आज का समय

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  पहले हम यह समझते थे कि हम जल्दी से घर जाए घर की एक एक चीज को चमका कर रखते थे उसी में अपने जीवन को खोजते थे।हमारा घर परिवार में खुशीयां लहराती थी। समय को महत्व और स्वच्छता जीवन के दो पहलू थे।लेकिन आज का समय  बदल गया है।आज की युवा पीढ़ी समय की किमत को नहीं समझती है।वह अपने सुख को सर्वोपरि मानतीं है। वह यह नहीं जानती है घर परिवार को जोड़ कर रखना जीवन का आधार स्तम्भ है।सहनशीलता प्रेम समर्पित भाव खत्म हो गए हैं।क्योंकि हम भोजन बनाने वाली पर हुकुम चलाते हैं। कोई हमारे सामने उल्ट कर बोल नहीं सकता है। यह बाहरी खुशी से क्या आजकल के बच्चों के मन में टिकाव है नहीं है। तभी सबकुछ होते हुए भी शान्त नहीं है।

घरों से दीपक पुजा पाठ तो खत्म हुए ही साथ मे आज की युवा पीढ़ी ने कीचन के महत्व को भी शुन्य पर है। आज खाना बनाना घर के कार्य करने में छोटापन महसूस किया जाता है। सभी बाहर का ही खाना पसंद करते हैं।हम मेहनत करना नहीं चाहते हैं। शरीर की मेहनत दिल को स्टरोंग बनाती है। कीचन है लेकिन उस कीचन से जुङाव खत्म हो गया है। क्योंकि कीचन काम वाली के हाथ में है। क्या कीचन खाना पकाने मात्र के लिए है। गृहस्थ जीवन में कीचन प्रेम का सागर है कीचन से प्रेम की लहर चलती परिवार को प्रेम से सिंचती। घर खुशीयो से भर जाता था। कीचन में भाव और प्रेम से बना भोजन दिल को तृप्त करता है कीचन में शुद्ध सात्विक भोजन सारी थकावट को मिटाता है सम्बन्ध मजबूत होते हैं। ग्रहणी जब भोजन पकाती है तब भावना के साथ भोजन बनाती है आज मैं मेरे पति बच्चों के लिए बहुत स्वादिष्ट बहुत अच्छा मेरे बेटे को ऐसे rice पसन्द है मै बहुत ही अच्छे rice, पनीर की सब्जी बनाऊंगी। कितने ही समय तक हम अपने परिवार को मन ही मन याद करते थे। मेरे पति आते ही होंगे हम प्रेम से भोजन करेगे। जल्दी से देखती हूं पनीर की सब्जी में नमक तो ठीक है। इन सब भावो को युवा पीढ़ी मिटा देना चाहती है। मार्केट से जा जा कर घर के लिए समान खरीद कर लाते थे। उन्ही में खुशी ढुंढते थे। आज का व्यक्ति on line purchase पर है। क्या मन को खुशी मिली की आज हमारे घर यह चीज आई है। आज on line purchase की कल फिर purchase करने लग गए ।हम मार्केट जाकर समान खरीदते कुछ समय यह सोचते हुए निकल जाता हम मार्केट से यह लेकर आएगे। घर में घर की बात से परिवार में खुशी का माहोल रहता था। आज दिल को छुने वाली बातें और खुशीयां छीन गई है क्योंकि on line market से हम खरीदते बहुत है लेकिन बात यंहा दिल और मन के भराव की है। हमारे मन ओर ओर की दोङ में लग गया है। पहले जब हम market से समान लाते थे बीस चीज देखकर मन संतुष्ट होता था दिल  छोटे हो गए है। आज व्यक्ति सन्तुष्ट नहीं है हमने अपने कीचन को छोटा किया है तभी हमारे घरो में ड्रीक्स और नोन वज आकर सज गए हैं। हम अधिक आधुनिक हो गए हैं। हमारे घरो में घी  सादे भोजन खत्म हो गए हैं। हमे जो भी प्राप्त होगा वह घर में घर के सदस्यों के विचारों की शुद्धता पर ही होगा। क्या हम बहुत सा धन कमा कर बङे शहर में रहकर तृप्त हुए नहीं। मै देखती बङे शहर और बङे पैसे वालो की भुख लालसा का रूप लेती है। आज छोटे शहर में रहने वालो को बङे शहर वाले हीन दृष्टि से देखते हैं। उनके धन को लुट लेना चाहते हैं। लेकिन वो ये नहीं जानते हैं दिल के धनी को आप क्या लुटोगे।
मेरी मात पिता से प्रार्थना है। आप अपने घर को कभी मत छोड़ना  ये शहर का सुख सुख नहीं है ये दिल को रूलाता है। बच्चों के पास जाकर आप वैसे ही होंगे जैसे किसी पक्षी के पंख काट दिए गए हो।

हमारे सनातन धर्म में रसोई हिन्दी शब्द था। जंहा प्रेम की वर्षा होती थीं रसोई में दुध दही मक्खन से घर महकता था हम परिवार रिस्तेदार के कार्य में हाथ बटाते थे। हमे शरीर के स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए मेहनत करनी होगी। जीवन की खुशी कङी मेहनत समर्पित भाव में है।बेड पर बैठकर कार्य से दुर भागकर कुछ भी हासिल नहीं होगा। चुनौतियों को स्वीकार करना जिन्दगी हैं।

जय श्री राम अनीता गर्ग



Earlier we used to think that we used to keep every item of the house shining brightly and search for our life in it. Our house used to bring happiness in the family. Importance of time and cleanliness were two aspects of life. But today’s time has changed. Today’s young generation does not understand the value of time. She considers her happiness as paramount. She does not know that keeping the family together is the cornerstone of life. Tolerance, love, dedication, feelings are gone. Because we dictate the food maker. No one can speak in front of us. It is not from external happiness what is lingering in the minds of children of today. Even then everything is not calm.

घरों से दीपक पुजा पाठ तो खत्म हुए ही साथ मे आज की युवा पीढ़ी ने कीचन के महत्व को भी शुन्य पर है। आज खाना बनाना घर के कार्य करने में छोटापन महसूस किया जाता है। सभी बाहर का ही खाना पसंद करते हैं।हम मेहनत करना नहीं चाहते हैं। शरीर की मेहनत दिल को स्टरोंग बनाती है। कीचन है लेकिन उस कीचन से जुङाव खत्म हो गया है। क्योंकि कीचन काम वाली के हाथ में है। क्या कीचन खाना पकाने मात्र के लिए है। गृहस्थ जीवन में कीचन प्रेम का सागर है कीचन से प्रेम की लहर चलती परिवार को प्रेम से सिंचती। घर खुशीयो से भर जाता था। कीचन में भाव और प्रेम से बना भोजन दिल को तृप्त करता है कीचन में शुद्ध सात्विक भोजन सारी थकावट को मिटाता है सम्बन्ध मजबूत होते हैं। ग्रहणी जब भोजन पकाती है तब भावना के साथ भोजन बनाती है आज मैं मेरे पति बच्चों के लिए बहुत स्वादिष्ट बहुत अच्छा मेरे बेटे को ऐसे rice पसन्द है मै बहुत ही अच्छे rice, पनीर की सब्जी बनाऊंगी। कितने ही समय तक हम अपने परिवार को मन ही मन याद करते थे। मेरे पति आते ही होंगे हम प्रेम से भोजन करेगे। जल्दी से देखती हूं पनीर की सब्जी में नमक तो ठीक है। इन सब भावो को युवा पीढ़ी मिटा देना चाहती है। मार्केट से जा जा कर घर के लिए समान खरीद कर लाते थे। उन्ही में खुशी ढुंढते थे। आज का व्यक्ति on line purchase पर है। क्या मन को खुशी मिली की आज हमारे घर यह चीज आई है। आज on line purchase की कल फिर purchase करने लग गए ।हम मार्केट जाकर समान खरीदते कुछ समय यह सोचते हुए निकल जाता हम मार्केट से यह लेकर आएगे। घर में घर की बात से परिवार में खुशी का माहोल रहता था। आज दिल को छुने वाली बातें और खुशीयां छीन गई है क्योंकि on line market से हम खरीदते बहुत है लेकिन बात यंहा दिल और मन के भराव की है। हमारे मन ओर ओर की दोङ में लग गया है। पहले जब हम market से समान लाते थे बीस चीज देखकर मन संतुष्ट होता था दिल छोटे हो गए है। आज व्यक्ति सन्तुष्ट नहीं है हमने अपने कीचन को छोटा किया है तभी हमारे घरो में ड्रीक्स और नोन वज आकर सज गए हैं। हम अधिक आधुनिक हो गए हैं। हमारे घरो में घी सादे भोजन खत्म हो गए हैं। हमे जो भी प्राप्त होगा वह घर में घर के सदस्यों के विचारों की शुद्धता पर ही होगा। क्या हम बहुत सा धन कमा कर बङे शहर में रहकर तृप्त हुए नहीं। मै देखती बङे शहर और बङे पैसे वालो की भुख लालसा का रूप लेती है। आज छोटे शहर में रहने वालो को बङे शहर वाले हीन दृष्टि से देखते हैं। उनके धन को लुट लेना चाहते हैं। लेकिन वो ये नहीं जानते हैं दिल के धनी को आप क्या लुटोगे। मेरी मात पिता से प्रार्थना है। आप अपने घर को कभी मत छोड़ना ये शहर का सुख सुख नहीं है ये दिल को रूलाता है। बच्चों के पास जाकर आप वैसे ही होंगे जैसे किसी पक्षी के पंख काट दिए गए हो।

Kitchen was the Hindi word in our Sanatan Dharma. Where love used to rain, the house smelled of milk and curd butter in the kitchen, we used to help in the work of family relatives. We have to work hard for the health of the body and peace of mind. The joy of life lies in the dedication and hard work. Nothing will be achieved by running away from work while sitting on the bed. Accepting challenges is life.

Jai Shri Ram Anita Garg

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