हमे आचरण को सुन्दर बनाना है

अपने मन को हम कैसे स्वच्छ रखे प्रशन उठता है। मन एक मिनट भी ठहरता नही है। मन बहुत चलायमान है। कुछ व्यक्ति मन से बहुत शान्त मिलते हैं वे व्यक्ति हर समय प्रसन्न रहते हैं। वे अपने विचारों को बार बार पढते है। अपने आप को पढना वास्तविक जीवन है। आज मोबाइल वर्डप्रेस से हमें बाहर का पढ़ने और देखने को आवश्यकता से अधिक मिल रहा है। हम पढकर सोचते हैं हम बहुत कुछ कर रहे हैं। अन्दर से हम शान्त नहीं है। ऐसा क्यों क्योंकि हमनें बाहर के विचारों को खुशी का माध्यम बनाया है। अपने मन को जानना पढना भुल रहे हैं। मै क्या चाहता हूँ मन क्या चाहता है मे बहुत अन्तर है।

आदमी मंदिर तक तो पहुँच जाता हैं मगर भगवान तक नहीं पहुँच पाता। मंदिर तक पहुँचना आसान है किंतु भगवान तक पहुँचना बहुत कठिन ।

चरण हमें मंदिर तक लेकर जाता है और आचरण भगवान तक। चरण में समर्थ होगा तो वो हमें मंदिर तक पहुँचा देगा और आचरण स्वच्छ होगा तो वो हमें भगवान तक पहुँचा देगा।

मानव मन की विकृतियां, काम क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार ही मंदिर और भगवान के बीच का पर्दा है। जब तक इन बुराइयों का पर्दा नहीं हट जाता, तब तक मंदिर में पहुँचने के बावजूद भी हम भगवान से कोसों दूर होते हैं।

मंदिर तक पहुँचना तन का विषय है और भगवान तक पहुँचना मन का।

।। निर्मल मन जन सो मोहि भावा।।
अर्थात जहाँ मन की निर्मलता है, मन की सरलता है, मन की निष्कपटता है, वहाँ भगवान का वास अवश्यमेव है।

मंदिर बुहारने के साथ-साथ मन को बुहारने और उसे स्वच्छ करने पर भी जोर दिया जाए तो भगवान तक पहुँचना और भी आसान हो जाएगा।

Man reaches the temple but cannot reach God. It is easy to reach the temple but very difficult to reach God.

The feet take us to the temple and the conduct to God. If we are able in our feet, then he will take us to the temple and if our conduct is clean, then he will take us to God.

Perversions of the human mind, lust, anger, greed, attachment, ego are the veil between the temple and God. Until the veil of these evils is removed, even after reaching the temple, we are far away from God.

Reaching the temple is a matter of the body and reaching God is a matter of the mind.

, Pure mind, people are so fascinated.
That is, where there is purity of mind, simplicity of mind, sincerity of mind, God’s abode is definitely there.

Along with cleaning the temple, emphasis is also laid on cleaning the mind and cleaning it, then it will be easier to reach God.

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