तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊं मैं

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तेरे दर को छोड कर,
किस दर जाऊँ मै
सुनता मेरी कोन है,
किसे सुनाऊं मै
जब से याद भुलाई तेरी,
लाखों कष्ट उठाएं है’

ना जाने इस जीवन में,
आकर कितने पाप कमाए हैं’
हूँ शर्मिंदा आपसे ,
क्या बतलाऊँ मैं,
तेरे दर को छोड़कर,
किस दर जाऊँ मै।

काम क्रोध की गहरी नदियां,
ये ना तरने देती है।
नाम आपका लेता हूँ तो ,
ये नाम ना लेने देती है।
भगवन दर्शन आपके,
कैसे पाऊँ मैं ।

निर्गुण सगुण रूप तुम्हारा,
ऋषि मुनि सब गाते हैं।
राम नाम की बैठ नाव में,

भवसागर तर जाते हैं

छींटा दे दो प्रेम का। ,
तब होश में आऊँ मैं,
गोद के अन्दर बैठ आपके,
गीत प्रेम के गाऊँगा।
तेरे दर को छोड़कर,
किस दर जाऊँ मै।
एक बार दर्शन दे दो भगवन,
भव सागर तर जाऊंगा
भव सागर तर जाऊंगा
बहा के आंसू प्रेम के,
तूझे रिझाऊं मै,
तेरे दर को छोड़कर,
किस दर जाऊं मै।
जो बीती सो बीती भगवन ,

बाकी उमर संभालू मै।
चरणों में बैठ आपके ,

‘गीत प्रेम के गा लूंगा’

जीवन सारे देश का ,

सफल बनाऊं मैं ।
तेरे दर को छोड़कर,

किस दर जाऊं मै

Surely I should do Sumiran, Ram Ram Shri Ram,

Leaving your rate, at what rate should I go,

I have seen the whole world, I do not meet like you.
Strong support like you, no love like you.
In what words should I sing your glory?

Let me follow your path, I don’t have that much knowledge.
I am blind to my eyes, I do not recognize good or bad.
Take me by the hand, I stumble

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