दिपावली

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प्रश्न – दीपावली कब है
उत्तर – सोमवार 24 अक्टूबर, 2022

प्रश्न – दीपावली के 5 दिन कौन से हैं?
उत्तर – धनतेरस, नर्क चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन (दीपावली), गोवर्धन पूजा, भाईदूज ।
प्रश्न – दिवाली पर आप क्या करते हैं?
उत्तर – भगवान गणेश, कुबेर और मां लक्ष्मी पूजा अर्चना करते हैं तथा लोग अपने घरों में लक्ष्मी आगमन हेतु साफ-सफाई और रंग-रोगन करते हैं ।


कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी मतलब दीपावली के एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इससे जुड़ी हुई यूं तो कई किंवदंतियां है, मगर मान्यता ये है कि नरक चतुर्दशी का पूजन कर अकाल मृत्यु से मुक्ति और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज से प्रार्थना की जाती है। इससे जुड़ी कथाओं के तहत भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक माह में कृष्ण चतुर्दशी के दिन नरकासुर का वध करके देवताओं और ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलवाई थी।

दिपावली का त्योहार भारत वर्ष में इस लिए मनाया जाता है इस दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास का समय बिताकर। लंकापति रावण पर विजय प्राप्त कर के अयोध्या आऐ थे उनके आने की खुशी में घर धर में दिपक जलाए गए दिपावली मनाई जाती है। दिपावली के एक महीने पहले से ही हम घरो को साफ करते हैं सजाते हैं दिवाली के आगमन की हम सब इन्तजार करते हैं दिवाली से 11 दिन पहले करवा चौथ का व्रत सुहागिनों अपने पति की जीवन रक्षा के लिए करती है और शाम को चन्द्रमा देखकर चन्द्रमा से अपने पति की सुख समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। एक सप्ताह पहले अहोई अष्टमी आती है माताए अपने बच्चों के जीवन सुरक्षा के लिए व्रत रखती है।दिवाली पर घरों में दिल में रोनक देखते ही बनती है। हर माता बहन अपने घरों को ऐसे सजाती है कि भगवान हमारे घर में आ रहे हैं।

बहनो एक दिपक दिल में सजा लेना दिल की पवित्रता सबसे बड़ी दिवाली हैं

इसके साथ ही भगवान कृष्ण ने सोलह हजार कन्याओं को नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त करवाया था। कथाएं चाहे जो हों, बात तो सिर्फ इतनी ही है चाहे हम इसे अंधकार पर प्रकाश के उत्सव के तौर पर मनाएं, लेकिन इसमें हमारे इहलोक के साथ ही हमारे परलोक की भी चिंता का निदान किया जाता है।

ज्ञान

कार्तिक अमावस्या पर जब चांद गायब रहता है रात गहरे अंधकार को साथ लेकर उतरती है, हम मिट्टी के छोटे-छोटे

दीपकों की रोशनी लेकर उस गहन अंधकार से लड़ने की कोशिश करते हैं और उसमें कामयाब भी होते हैं, लेकिन ये सिर्फ प्रतीक है। अंधकार प्रतीक है, जीवन में असद् का, नकारात्मकता का, विकारों, अज्ञान और बुराइयों का…। प्रकाश प्रतीक है, सद् का, सकारात्मकता का, सद्विचारों और ज्ञान उत्सव का। तभी तो लक्षमी के साथ ही सरस्वती और गणपति की भी पूजा की जाती है।

कुल मिलाकर लक्ष्मी वहां नहीं ठहरती है, जहां बीमारी, गंदगी हो। जहां कंजूसी हो वहां भी कृपा नहीं रहती मतलब लक्ष्मी सद् अवधारणा है। लक्ष्मी सिर्फ धन की देवी नहीं हैं, वो जीवन की समग्रता का पर्याय है। लक्ष्मी मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, शांति, उदारता… जहां सब कुछ अच्छा हो वहां लक्ष्मी ठहरती है। फिर दीपावली पर होने वाले पूजन का नाम सिर्फ लक्ष्मी पूजन है, पूजन में तो बुद्धि के देवता गणपति और कला-ज्ञान की देवी सरस्वती भी शामिल हुआ करती है।

सवाल ये उठा था कि दीपावली यदि सिर्फ लक्ष्मी-पूजन का ही पर्व होता तो एक ही दिन होता… ऐसा क्यों है कि दीपावली को हम पाँच दिन तक मनाते हैं? सोचें तो लगता है कि दीपावली सिर्फ धन की देवी लक्ष्मी की पूजा का उत्सव ही नहीं है। ये जीवन की समग्रता का उत्सव है। अच्छा स्वास्थ्य, उदार मन, मोक्ष, समृद्धि, अर्थ और रिश्ते… सभी का पर्व है दीपावली।

लक्ष्मी मतलब विष्णु की अर्धांगिनी तथा विष्णु मतलब प्रजापालक जहा लक्ष्मी सुख और समृद्धि की देवी है, सिर्फ समृद्धि की नहीं। समृद्धि सुख के रास्ते आती हैं, तभी तो सारे सद् जाकर समृद्धि में मिलते हैं। ये हमारी कुंद बुद्धि है कि हमने लक्ष्मी को सिर्फ समृद्धि से जोड़े रखा है जबकि लक्ष्मी एक विस्तृत विचार है, फिर दीपावली कैसे हुआ सिर्फ समृद्धि का उत्सव, दीपावली मतलब सद् का उत्सव पूरी सृष्टि के लिए सार्वजनिक कल्याण का उत्सव… जीवन की समग्रता का उत्सव, मानवता के सर्वांग उत्थान का उत्सव है, इसे सिर्फ समृद्धि से जोड़कर हम इस उत्सव को दर्शन को सीमित कर रहे हैं।

प्रश्न – दीपावली का सांस्कृतिक महत्व
उत्तर – दीपावली दीपों का त्योहार है। आध्यात्मिक रूप से यह ‘अन्धकार पर प्रकाश की विजय’ को दर्शाता है।



Question – When is Diwali Answer – Monday 24 October, 2022

Question – What are the 5 days of Deepawali? Answer – Dhanteras, Hell Chaturdashi, Lakshmi Puja (Deepawali), Govardhan Puja, Bhai Dooj. Question – What do you do on Diwali? Answer – Lord Ganesha, Kuber and Maa Lakshmi offer prayers and people clean and paint their homes for the arrival of Lakshmi.

The Chaturdashi of Krishna Paksha of Kartik month means Narak Chaturdashi is celebrated a day before Deepawali. There are many legends related to this, but the belief is that by worshiping Narak Chaturdashi, Yamraj is prayed for freedom from premature death and health protection. According to the legends related to this, Lord Krishna killed Narakasura on the day of Krishna Chaturdashi in the month of Kartik and liberated the gods and sages from his terror.

The festival of Diwali is celebrated in India because on this day Lord Rama spent 14 years of exile. Lankapati had come to Ayodhya after conquering Ravana, in the joy of his arrival, Deepawali is celebrated by lighting a lamp in the house. One month before Diwali, we clean the houses, we all wait for the arrival of Diwali. Praying for the happiness and prosperity of her husband. A week before Ahoi Ashtami comes, mothers keep a fast for the safety of their children. On Diwali, it is seen in the hearts of the homes. Every mother and sister decorates their homes in such a way that God is coming to our house.

Sisters, take a lamp in the heart. Purity of the heart is the biggest Diwali.

Along with this, Lord Krishna had freed sixteen thousand girls from the prison of Narakasura. Whatever be the stories, the only thing is that even if we celebrate it as a celebration of light over darkness, but in this the concern of our world as well as our afterlife is resolved.

Knowledge

On Kartik Amavasya, when the moon is missing, the night descends with deep darkness, we are small pieces of soil.

By taking the light of the lamps, we try to fight that deep darkness and also succeed in it, but it is only a symbol. Darkness is a symbol of evil in life, of negativity, of vices, ignorance and evils…. Light is a symbol of goodness, of positivity, of good thoughts and the festival of knowledge. That is why along with Lakshmi, Saraswati and Ganapati are also worshipped.

Overall Lakshmi does not stay where there is disease, dirt. Where there is miserliness, there is no grace, which means Lakshmi is a good concept. Lakshmi is not just the goddess of wealth, she is synonymous with the totality of life. Lakshmi means health, cleanliness, peace, generosity… Where everything is good, Lakshmi stays there. Then the name of worship on Deepawali is only Lakshmi Puja, in the worship Ganapati, the god of wisdom and Saraswati, the goddess of art and knowledge, is also involved.

The question was raised that if Deepawali was only a festival of Lakshmi-worship, then it would have been on only one day… Why is it that we celebrate Deepawali for five days? If you think about it, it seems that Deepawali is not just a festival of worship of Lakshmi, the goddess of wealth. It is a celebration of the totality of life. Good health, generous mind, salvation, prosperity, meaning and relationships… Diwali is the festival of all.

Lakshmi means consort of Vishnu and Vishnu means Prajapalak where Lakshmi is the goddess of happiness and prosperity, not just of prosperity. Prosperity comes in the way of happiness, only then all the good go and meet in prosperity. It is our blunt intellect that we have associated Lakshmi only with prosperity whereas Lakshmi is an elaborate idea, then how was Deepawali just a festival of prosperity, Deepawali means a festival of goodness, a celebration of public welfare for the whole creation… a celebration of the totality of life It is a celebration of the all-round upliftment of humanity, by linking it only with prosperity, we are limiting the philosophy to this festival.

Question – Cultural importance of Deepawali Answer – Deepawali is the festival of lights. Spiritually it represents the ‘victory of light over darkness’.

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