मन मोहन रूप तुम्हारा ह्रदय बीच बसाऊ,

मन मोहन रूप तुम्हारा,

ह्रदय बीच बसाऊ,

दो मुझको इतना ज्ञान,

ध्यान आराधन की शक्ति,

छूकर तुमको पावन बन जाऊं,

मन मोहन रूप तुम्हारा

ह्रदय बीच बसाऊ,

निरख निरख प्यारी छवि,

रोम रोम हरषाऊ,

रसना रटती नाम तुम्हारा,

मन बुद्धि ह्रदय आत्मा करते,

ध्यान तुम्हारा

मीठे मधुर पुलक भाव से,

ह्रदय तरंगों उमंगों में,

रहता प्रेम तुम्हारा

जब जब देखूं प्यारी सूरत,

अखिया हरषाती हैं

नजर हटे न तेरी ओर से

बार बार तुम्हें देखने को तरसती हैं।

पल पल हरपल ह्रदय में रहते हो

ओ मेरे अलबेले सजन!

मुझमें तुम बसते हो,

तुम बस तुम तुम ही रहते हो।

मन मोहन रूप तुम्हारा

ह्रदय बीच बसाऊ,

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