
शिव में सृष्टि का संगीत
शिव में सृष्टि का संगीत और शांति का समन्वय है। शिव के मस्तक पर विराजित गंगा और भौहों के बीच

शिव में सृष्टि का संगीत और शांति का समन्वय है। शिव के मस्तक पर विराजित गंगा और भौहों के बीच

परमात्मा, शिव की स्थापना, पालना और विनाश के लिए ब्रह्मा, विष्णु और शंकर, तीन सूक्ष्म देवताओं की रचना करते हैं

पार्वती ज्ञान की जननी हैं। पार्वती प्रश्न पूछती हैं। शिव प्रश्नों का उत्तर देते हैं। इससे ज्ञान रूप संतति का

महाशिवरात्रि का व्रत तपस्या, आत्मसंयम और भक्ति का प्रतीक है।मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने से नकारात्मक

एक गांव के पुराने शिव मंदिर में एक वृद्ध महिला प्रतिदिन झाड़ू लगाती और महादेव की सेवा करती थी। गांव

भगवान शिव के विराट स्वरूप की महिमा बताते हुए शिव पञ्चाक्षरी स्तोत्र के प्रारंभ में शिव को ‘नागेन्द्रहाराय’कहकर स्तुति की

मङ्गलमयी शिव स्तुति प्रतिदिन सुबह शिवलिंग पर जल, दूध अथवा पंचामृतस्नान के बाद फूल और श्रीफल अर्पित करें, तत्पश्चात शाम

।। जय जय शिव- राम ।। भगवान शिव दिन-रात भगवान राम के पावन नाम का स्मरण करते रहते हैं और
। शिव ताण्डव स्तोत्र (शिवताण्डवस्तोत्रम्) परम शिवभक्त लंकापति रावण द्वारा गाया भगवान शिव का स्तोत्र है, मान्यता है कि एक
भगवान राम को भगवान शंकर का उपदेश पद्मपुराण में १६ अध्यायों में भगवान् श्रीराम के प्रति भगवान् शंकर ने जो