दिपक प्रेम का प्रज्वलित हो तभी दिपावली है

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दिपावली का त्योहार है खुशियों की बहार है। दिपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय है ।हम शरीर रूप से तो दिवाली मनाए ही साथ मे एक दृष्टिकोण अन्तर्मन मे भी डाले। अन्तर्मन मे झांक कर देख ले कि हमारे अन्दर कितने दिपक जगमगा रहे हैं।

अपने अन्तर्मन की सफाई करना बहुत आवश्यक है हम अपने मन और दिल में झांक कर पढले क्या हमारे अन्दर श्रद्धा का दिपक जल रहा है। विस्वास का दिपक अन्तर्मन मे जलता रहे। दिपक से रोशन ये जीवन हमारा हो।

दिपक प्रेम का प्रज्वलित हो जाए जन जन को प्रेम से ओतप्रोत प्रोत करले हम । आपके दिल के दिपक प्रज्वलित है तब हर क्षण हर घङी दिवाली है दिपावली पर हम जितने घरों को चमकाते है वैसे ही हमारे मन और दिल भी चमकाते रहे।

दिल हमारा प्रभु चरणों में समर्पित होकर ही चमक सकता है हम भगवान राम को दिल के अन्दर विराजमान रखे। भगवान राम नाम धन दिन दिन बढता जाता है। जैसे जैसे भक्त नाम धन में गहरी डुबकी लगाता है चेतन आत्मा का अनुभव होने लगता है। चेतन आत्मा का प्रकाश अखण्ड अदभुत है। भक्त के रोम-रोम में चेतन जागृत के प्रकाश की झलक आ जाती है हमे दिल की दिवाली मनानी है। मन मन्दिर सजा ले रे बन्दे यही तेरे काम आवेगा।

भारत देश में दिपावली हर वर्ष बहुत धुमधाम से मनाई जाती है। भगवान राम के अयोध्या आने पर घर घर दिपक जलाए गए घरों की साफ साफ-सफाई की जाती है घरो को तोरण दिप मलाओ से सजाया जाता है। इस दिन सभी नये वस्त्र पहनते हैं। माताएँ बहने अनेक तरह के मीठाई और नमकीन बनाती है। हम
हमारे देश में   2022 की दिपावली की रौनक देखते ही बनती है। वैसे हर वर्ष दिपावली को धुमधाम से मनाई जाती है। 

देश की बागडोर जब धर्मनिरपेक्ष के हाथ में होती है। सच्चे रूप मे तब दिपावली के त्योहार की रोशनी से जगमग ये देश है । आज अयोध्या में भगवान राम की स्थली में 18 लाख दिपक प्रज्वलित करके ऋषि मुनियों सन्त और महात्मा दिव्य दिपावली मनाएंगे।

दीपावली :- कार्तिक कृष्ण अमावस्या को यह पर्व मनाया जाता है। इसके बारे में पुराणों में बहुत सी कथा मिलती है । विष्णुपुराण के अनुसार समुद्र-मंथन के समय आज के ही दिन लक्ष्मी जी का प्रादुर्भाव हुआ था।
जनमानस में 14 वर्ष के बनवास के बाद राम जी के अयोध्या लौटने की ख़ुशी में यह पर्व मानाने की परंपरा है।
आज के ही दिन धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया था।
सम्राट विक्रमादित्य का राजतिलक भी दीपावली के ही दिन हुआ था।


आज देश का धर्म और संस्कृति को बढ़ावा मिला है। जब जब देश की संस्कृति की प्रगतिशील होती है तब देश के हर नागरिक के दिल में प्रेम सद्भावना सत्यता शांति का समावेश होता है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने धर्म और संस्कृति की नींव को दृढ किया है। आज उज्जैन, काशी विश्वनाथ, अयोध्या, केदारनाथ, बद्रीनाथ, हेमकुंड, नव निर्माण हुआ है तीर्थस्थल में दर्शन करके लाखों नागरिक का भाग्य उज्वल होता है। तीर्थस्थल का प्रकाश हर दिल को प्रकाशित करता है। तीर्थराज की शान्ति हमारे अन्तर्मन को अध्यात्मवाद की और लेकर जातीं हैं। जय श्री राम अनीता गर्ग

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