नाम ध्वनि

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रूह को तो परम पिता परमात्मा का नाम चिंतन और वन्दन ही सजा सकता है। हमे परमात्मा के चिन्तन में इतना गहरा उतरना है कि हमे पुरा शब्दकोश परम पिता परमात्मा का नाम लगे और हमारा मस्तक कोटि कोटि प्रणाम करे जय जय गुरुदेव, परमात्मा का नाम हम एक जबान से लेते है। हमे ऐसा लगता है हम एक समय एक परमात्मा बोलते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। वह परमात्मा हमारे रोम रोम में ध्वनि प्रकट कर देता है। हमारे रोम रोम से अनेकों ध्वनियां परमात्मा परमात्मा की गुंज  रही है। भक्त की सांस में धङकन में भगवान नाथ के नाम ध्वनि गुंजने लगती है। तब भक्त हर घङी हर पल आनंद मगन रहता है। अन्तर्मन मे ध्वनि की गुंज बाहर भी ध्वनि की गुंज, आज मैं किरतन में गई मै देखती हूं कि मेरे हाथ से पर से अंग अंग से परमात्मा की ध्वनि निकल रही है। मै आनंद मगन हो जाती हूं।जय श्री राम अनीता गर्ग



Only contemplation and worship of the Supreme Father, the Supreme Soul, can decorate the soul. We have to delve so deeply into the contemplation of God that we should get the name of the Supreme Father, the Supreme Soul, and our head should salute each and every one, Jai Jai Gurudev, we take the name of God with one tongue. We feel that we speak one God at a time, but it is not so. That God manifests sound in our hair and hair. Many sounds of the Supreme Soul are reverberating from our Rome and Rome. In the breath of the devotee, the sound of the name of Lord Nath starts reverberating. Then the devotee remains ecstatic every moment of every hour. The sound of sound in the heart, the sound of sound outside also, today I went to the Kirtan and I see that the sound of God is emanating from every part of my hand. I am ecstatic. Jai Shri Ram Anita Garg

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