रसोपासना – भाग-16 महामाधुर्य का अद्भुत प्रकाश

🙏श्यामसुन्दर मधुर से मधुरतम हैं… अद्भुत प्रेम के उपासक हैं ।

🙏जैसे कोई साधक आराधना करता है भगवती की… ऐसे ही आराधना में लीन रहते हैं ये हमारे श्रीश्याम सुन्दर ।

🙏भगवती की आराधना करने वाला उपासक… जैसे- भगवती के अलंकार कैसे हों… चूड़ी, बिन्दी, साड़ी, आभूषण… इन सबका चिन्तन करते हुये… भगवती को धारण कराता है… ऐसे ही श्याम सुन्दर अपनी आराध्या श्रीराधारानी का मनोरथ करते हुये… कैसी बिन्दी, कैसी चूड़ी, कैसी साड़ी…कैसा सिन्दूर !…क्या अद्भुत है ना, ये आराधना ? आराधना तो अद्भुत है ही… पर आराधना करने वाला भी महामाधुर्य से भरा हुआ है… और श्रीराधारानी माधुर्याधिष्ठात्री हैं ।

🙏”मधुर रस” या कहें “श्रृंगार रस” ये समस्त रसों में सर्वश्रेष्ठ है ।

🙏और ऐसे “मधुर रस” की नदी निकुञ्ज में निरन्तर प्रवाहित रहती हैं ।

🙏आइये – हम भी माधुर्याधिष्ठात्री “श्रीजी” की उपासना में लीन हों… क्यों कि सच्चा प्रकाश तो प्रेम का ही है… और “श्रीजी” प्रेम हैं ।

🙏आइये – महामाधुर्य के अद्भुत प्रकाश में हम भी ध्यान करें –

🙏वेणी गूँथ कर श्रीजी की… श्यामसुन्दर धन्य अनुभव कर रहे हैं ।

🙏आहा ! और इन्हें फल स्वरूप श्रीजी का आलिंगन भी प्राप्त हो ही गया ।

🙏काजल लेकर आईं थीं रंगदेवी सखी… उनके हाथों से काजल की डिबिया देखकर श्याम सुन्दर बोले…”अब हम ही सजायेंगे अपनी प्यारी को…पूरा श्रृंगार हम ही करेंगे ! “

🙏श्रीजी आनन्दित हो गयीं… सखियों ने कहा… तो हम भी दर्शन को उत्सुक हैं श्याम सुन्दर ! सखियाँ हँसीं ।

🙏चन्द्रमुखी गौरवर्णी लालिमा युक्त श्रीजी की ठोढ़ी के नीचे अपना नील प्रभा युक्त “कर कमल” रखकर ध्यान से देखा श्याम सुन्दर ने, श्रीजी के नयनों को…

रंगदेवी !

🙏ये झाँकी कितनी सुन्दर लग रही है ना ? ललिता सखी ने कहा ।

🙏हाँ ऐसा लग रहा है… जैसे – नीलकमल पर लालकमल रख दिया हो… आहा ! रंगदेवी ने कहा ।

🙏काजल की रेख नयनों में खींच दी…और थोड़ा दूर हट कर अपनी प्यारी को निहारने लगे… थोड़ी देर तो इक टक देखते ही रहे श्याम सुन्दर… मानो “त्राटक” लग गयी हो ।

🙏सखियों ने “जय जय” शब्द का उच्चारण किया तब जाकर होश आया प्यारे को…।

🙏हीरों का सुन्दर हार श्रीजी के गले में पहना रहे हैं अब श्याम सुन्दर ।

🙏नासिका में नथ – बेसर पहनाते हैं… फिर कुछ दूर हटकर निहारते हैं… मुस्कुराते हैं… स्वयं पर प्रसन्न होते हैं… ।

🙏तब प्यारे की इस प्रेम दशा को देखकर श्रीजी गदगद् हो जाती हैं… और अपने हाथों से पीला पाग श्याम सुन्दर को धारण कराती हैं…

और उस पाग को संवारती हैं ।

🙏सुन्दर कर्णफूल श्याम अपनी प्रिया के कानों में… …फिर भुज बन्द, फिर पहुँची… चूड़ियाँ और कंगन से सजाते हैं, हाथों को ।

🙏मस्तक में चन्द्रिका धारण कराते हैं… तब श्रीजी अपने प्रियतम के पाग में रत्न जटित सिर पेंच लगाकर आनन्दित होती हैं ।

🙏आहा ! पूरा कुञ्ज-निकुञ्ज चन्द्रिका की चमक से आलोकित हो उठता है… मानो ऐसा लग रहा है जैसे हजारों छोटे-छोटे दीये जल उठे हों ।

🙏सखियों के आनन्द का ठिकाना नही है… सब “जय हो जय हो” का उच्चारण बार-बार कर रही हैं… युगलवर बड़े सुन्दर लग रहे हैं… विशेष – “श्रीजी” की तो कोई उपमा ही नही है ।


तभी –

🙏महाअनुरागी श्यामसुन्दर परम आनन्दित होते हुये श्रीजी के चरणों को पकड़ लेते हैं… कुछ सकुचा-सी जाती हैं श्रीजी ।

🙏”सखी जन” के मन में हर्षोल्लास छा जाता है इस झाँकी को देखकर ।

🙏सखियों ! देखो तो… सेवा कैसे करनी है… ये अगर सीखनो होय तो परम अनुरागी श्याम सुन्दर से सीखो… आहा ! कैसे प्रेम से “प्रिया जु” के चरण को अपनी गोद में रखकर उसमें नुपुर बाँध रहे हैं ।

🙏पर जब डोरी बाँधनें लगे नुपुर में… एक क्षण के लिये “श्रीजी” के मुख चन्द्र की ओर देखा… बस – जैसे ही मुख चन्द्र की ओर देखा… फिर नयन वहीं ठहर गए… डोरी बाँधना ही भूल गए… अपलक देखें जा रहे हैं… सब कुछ भूल गए हैं ।

🙏सखियों ! इस झाँकी का दर्शन करो… जैसे चकोर चन्द्रमा को देखता है और अघाता नही है… बस देखता रहता है… ऐसे ही हमारे प्यारे श्याम सुन्दर श्रीजी को देख रहे हैं !

🙏सखी ! जैसे रस मत्त भ्रमर कमल को छोड़कर कहीं जाता नही है…ऐसे ही ये श्याम सुन्दर के नयन रूपी भ्रमर श्रीजी के मुख कमल को छोड़कर कहीं और देखते ही नही…सखी ! देखो ! जैसे योगियों की त्राटक समाधि लग जाती है ऐसे ही हमारे लाल जु की प्रिया जु को देखकर त्राटक फिर लग गयी है…सखियाँ हँसती हैं ।

🙏पर रंगदेवी सावधान करती हैं… ओ रसिकशेखर ! इस रीत से अगर आप श्रृंगार करते रहे… तो आपकी ये “श्रृंगार लीला” कभी पूरी होगी ही नही…

🙏ललिता सखी हँसते हुए बोलीं… “इनका श्रृंगार कभी पूरा हुआ है जो आज हो जायेगा”…

🙏सखियों की बात सुनकर श्याम सुन्दर सावधान हुये…और श्रीजी के चरन में नुपुर की डोरी बांध दी…महावर लगा रहे हैं श्याम सुन्दर प्रिया चरण में अब ।

🙏हो गया श्रृंगार पूरा…अब सखियों ने इत्र दिया श्याम सुन्दर को… श्याम सुन्दर ने इत्र लगाने के लिये जैसे ही फिर श्रीजी के मुख की ओर देखा… फिर ठहर गए नयन वहीं… इत्र लगाना ही भूल गए ।

🙏तुरन्त श्रीजी ने अपने नयनों को झुकाकर इत्र लगाने की बात कही…

🙏सम्भल गए थे लाल जु… और श्रीजी को इत्र लगा दिया ।

🙏तब श्याम सुन्दर ने दर्पण मंगवा कर… श्रीजी को दर्पण दिखाया ।

🙏पर श्रीजी ने अब हाथ पकड़ कर… अपने ही पास में श्याम सुन्दर को बिठाया… श्याम सुन्दर भी बड़ी ठसक से बैठे हैं ।

सखियों ने जय जयकार किया ।

🙏अरी सखियों ! भाग्यशाली तो हम हैं… जो इन लाड़ले युगल के दर्शन कर हम अपने नयनों को शीतल करती रहती हैं ।

🙏चलो अब ! इन युगल को इस “श्रृंगार चौकी” से लेकर सिंहासन में विराजमान कराओ… और अब देर भी हो रही है… युगलवर को भूख भी लग रही होगी…चलो… .

🙏ऐसा कहकर सब सखियाँ युगलवर को लेकर चलीं…

🙏उस समय सब सखियाँ बड़े प्रेम से युगलमन्त्र का गान करती हुयी चल रही थीं ।

🙏राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे !
राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे !!

🙏निकुञ्ज में महामाधुर्य का अद्भुत प्रकाश छा रहा था…

🙏…निकुञ्ज जगमग हो रहा था ।

शेष “रस चर्चा” कल –

🚩जय श्रीराधे कृष्णा🚩



🙏 Shyamsundar is the sweetest of the sweetest… He is the worshiper of wonderful love.

🙏 As a devotee worships Bhagwati… In the same way, our Shri Shyam Sundar remains engrossed in worship.

🙏 The worshiper of Bhagwati… Like- How should be the ornaments of Bhagwati… Bangle, bindi, saree, ornaments… While thinking about all these… makes Bhagwati wear… Similarly, Shyam Sundar worshiping his worship Shriradharani… what kind of bindi What kind of bangle, what kind of saree… what kind of vermilion!… How wonderful is this worship? Worship is wonderful… but the worshiper is also full of great sweetness… and Shriradharani is Madhuryadhishthatri.

🙏”Sweet taste” or say “aesthetic taste” is the best of all tastes.

🙏 And the river of such “sweet juice” flows continuously in Nikunj.

🙏 Come – let us also get engrossed in the worship of Madhuryadhishthatri “Shriji”… because the true light is of love only… and “Shriji” is love.

🙏 Let us also meditate in the wonderful light of Mahamadhurya –

🙏 Shreeji’s… Shyamsundar is feeling blessed by weaving the braid.

🙏 Ouch! And as a result, he got Shreeji’s embrace as well.

🙏 Rangdevi Sakhi had brought kajal… seeing the box of kajal from her hands, Shyam Sundar said… “Now we will decorate our beloved… we will do all the makeup!”

🙏 Shreeji became happy… friends said… then we are also eager to see Shyam Sundar! The friends laughed.

🙏 Shyam Sundar carefully looked at Shreeji’s eyes by placing his “Kar Kamal” with blue glow under the chin of Shreeji with moon-faced pride and redness.

Rangdevi!

🙏 This tableau is looking so beautiful isn’t it? Lalita Sakhi said.

🙏 Yes, it looks like… as if – red lotus has been placed on Neelkamal… Ouch! Rangadevi said.

🙏 Dragged the line of Kajal in the eyes… and moved away a little and started looking at his beloved… Shyam Sundar kept on staring for a while… as if “tratak” has taken place.

🙏 Friends pronounced the word “Jai Jai” then the beloved regained consciousness….

🙏 Beautiful diamond necklace is being worn around Shreeji’s neck, now Shyam Sundar.

🙏 Nath – Besar is worn in the nasika… then they look at some distance away… smile… are happy with themselves…

🙏 Then seeing this love condition of the beloved, Shreeji becomes gadgad… and makes Shyam Sundar wear the yellow pag with her own hands…

And grooms that pug.

🙏 Sundar Karnphool Shyam in the ears of his beloved… … then Bhuj closed, then reached… Bangles and bracelets decorate the hands.

🙏 Chandrik is worn on the head… then Shreeji rejoices by screwing the head studded with jewels in the feet of his beloved.

🙏 Ouch! The entire Kunj-Nikunj gets illuminated by the brightness of the moon… It looks as if thousands of small lamps have been lit.

🙏 There is no place for the joy of the friends… Everyone is pronouncing “Jai Ho Jai Ho” again and again… The couple is looking very beautiful… Special – “Shriji” has no comparison.

Only then –

🙏 Great Anuragi Shyamsundar holding the feet of Shreeji while being very happy… Shreeji goes somewhat shy.

🙏 Seeing this tableau fills the heart of “friends”.

🙏 Friends! See then… how to serve… If you want to learn this, then learn from the supreme devotee Shyam Sundar… Aha! How lovingly keeping the feet of “Priya Ju” in his lap, he is tying a nupur in it.

🙏 But when they started tying the string in Nupur… For a moment “Shriji”‘s face looked towards the moon… Just as soon as the face looked towards the moon… Then the eyes stopped there… forgot to tie the string… Apalak is going … have forgotten everything.

🙏 Friends! Look at this tableau… as Chakor looks at the moon and is not hurt… just keeps on looking… similarly our beloved Shyam is looking at Sundar Shreeji!

🙏 Friend! Just like the juice does not go anywhere leaving the illusionary lotus… Similarly, the illusionary eyes of Shyam Sundar do not look anywhere except the lotus face of Shreeji… Friend! See ! Just like yogis get into tratak samadhi, similarly our Lal Ju’s got into tratak after seeing Priya Ju… friends laugh.

🙏 But Rangdevi cautions… O Rasikshekhar! If you keep on doing makeup in this manner… then this “Shringar Leela” of yours will never be completed…

🙏 Lalita Sakhi laughingly said… “His makeup has ever been completed which will be done today”…

🙏 After listening to the friends, Shyam Sundar became careful… and tied the string of Nupur at Shreeji’s feet… Shyam Sundar is applying Mahavar at Priya’s feet now.

🙏 The makeup is complete… Now the friends gave perfume to Shyam Sundar… As soon as Shyam Sundar looked at Shreeji’s face to apply perfume… then the eyes stopped there… forgot to apply perfume.

🙏 Immediately Shreeji said to apply perfume by bowing his eyes…

🙏 Lal Ju was careful… and applied perfume to Shreeji.

🙏 Then Shyam Sundar ordered a mirror… showed the mirror to Shreeji.

🙏 But now Shreeji holding hands… made Shyam Sundar sit beside him… Shyam Sundar is also sitting very firmly.

Friends cheered.

🙏 Hey friends! We are fortunate… that we keep cooling our eyes by seeing this lovely couple.

Come on now! Take this couple from this “shringar chowki” and make them sit in the throne… and now it is getting late… the couple must be feeling hungry too… come on… .

Having said this, all the friends went away with the couple.

🙏 At that time all the friends were walking with great love singing the couplet mantra.

🙏Radhey Krishna Radhey Krishna Radhey Radhey ! Radhe Shyam Radhe Shyam Shyam Shyam Radhe Radhe !!

There was a wonderful light of Mahamadhurya in Nikunj…

🙏… Nikunj was shining.

The rest of “Juice Discussion” tomorrow –

🚩Jai Shri Radhe Krishna🚩

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