन्ही
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हिसादर भारत शीश धरी लीन्ही प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हिसादर भारत शीश धरी लीन्ही। राम भक्त

प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हिसादर भारत शीश धरी लीन्ही प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हिसादर भारत शीश धरी लीन्ही। राम भक्त

राधा रास बिहारी मोरे मन में आन समाये । निर्गुणियों के साँवरिया ने खोये भाग जगाये । मैं नाहिं जानूँ

श्यामसुंदर मेरे दिल में बस गयो रे, इनके नैनो के जादू में फस गयो रे….. नैनों में इनके गजब का

तुम सों को प्रियतम या जग में।तुम प्रान बने उर में मोरे तुम रुधिर दास के रग रग में।।तुम्हरी करुणा

रघुनाथ कृपा कीजै ऐसी मोहे राम चरन रज ध्येय मिलै।पथ देहु मोहे निज पद रज का, हरिनाम मोहे पाथेय मिलै।।गुरु

भगवान भक्त के संदर्भ में क्या कह रहे है सभी गौर करें और भक्त बनें भक्त मेरे मुकुटमणि, मैं हूं

मैं सब का होकर देख लिया एक तेरा होना बाकि है,मैं सब कुछ खो कर देख लिया बस खुद को

नियंत्रण में रखो, जग पालक भगवान।विनती कर जोड़ करे, आप बढ़े बलवान।। दया कृपा करुणा करो, मेरे दीन दयाल।पीड़ा करना

हे तेजोमय परमेश्वर ! हमें इस संसार की यात्रा में सफलता के लिए सुपथ पर चलाइये | हमारी दुर्बलताओं को

पकड़ लो हाथ बनवारी,नहीं तो डूब जाएंगे,हमारा कुछ ना बिगड़ेगा,तुम्हारी लाज जाएगी,पकड़ लों हाथ बनवारी,नहीं तो डूब जाएंगे ॥धरी है