भगवान कृष्ण की 16108 पटरानियों का सच जानिए?

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कहते हैं कि भगवान कृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं। क्या यह सही है? इस संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं और लोगों में इसको लेकर जिज्ञासा भी है। आइए, जानते हैं कि कृष्ण की 16,108 पत्नियां होने के पीछे राज क्या है।

महाभारत अनुसार कृष्ण ने रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह किया था। विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणि भगवान कृष्ण से प्रेम करती थी और उनसे विवाह करना चाहती थी।

रुक्मणि के पांच भाई थे- रुक्म, रुक्मरथ, रुक्मबाहु, रुक्मकेस तथा रुक्ममाली। रुक्मणि सर्वगुण संपन्न तथा अति सुन्दरी थी। उसके माता-पिता उसका विवाह कृष्ण के साथ करना चाहते थे किंतु रुक्म चाहता था कि उसकी बहन का विवाह चेदिराज शिशुपाल के साथ हो। यह कारण था कि कृष्ण को रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह करना पड़ा।

पांडवों के लाक्षागृह से कुशलतापूर्वक बच निकलने पर सात्यिकी आदि यदुवंशियों को साथ लेकर श्रीकृष्ण पांडवों से मिलने के लिए इंद्रप्रस्थ गए। युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव, द्रौपदी और कुंती ने उनका आतिथ्‍य-पूजन किया।

इस प्रवास के दौरान एक दिन अर्जुन को साथ लेकर भगवान कृष्ण वन विहार के लिए निकले। जिस वन में वे विहार कर रहे थे वहां पर सूर्य पुत्री कालिन्दी, श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने की कामना से तप कर रही थी। कालिन्दी की मनोकामना पूर्ण करने के लिए श्रीकृष्ण ने उसके साथ विवाह कर लिया।

फिर वे एक दिन उज्जयिनी की राजकुमारी मित्रबिन्दा को स्वयंवर से वर लाए। उसके बाद कौशल के राजा नग्नजित के सात बैलों को एकसाथ नाथ कर उनकी कन्या सत्या से पाणिग्रहण किया। तत्पश्चात उनका कैकेय की राजकुमारी भद्रा से विवाह हुआ। भद्रदेश की राजकुमारी लक्ष्मणा भी कृष्ण को चाहती थी, लेकिन परिवार कृष्ण से विवाह के लिए राजी नहीं था तब लक्ष्मणा को श्रीकृष्ण अकेले ही हरकर ले आए।

इस तरह कृष्ण की आठ पत्नियां थी- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।

यह एक झूठ है कि श्रीकृष्ण की 16108 पत्नियां थीं : कृष्ण अपनी आठों पत्नियों के साथ सुखपूर्वक द्वारिका में रह रहे थे। एक दिन स्वर्गलोक के राजा देवराज इंद्र ने आकर उनसे प्रार्थना की, ‘हे कृष्ण! प्रागज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। क्रूर भौमासुर ने वरुण का छत्र, अदिति के कुण्डल और देवताओं की मणि छीन ली है और वह त्रिलोक विजयी हो गया है।

इंद्र ने कहा, भौमासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं और आमजनों की अति सुन्दरी कन्याओं का हरण कर उन्हें अपने यहां बंदीगृह में डाल रखा है। कृपया आप हमें बचाइए प्रभु।

इंद्र की प्रार्थना स्वीकार कर के श्रीकृष्ण अपनी प्रिय पत्नी सत्यभामा को साथ लेकर गरुड़ पर सवार हो प्रागज्योतिषपुर पहुंचे। वहां पहुंचकर भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से सबसे पहले मुर दैत्य सहित मुर के छः पुत्र- ताम्र, अंतरिक्ष, श्रवण, विभावसु, नभश्वान और अरुण का संहार किया।

मुर दैत्य के वध हो जाने का समाचार सुन भौमासुर अपने अनेक सेनापतियों और दैत्यों की सेना को साथ लेकर युद्ध के लिए निकला। भौमासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया और घोर युद्ध के बाद अंत में कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से उसका वध कर डाला।

इस प्रकार भौमासुर को मारकर श्रीकृष्ण ने उसके पुत्र भगदत्त को अभयदान देकर उसे प्रागज्योतिष का राजा बनाया। भौमासुर के द्वारा हरण कर लाई गईं 16,100कन्याओं को श्रीकृष्ण ने मुक्त कर दिया। ये सभी अपहृत नारियां थीं या फिर भय के कारण उपहार में दी गई थीं और किसी और माध्यम से उस कारागार में लाई गई थीं। वे सभी भौमासुर के द्वारा पीड़ित थीं, दुखी थीं, अपमानित, लांछित और कलंकित थीं।

सामाजिक मान्यताओं के चलते भौमासुर द्वारा बंधक बनकर रखी गई इन नारियों को कोई भी अपनाने को तैयार नहीं था, तब अंत में श्रीकृष्ण ने सभी को आश्रय दिया। ऐसी स्थिति में उन सभी कन्याओं ने श्रीकृष्ण को ही अपना सबकुछ मानते हुए उन्हें पति रूप में स्वीकार किया, लेकिन श्रीकृष्ण उन्हें इस तरह नहीं मानते थे।

उन सभी को श्रीकृष्ण अपने साथ द्वारिकापुरी ले आए। वहां वे सभी कन्याएं स्वतंत्रपूर्वक अपनी इच्छानुसार सम्मानपूर्वक द्वारका में रहती थी। महल में नहीं। वे सभी वहां भजन, कीर्तन, ईश्वर भक्ति आदि करके सुखपूर्वक रहती थीं। द्वारका एक भव्य नगर था जहां सभी समाज और वर्ग के लोग रहते थे।



It is said that Lord Krishna had 16,108 wives. Is it true? Many stories are prevalent in this regard and people are also curious about it. Come, let us know what is the secret behind Krishna having 16,108 wives.

According to the Mahabharata, Krishna abducted Rukmini and married her. Rukmani, the daughter of King Bhishmak of Vidarbha, loved Lord Krishna and wanted to marry him.

Rukmani had five brothers – Rukm, Rukmarath, Rukmabahu, Rukmakes and Rukmamali. Rukmani was full of all virtues and very beautiful. Her parents wanted her to be married to Krishna but Rukma wanted her sister to be married to Chediraj Shishupala. This was the reason that Krishna had to abduct Rukmani and marry her.

After the Pandavas successfully escaped from Lakshagriha, Shri Krishna went to Indraprastha to meet the Pandavas along with Satyiki etc. Yaduvanshis. Yudhishthira, Bhima, Arjuna, Nakula, Sahadeva, Draupadi and Kunti offered him hospitality.

During this stay, one day Lord Krishna left for Van Vihar with Arjuna. Kalindi, the daughter of Surya, was doing penance with the desire to get Shri Krishna as her husband in the forest where he was roaming. To fulfill Kalindi’s wish, Shri Krishna married her.

Then one day he brought Ujjayini’s princess Mitrabinda as a bridegroom from Swayamvara. After that, after killing the seven bullocks of King Nagnajit of Kaushal together, he took water from his daughter Satya. After that he was married to Bhadra, the princess of Kaikeya. Bhadradesha’s princess Lakshmana also wanted Krishna, but the family was not ready to marry Krishna, then Shri Krishna single-handedly brought Lakshmana away.

Thus Krishna had eight wives: Rukmani, Jambavanti, Satyabhama, Kalindi, Mitrabindha, Satya, Bhadra and Lakshmana.

It is a lie that Krishna had 16108 wives: Krishna was living happily in Dwarka with all his eight wives. One day the king of heaven Devraj Indra came and prayed to him, ‘O Krishna! The deities are crying foul due to the tyranny of Bhaumasur, the demon king of Pragjyotishpur. The ferocious Bhaumasura has snatched Varuna’s canopy, Aditi’s earrings and the gems of the deities, and the three worlds have become victorious.

Indra said, Bhaumasura has abducted many beautiful daughters of many kings and common people of the earth and kept them in his prison house. Please save us Lord.

Accepting the prayer of Indra, Shri Krishna reached Pragjyotishpur riding on Garuda with his beloved wife Satyabhama. After reaching there, Lord Krishna with the help of his wife Satyabhama first killed the six sons of Mur – Tamra, Antriksh, Shravan, Vibhavasu, Nabhashwan and Arun along with the demon Mur.

Hearing the news of the death of the demon Mur, Bhaumasura set out for war with many of his generals and an army of demons. Bhaumasura was cursed to die at the hands of a woman, so Lord Krishna made his wife Satyabhama his charioteer and after a fierce battle, Krishna finally killed him with the help of Satyabhama.

In this way, after killing Bhaumasura, Shri Krishna made his son Bhagadatta the king of Pragjyotish by giving him refuge. Shri Krishna freed 16,100 girls who were abducted by Bhaumasura. All these women were abducted or given as a gift due to fear and were brought to that prison by some other means. All of them were suffering, unhappy, humiliated, stigmatized and stigmatized by Bhaumasura.

Due to social beliefs, no one was ready to adopt these women held hostage by Bhaumasur, then in the end Shri Krishna gave shelter to all. In such a situation, all those girls accepted Shri Krishna as their husband, considering them as their everything, but Shri Krishna did not consider them as such.

Shri Krishna brought all of them with him to Dwarkapuri. There all those girls lived freely in Dwarka with respect according to their wish. Not in the palace. All of them lived there happily by doing bhajan, kirtan, devotion to God etc. Dwarka was a grand city where people of all social and class lived.

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