भाव का भूखा हूँ मैं बस भाव ही एक सार है

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भाव का भूखा हूँ मैं, बस भाव ही इक सार है।
भाव से मुझ को भजे तो, भव से बेडा पार है।

अन्न धन जल वस्त्र , यह मुझे भाता नहीं |
मन से हो जावे मेरा बस, पूरण यह सत्कार है। भाव का भूखा हूँ मैं, बस भाव ही इक सार है

भाव बिन सब कुछ भी, दे डाले तो मैं लेता नहीं। भाव से इक फूल भी, दे तो मुझे स्वीकार हैं। भाव का भूखा हूँ मैं, बस भाव ही इक सार है।

भाव बिन कोई पुकारें , मै कभी सुनता नहीं। भावपूर्ण टेर ही, करती मुझे लाचार है।
भाव जिस जन मे नही, वह अत्यंत मुझसे दूर है

भाव पूरित हृदय का और , मेरा सदा एक तार है। भाव का भूखा हूँ मैं, बस भाव ही इक सार है।

I am hungry for emotion, only emotion is the essence.
If you send me with emotion, his fleet is beyond.
Food, money and clothes, I need something.
You become my bus, this is full of hospitality.
Feeling called without hearing, I never listen.
Only one word of emotion, I am helpless.
Even if I give everything without feeling, I never take it.
If you give even a flower with a feeling, then I accept it.
Whoever has a feeling in me, comes my refuge.
There is one wire between me and his heart.

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