मन्दिर का महत्व


मन्दिर आत्मा के सम्बंध का केन्द्र है। मुर्ति आत्मा का प्रतिबिंब है। मुर्ति में भगवान हमें उसी रूप में दिखाई देते हैं। जितना हमारे अन्दर श्रद्धा विश्वास और समर्पण भाव होता है मन्दिर मन में शांति की स्थापना करता है। मन्दिर दिल को सजाता है। आज के युग में मनुष्य जितना भगवान से बात करता है उतना किसी अन्य से कर ही नहीं सकता है।

मन्दिर में भगवान के रूप को निहारते निहारते प्रेम प्रकट हो जाता है। मन्दिर के सामने से जाने मात्र से शिश स्वयं नमन करता है मन्दिर के प्रांगण मे मन प्रेम और खुशी से खिल उठता है मन्दिर में आन्नद की लहरे है शान्ति का सरोवर हैं
जीवन की सात्विकता प्रेम में है। शुभ गुणों का समावेश मनुष्य में होता है। ध्यान का सबसे सर्वोच्च साधन मन्दिर है।मन्दिर हमे एकता के सुत्र में बाधंता है।

हम ध्यान लगाने बैठते हैं बहुत प्रयास करते हैं फिर भी ध्यान नहीं लगता है। मन्दिर में भजन गाते हुए प्रभु के ध्यान में आ जाते हैं भजन गा रहे हैं अन्तर्मन मे चिन्तन चल रहा है प्रभु प्राण नाथ को निहार रहे हैं भजन का गाना भुल कर ध्यान में खो जाते हैं। फिर गाते गाते निहारते हुए खो जाते हैं। जिस दिन लो प्रभु की लग जाती है। सबमे प्रभु दिखाई देते हैं। मन्दिर जीवन धारा को व्यवस्थित करता है। आज के युग में मन्दिर करोङो व्यक्तियों की रोजी रोटी का साधन है।

मन्दिर जीवन को महकाता है। हिन्दू धर्म में मन्दिर पुजा पाठ के बैगर जीवन नीरसमय है। हिन्दू धर्म में पुजा और पर्व मनुष्य जाति के कल्याण का मार्ग है।

व्रत और त्योहार हमारे जीवन में नई उमंग की किरणें जागृत करते हैं।धर्म के पथ पर चलकर हम जीवन मुल्य को समझते हैं।

धर्म हमारे अन्दर स्थित होता है तभी हम नरम सहनशील बनेंगे। सहनशीलता हमें कर्तव्य का पाठ पढाती है।

आज के युग में मनुष्य जितना भगवान से बात करता है उतना किसी अन्य से कर ही नहीं सकता है। हिन्दू धर्म में दया का भाव कुट कुट कर भरा हुआ है। वह अन्य को पिङीत देख ही नहीं सकते हैं। मन्दिर को शब्दों में पिरो नहीं सकते हैं
जय श्री राम अनीता गर्ग



Temple is the center of soul connection. The idol is the reflection of the soul. God appears to us in the same form in the idol. As much as we have faith, belief and dedication, the temple establishes peace in the mind. The temple adorns the heart. In today’s era, man cannot talk to anyone else as much as he talks to God.

Love manifests itself while looking at the form of God in the temple. Just by passing in front of the temple, the child himself bows down; in the courtyard of the temple, the mind blooms with love and happiness; there are waves of joy in the temple, there is a lake of peace. The purity of life lies in love. Good qualities are included in a human being. The supreme means of meditation is the temple. The temple binds us in the thread of unity.

We sit to meditate and try hard but still cannot concentrate. While singing bhajans in the temple, we come to the attention of the Lord. While singing the bhajans, thoughts are going on in our heart. We are looking at the Lord Pran Nath. We forget the song of the bhajan and get lost in meditation. Then they get lost in singing and gazing. The day it becomes the Lord’s. God is visible in everything. The temple organizes the flow of life. In today’s era, temples are the means of livelihood for crores of people.

The temple adds fragrance to life. In Hindu religion, life without temple puja is dull. In Hindu religion, worship and festivals are the path for the welfare of mankind.

Fasts and festivals awaken rays of new enthusiasm in our lives. By following the path of religion we understand the value of life.

Dharma is situated within us only then we will become soft and tolerant. Tolerance teaches us the lesson of duty.

In today’s era, man cannot talk to anyone else as much as he talks to God. Hindu religion is full of compassion. He cannot see others as inferior. The temple cannot be put into words Jai Shri Ram Anita Garg

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