श्रीराधाचरितामृत
भाग- 11

(जब श्रीराधारानी को कंस मारने आया)

( साधको मुझ से कई लोगों ने पूछा है “श्रीराधा रानी श्रीकृष्ण से बड़ी हैं फिर आपने उन्हें छोटी क्यों बताया? मैं स्पष्टतः कह देना चाहता हूँ मैं जो लिख रहा हूँ इसका आधार शास्त्रीय और प्रमाणिक है आधुनिक लेखक ही कहते हैं कि श्रीराधा कृष्ण से बड़ी थीं.. उनके पास क्या प्रमाण है मुझे आज तक समझ नही आया क्योंकि गर्ग संहिता, बृज के सन्तों की वाणियों में, निम्बार्क सम्प्रदाय, राधबल्लभीय सम्प्रदाय एवम् चैतन्य सम्प्रदाय के महापुरुषों ने तो लिखा है श्रीराधा, कृष्ण से छोटी ही थीं। मैं उन प्रमाणों के आधार पर ही लिख रहा हूँ और नायिका नायक से छोटी हो तभी “श्रृंगार रस” भी खिलता हैइसलिये प्रमाणिक बात यही है कि श्रीराधा छोटी थीं नन्दनन्दन से। राधे राधे )

धन्य है वो गोद जिसमें श्रीराधा खेल रही हैं धन्य है वो आँचल जिस आँचल में वो आल्हादिनी शक्ति प्रकट हुयीं हैं धन्य है धरित्री बरसाना जैसा प्रेम नगर अपने मैं पाकर।अभी तो कुछ नहीं है देखते जाओ कंस जब श्रीराधा बड़ी होंगी।

महर्षि शाण्डिल्य हँसें और वज्रनाभ से बोले देवर्षि नारद की लीला उनके स्वामी श्याम सुन्दर ही जाने कौतुकी हैं नारद जी।इन्हें कौतुक बहुत प्रिय है।सबसे सहज रहते हैं तुम्हे पता है ना वज्रनाभ कंस जैसे राक्षस भी गुरु मानते हैं देवर्षि को क्योंकि ये उन्हीं की भाषा सहजता में बोल लेते हैं हम लोग नही बोल पायें।अब देखो चले गए बरसाने से सीधे मथुरा कंस के पास। कंस ने स्वागत किया।फल फूल दिए स्वागत स्वीकार करने के बाद देवर्षि कंस से बोले-आनन्द आ गया।
तो फल फूल और लीजिये।
देवर्षि हँसे कंस के पीठ में जोर से हाथ मारा और बोले नही कंस तुम्हारे इन फलों से देवर्षि को क्या आनन्द आएगा?आनन्द तो बरसाने में आया।बरसाने में? कंस ने पूछा।
हाँ हाँ हाँ बरसाने में।कीर्तिरानी की गोद में वो शक्तिपुंज कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति वो बृषभान की लली उनके दर्शन करके आया हूँ। आहा आनन्द आ गया।हे कंस श्रीकृष्ण की शक्तियों का केंद्र तो वही हैं।देवर्षि बोले जा रहे हैं।
अब आप ये क्या कह रहे हैं पहले कह रहे थे गोकुल में मेरा शत्रु पैदा हुआ है।मैं उसी को मारने में लगा हूँ पूतना भेजी पर वो मर गयी।शकटासुर उसे भी मार दिया और सुना है कागासुर कल मरा हुआ।मिला है मेरे सैनिकों को।

तुम समझ नहीं रहे हो कंस… अपने आसन से उठे देवर्षि नारद। कंस के कान में कुछ कहना चाहा फिर रुक गए इधर उधर सैनिकों को देखा।कंस तुरन्त चिल्लाया “एकान्त” सब जाओ यहाँ से देख नहीं रहे देवर्षि मुझे कुछ गुप्त बातें बता रहे हैं।

महर्षि शाण्डिल्य मुस्कुराते हुये ये प्रसंग आज सुना रहे थे।कान में बोले देवर्षि, कंस के विष्णु ने अवतार लिया है कृष्ण के रूप में तुम्हे मारने के लिये पर विष्णु की शक्ति बरसाने में प्रकट हुयी है। विष्णुकी शक्ति का वो केंद्र है राधा।
राधा? कंस डर गया… डरो मत कंस डरो मत।मैं हूँ तुम्हारे साथ पीठ थपथपाई कंस की।क्या करूँ मैं गुरुदेव आप ही कोई उपाय बताएँ। मार दो और क्या तुम भी तो महावीर हो।हटा दो विष्णु की शक्ति को।कितनी सहजता में बोल रहे थे देवर्षि।मैं किसी राक्षस को भेजता हूँ अभी बरसाना, कंस क्रोधित भी है पर डरा हुआ है।क्योंकि अब दो दो शत्रु हो गए थे।एक गोकुल में और ये बरसाने में।नहीं राक्षस को मत भेजो देवर्षि ने रोका।फिर राक्षसी? कंस ने पूछा।नहीं तुम स्वयं जाओ और उनकी शक्ति का आंकलन करके आओ।कंस विचार करने लगा।विचार मत करो मथुरा नरेश जाओ।देखो भाई मुझे क्या है मै तो तुम्हारे भले के लिये ही बोल रहा हूँ।नारायण नारायण नारायण चल दिए देवर्षि।
रथ लिया और कंस अकेले ही चल पड़ा था बरसाने की ओर।नहीं किसी को साथ में नही लिया यहाँ तक की सारथि भी नहीं। अकेले स्वयंरथ चलाते हुए चला था।

मथुरा नरेश कंस राजा कंस आये हैं।
बरसाने में हवा की तरह बात फ़ैल गयी।
कंस अपने रथ को लेकर घूम रहा है और ग्वालों के घरो में भी जा रहा है। अभी तक किसी को क्षति तो पहुँचाई नही है पर सब डरे हुये हैं… हे बृषभान जी बरसाने के कुछ प्रधान लोगों ने आकर बृषभान जी से गुहार लगाई थी।
डरो मत कंस हमारा कुछ नही बिगाड़ पायेगा और अगर उसने इस बरसाने की क्षति की तो फिर उसे उसका दण्ड भोगना ही पड़ेगा क्रोधसे लाल मुख मण्डल हो गया था बृषभान जी का। पर “बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताये“सहज हो गए थे बृषभान युवराज कंस क्यों आये हैं ये पता तो करो कहीं बरसाने में ऐसे ही भ्रमण में आये हों चलो बृषभान उठे और कंस के पास ही चल पड़े थे।उनके साथ उनके कई ग्वाले थे।

युवराज कंस की जय हो
शत्रु को भी सम्मान देना ये बृषभान जी का स्वभाव है।
ओह बृषभान जी उतरा कंस रथ से।
आप ठीक हैं? आपके मित्र नन्दराय तो यदा कदा आते रहते हैं मथुरापर आप नही आते? कंस ने बृषभान जी से पूछा।
अब मथुरा जैसे नगर मैं जाने की हमारी इच्छा नहीं होती बरसाना ही हमें प्रिय है और यहाँ के लोग मुझे छोड़ते भी नहीं।
बीच में ही बात को रोकते हुए बृषभान ने पूछा “कर” यहाँ से समय पर तो पहुँचता है ना?
नहीं नहीं “कर” की चिन्ता नही है कुछ सोचने लगा कंस।
आपकी पुत्री हुयी है? स्वयं ही पूछने लगा क्योंिक कंस समझ गया कि पुत्री के जन्म की बात ये मुझ से क्यों कहने लगे।
हाँ एक पुत्री हुयी है कंस को क्या कहें इससे ज्यादा।
तो हमें दिखाओगे नही? कंस आदेशात्मक भाषा बोल नही सकता था, क्योंकि ये ग्वाले भी कम न थे बरसाने के। इनकी लाठी ही पर्याप्त है।पर भोले भाले हैं बृषभान बिना कुछ बोले अतिथि जानकर कंस को ले चले अपने महल में।
आप ये क्या करते हैं ? कंस दुष्ट है उसकी नजर अच्छी नही है फिर मेरी लाड़ली को मैं क्यों दिखाऊं सब को?
कंस को अतिथि कक्ष में बिठाकर बृषभान जी चले गए थे अन्तःपुर में।

“कंस देखकर चला जाएगा“
अब मैं उसकी बात कैसे काट देता कीर्ति
वैसे मेरी लाड़ली का वो कुछ बिगाड़ नही पायेगा बस कीर्ति कुछ क्षणके लिये ही तुम चली जाओ मैं कंस को बुला रहा हूँ पालने में खेल रही लाली को वो देख लेगा और चला जाएगा। मैं हूँ ना उसके साथ।
आप ना ऐसी जिद्द न किया करें।मेरी लाली को अगर कुछ हो गया।उसकी नजर भी तो खराब है पता है… बृजरानी भाभी कह रही थीं कितना उत्पात मचा रखा है उसनें गोकुल में।
अब जाओ तुम कुछ नही होगा मैं हूँ ना
पर जाते जाते डिबिया ली काजल की कीर्तिरानी ने और बड़ा सा टीका माथे पर लगा दिया अपनी लाली के।कीर्तिरानी भीतर गयीं पर उनका मन फिर भी नही माना वापस आईँ और काजल ही पूरे मुँह में लगा दिया श्रीराधा रानी के।

पर सूर्य बादलों से कैसे छुपेगा ?
आओ महाराज कंस आओ लेकर चल दिए कंस को अन्तःपुर में।
देवर्षि की बातें कानों में गूँज रही है “गोकुल की शक्ति बरसाने में है।उसको मार दो तो गोकुल वाला कृष्ण कुछ नही बिगाड़ पायेगा”
पालने के पास पहुँचा कंस, उसे असीम ऊर्जा प्रवाहित हो रही है ऐसा लगने लगा।पालने की ओर देखने की हिम्मत ही नही हो रही है कंस को, पता नही क्यों श्रीराधा रानी की ओर ये दृष्टि ही नहीं उठा पा रहा।
तुम क्षण भर के लिये बाहर जाओ बृषभान जाओ बाहर
कंस ये क्या कह रहा था बृषभान को बाहर जाने के लिये।
वो वहीं खड़े रहे नही गए ऐसे कैसे चले जाते
पर कंस तो दुष्ट है वो फिर बोला तुम निश्चिन्त रहो बस क्षण भर के लिये बाहर जाओ मेरी बात मानों।
बृषभान बहुत सरल हैं भोले हैं तभी तो इस भोरी किशोरी के पिता हैं।चले गए बाहर।

कंस फिर मुख देखने की कोशिश करने लगा पर सूर्य का सा तेज उसकी आँखों को सहन नही हो रहा था।
उसने सोचा इस लड़की के पैर पकड़ कर फेंक दूँ बाहर तभी मर जायेगी।
श्रीराधा रानी के चरण पकड़ने के लिये जैसे ही वो बढ़ा
अल्हादिनी ने अपने चरण बस थोड़े क्या हिलाये

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
टूटी खिड़कियाँ उसमें से कंस उड़ा और सीधे मथुरा में जाकर गिरा।जब खिड़कियों के टूटनें की आवाज आयी भागे सब। श्रीराधा रानी के पालने की ओर पर, पर लाली तो मुस्कुरा रही है और अपने दोनों चरणों को फेंक रही हैं किलकारियाँ मार रही हैं।

कंस कहाँ गया? बृषभान जी ने इधर उधर देखा। खिड़की टूटी है।खिड़की के पास गए ओह इसमें से गया कंस?
गया नही भानु बाबा हमारी लाली ने फेंक दिया, जोर से चरण प्रहार किया कि वो तो उड़ गया, ये कहते हुए ताली बजाकर हँसी वो बालिका चित्रा सखी।

अंतरिक्ष से कंस की इस स्थिति को देखकर नारद जी हँसते हँसते लोटपोट हो गए थे कमर टूट गयी थी कंस की, पर इस बात को उसने किसी को नहीं बताया बता भी कैसे सकता था।

हे वज्रनाभ अब धीरे धीरे श्रीराधा रानी बड़ी होने लगीं।
महर्षि शाण्डिल्य ने आनन्दित होते हुए कहा।
पूजनीय हरिशरण जी

क्रमशः



(When Kansa came to kill Shri Radharani)

(Sadhaks, many people have asked me, “Shri Radha Rani is elder than Shri Krishna, then why did you call her younger? I want to say clearly that what I am writing has a classical and authentic basis. Only modern writers say that Shri Radha is elder than Krishna.” Till date I have not understood what proof they have because in Garga Samhita, the words of the saints of Brij, the great men of Nimbarka sect, Radhaballabhiya sect and Chaitanya sect have written that Shri Radha was younger than Krishna. I am looking at those proofs. I am writing on the basis of this and if the heroine is younger than the hero then only the “shringaar rasa” blossoms, hence the authentic thing is that Shri Radha was younger than Nandanandan. Radhe Radhe)

Blessed is the lap in which Shri Radha is playing. Blessed is the field in which that eternal power has manifested. Blessed is the city of love like Dhritri Barsana. Right now there is nothing, Kansa, keep watching when Shri Radha grows up.

Maharishi Shandilya laughed and said to Vajranabh, Devarshi Narad’s Leela, his master Shyam Sundar knows only that Narad ji is a prodigy. He loves prodigies very much. Do you know that even demons like Vajranabh Kansa consider Devarshi as their Guru because it is theirs? We speak the language easily, but we could not. Now look, from Barsana, Kansa went straight to Mathura. Kansa welcomed him. Gave him fruits and flowers. After accepting the welcome, Devarshi said to Kansa – I am happy. So have more fruits and flowers. Devarshi laughed and hit Kansa hard on the back and said, “No Kansa, what joy will Devarshi get from these fruits of yours? The joy came in raining. In raining?” Kansa asked. Yes yes yes in Barsana. That bundle of power in Kirtirani’s lap, the early morning power of Krishna, that flower of Vrishabhan, I have come to see her. Ah, joy has come. Oh Kansa, he is the center of Shri Krishna’s powers. Devarshi is being called. Now what are you saying? Earlier you were saying that my enemy was born in Gokul. I tried to kill him. I sent Pootna but she died. Shaktasur killed her too and I have heard that Kagasur is dead yesterday. My soldiers have found him. To.

You are not understanding Kansa… Devarshi Narad got up from his seat. Wanted to say something in Kansa’s ear, then stopped and looked at the soldiers here and there. Kansa immediately shouted, “Alone”, everyone go, don’t you see from here, Devarshi is telling me some secret things.

Maharishi Shandilya was smilingly narrating this incident today. Devarshi whispered in his ear, Kansa’s Vishnu has incarnated in the form of Krishna to kill you but Vishnu’s power has manifested in raining. Radha is the center of Vishnu’s power. Radha? Kansa got scared… Don’t be afraid Kansa, don’t be afraid. I am with you patting Kansa’s back. What should I do Gurudev, please tell me some solution. Kill me and are you also a Mahavir? Remove the power of Vishnu. Devarshi was speaking so easily. I will send some demon right now to rain. Kansa is angry but also scared. Because now the two have become enemies. Were. One in Gokul and this one in Barsana. No, don’t send Rakshasi. Devarshi stopped. Then Rakshasi? Kansa asked. No, you go yourself and come back after assessing their power. Kansa started thinking. Don’t think, go to Mathura, King. Look brother, I am speaking only for your good. Narayan, Narayan, Narayan, let’s go, Devarshi. . He took the chariot and Kansa set out alone towards Barsana. No, he did not take anyone along, not even the charioteer. He was driving the Swayam Rath alone.

Mathura king Kansa has come. The word spread like the wind in rain. Kansa is roaming around with his chariot and is also visiting the houses of cowherds. Till now no one has been harmed but everyone is scared… Hey Brishbhan ji, some prominent people of Barsana had come and appealed to Brishbhan ji. Don’t be afraid, Kansa will not be able to do any harm to us and if he causes any harm due to this rain, then he will have to suffer the punishment. Brishbhan ji’s face became red with anger. But Brishabhan had become comfortable with “whatever he does without thinking, he will regret later”. Find out why Prince Kansa has come. At least find out why he has come on such a tour in Barsana. Come on, Brishabhan got up and walked towards Kansa. Along with him were many of his cowherds. Were.

Hail Prince Kansa It is the nature of Brishbhan ji to give respect even to the enemy. Oh Brishbhan ji got down from Kansa’s chariot. are you ok? Your friend Nandarai keeps coming to Mathura sometimes, but you don’t come? Kansa asked Brishabhan ji. Now we do not wish to go to a city like Mathura, we like Barsana and the people here do not even leave me. Stopping the conversation midway, Brishabhan asked, “Does he reach from here on time, right?” No no, I don’t care about taxes. Kansa started thinking about something. Have you got a daughter? He himself started asking because Kansa understood why he started talking to me about the birth of a daughter. Yes, she has a daughter, what can I say to Kansa, more than this. So won’t you show us? Kansa could not speak commanding language, because these cowherds were also no less capable of raining. His stick is enough. But Brishabhan is innocent and took Kansa to his palace without saying anything, considering him a guest. What is this you do? Kansa is evil, his eyesight is not good, then why should I show my darling to everyone? After making Kansa sit in the guest room, Brishbhan ji had gone to the harem.

“Kans will go away after seeing” Now how can I interrupt her Kirti? By the way, he will not be able to do any harm to my darling, just Kirti, you go away for a few moments, I am calling Kansa, he will see Lali playing in the cradle and will go away. I am with him. You should not be so stubborn. If anything happens to my Lali. I know her eyesight is also bad… Brijrani Bhabhi was saying how much trouble she has created in Gokul. Now go, nothing will happen to you, I am here, right? But while leaving, Kirtirani took the box of kajal and applied a big tilak of her redness on her forehead. Kirtirani went inside but she still did not agree. She came back and applied the kajal all over the face of Shriradha Rani.

But how will the sun be hidden from the clouds? Come Maharaj Kansa, come and take Kansa to the harem. Devarshi’s words are echoing in my ears, “The power of Gokul is in Barsana. If you kill him, Krishna of Gokul will not be able to do any harm.” Kansa reached near the cradle, it seemed as if infinite energy was flowing to him. Kansa did not have the courage to look towards the cradle, I don’t know why he was not able to even look towards Shri Radha Rani. You go out for a moment, Brishabhan, go out. What was Kansa saying to Brishabhan to go out? He didn’t just stand there, how could he go away like that? But Kansa is evil and he said again, stay calm, just go out for a moment and obey me. Brishabhan is very simple and innocent, that is why he is the father of this innocent teenager. He has gone out.

Kansa again tried to see the face but his eyes could not bear the brightness of the sun. He thought that if he holds the girl’s feet and throws her outside, she will die. As soon as he moved forward to hold the feet of Shri Radha Rani Alhadini moved her feet just a little

o o o o o o o o o Broken windows: Kansa flew out of it and fell straight into Mathura. When the sound of breaking windows was heard, everyone ran away. On the side of Shri Radha Rani’s cradle, Lali is smiling and throwing both her feet and making noises.

Where did Kansa go? Brishbhan ji looked here and there. The window is broken. Went near the window, oh did Kansa go through it? Bhanu Baba, he did not go, our redness threw him, he kicked his feet so hard that he flew away, saying this the girl Chitra Sakhi clapped and laughed.

Seeing this condition of Kansa from space, Narad ji burst out laughing. Kansa’s back was broken, but he did not tell this to anyone, how could he tell.

Hey Vajranabh, now slowly Shriradha Rani started growing up. Maharishi Shandilya said happily. Respected Harisharan ji

respectively

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