“अर्धनारीश्वर”

त्रिदेवों में शिव एक हैं. ब्रह्मदेव जहां सृष्टि के रचयिता माने गए हैं, वहीं विष्णु पालक और शिव संहारक माने गए हैं. इनमें श्री विष्णु को हरि और शिव को हर कहा जाता है. भक्तजन दोनों के नाम को हरि-हर एक साथ बोलते हैं, तो एकेश्वर की संज्ञा दी जाती है. पुराणों के अनुसार, विष्णु के 24 अवतार हैं,जिनमें वे अपने मूल-स्वरूप से किसी और प्राणी की देह के रूप में धरती पर रहकर गए. उसी प्रकार शिवजी के भी कई अंशावतार हुए. उन्‍हीं का एक स्वरूप ‘अर्धनारीश्वर’ हैं।

सृष्टि के निर्माण हेतु शिव ने अपनी शक्ति को स्वयं से पृथक किया। शिव स्वयं पुल्लिंग के तथा उनकी शक्ति स्त्रीलिंग की द्योतक हैं । पुरुष (शिव) एवं स्त्री (शक्ति) का एका होने के कारण शिव नर भी हैं और नारी भी, अतः वे अर्धनरनारीश्वर हैं। जब ब्रह्मा ने सृजन का कार्य आरंभ किया तब उन्होंने पाया कि उनकी रचनाएँ अपने जीवनोपरांत नष्ट हो जाएंगी तथा हर बार उन्हें नए सिरे से सृजन करना होगा। गहन विचार के उपरांत भी वो किसी भी निर्णय पर नहीं पहुँच पाए। तब अपने समस्या के सामाधान के हेतु वो शिव की शरण में पहुँचे। उन्होंने शिव को प्रसन्न करने हेतु कठोर तप किया। ब्रह्मा की कठोर तप से शिव प्रसन्न हुए।ब्रह्मा के समस्या के सामाधान हेतु शिव अर्धनारीश्वर स्वरूप में प्रगट हुए। अर्ध भाग में वे शिव थे तथा अर्ध में शिवा। अपने इस स्वरूप से शिव ने ब्रह्मा को प्रजननशील प्राणी के सृजन की प्रेरणा प्रदान की। साथ ही साथ उन्होंने पुरूष एवं स्त्री के सामान महत्व का भी उपदेश दिया। इसके बाद अर्धनारीश्वर भगवान अंतर्धयान हो गए।

शक्ति शिव की अभिभाज्य अंग हैं। शिव नर के द्योतक हैं तो शक्ति नारी की। वे एक दुसरे के पूरक हैं। शिव के बिना शक्ति का अथवा शक्ति के बिना शिव का कोई अस्तित्व ही नहीं है। शिव अकर्ता हैं। वो संकल्प मात्र करते हैं; शक्ति संकल्प सिद्धी करती हैं।

शिव कारण हैं; शक्ति कारक।
शिव संकल्प करते हैं; शक्ति संकल्प सिद्धी।
शक्ति जागृत अवस्था हैं; शिव सुसुप्तावस्था।
शक्ति मस्तिष्क हैं; शिव हृदय।
शिव ब्रह्मा हैं; शक्ति सरस्वती।
शिव विष्णु हैं; शक्त्ति लक्ष्मी।
शिव महादेव हैं; शक्ति पार्वती।
शिव रुद्र हैं; शक्ति महाकाली।
शिव सागर के जल समान हैं। शक्ति सागर की लहर हैं।

🚩धम्मिल्लकायै च जटाधराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ।। कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै चितारज:पुंजविचर्चिताय । कृतस्मरायै विकृतस्मराय नम: शिवायै च नम: शिवाय🙏🚩
@everyone



Shiva is one of the trinity. While Brahmadev is considered the creator of the universe, Vishnu is considered the nurturer and Shiva the destroyer. In these Shri Vishnu is called Hari and Shiva is called Har. When the devotees say Hari-Har together, both the names are given the noun of Ekeshwar. According to the Puranas, there are 24 incarnations of Vishnu, in which he lived on earth in the form of another creature from his original form. Similarly, Shivji also had many incarnations. One of his forms is ‘Ardhanarishwar’.

For the creation of the universe, Shiva separated his power from himself. Shiva himself is the symbol of the masculine and his power is the symbol of the feminine. Due to the unity of male (Shiva) and female (Shakti), Shiva is male as well as female, hence he is Ardhanarnarishwar. When Brahma started the work of creation, he found that his creations would be destroyed after his life and every time he would have to create anew. Even after deep thought, he could not reach any decision. Then he reached the shelter of Shiva to solve his problem. He did severe penance to please Shiva. Shiva was pleased with the harsh penance of Brahma. To solve the problem of Brahma, Shiva appeared in the form of Ardhanarishwar. He was Shiva in half and Shiva in half. In this form, Shiva inspired Brahma to create a procreative being. At the same time, he also preached the equal importance of men and women. After this Lord Ardhanarishwar disappeared.

Shakti is an inseparable part of Shiva. Shiva is the symbol of man and Shakti is of woman. They complement each other. There is no existence of Shakti without Shiva or Shiva without Shakti. Shiva is akarta. They only make resolutions; Power fulfills thoughts.

Shiva is the reason; power factor. Shiva resolves; Shakti Sankalp Siddhi. Shakti is the awakened state; Shiva is dormant. Power is the mind; Shiva heart. Shiva is Brahma; Shakti Saraswati. Shiva is Vishnu; Shakti Lakshmi. Shiva is Mahadev; Shakti Parvati. Shiva is Rudra; Shakti Mahakali. Shiva is like the waters of the ocean. Shakti is the wave of the ocean.

🚩Om Dhammillakayai Jatadharayai Namah Shivayai Namah Shivayai Namah. O Lord, You are decorated with musk-rose flowers and saffron flowers. Ome to the remembered and to the distorted remembered🙏🚩 @everyone

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