योग शक्ति से कुण्डलिनी जागृत  विद्या

सांदिपनि ने सिखाई योग शक्ति से कुण्डलिनी जागृत करने की विद्या |

गुरु सांदिपनि श्री कृष्ण और बलराम को कुण्डलिनी जागरण की विधि सिखाते हुए बताते है कि मनुष्य के शरीर में एक सूक्ष्म शरीर भी होता है, जिसके अंदर सात चक्र होते है, लिंग और गुदा के मध्य स्थित मूलाधार चक्र, लिंग के मूल स्थान पर स्थित स्वाधिष्ठान चक्र, नाभि में स्थित मणिपुर चक्र, हृदय में स्थित अनाहत चक्र, कंठ में स्थित विशुद्धि पद्म, दोनों भौंहों के मध्य स्थित आज्ञा चक्र और सिर के शीर्ष पर स्थित सातवाँ चक्र सहस्त्रार चक्र। गुरु सभी चक्रों की विशेषताओं का विवरण बताते हुए कहते है कि योग के द्वारा इन चक्रों की शक्तियों के जागृत करने से प्राप्त शक्ति के द्वारा मनुष्य बहुत दूर की वस्तुओं को भी देख सकता है, दूर की आवाजों को सुन सकता है, दूर बैठे योगी से साक्षात्कार कर सकता है। श्री कृष्ण के प्रश्न करने पर गुरु बताते हैं कि पंचभूतों से बना हुआ यह स्थूल शरीर प्रकृति के नियमों में जकड़ा हुआ है किन्तु जिनके अन्दर योग शक्तियों का विकास हो जाता है, वह यह स्थूल शरीर छोड़कर सूक्ष्म शरीर के द्वारा कही भी जा सकते हैं। सायंकाल सुदामा श्री कृष्ण से सूक्ष्म शरीर द्वारा यात्रा किए जाने की बाते सुनकर कहता है, यदि वह भी उनकी तरह प्रतिभावान होता तो वह सूक्ष्म शरीर धारण करके प्रतिदिन अपनी मां के पास जाकर उनके हाथों से बना हुआ माखन खाता है। अगले दिन माता सरस्वती के आदेश पर गुरु अपनी तपोबल की शक्ति से अपने अंदर की समस्त योग की शक्तियां और सिद्धियां श्री कृष्ण और बलराम को समर्पित कर देते है और तत्पश्चात वह उन दोनों को सूक्ष्म शरीर में परम बद्री वन ले जाकर में तपस्या कर रहे सिद्ध योगियों के दर्शन भी कराते है।

संसार में यदि मनुष्य को कर्म के साथ धर्म के सही सामंजस्य को समझना हो तो इसके लिए श्रीमद् भगवत गीता से बड़ा ग्रंथ नहीं हो सकता। यह ग्रंथ दिव्य है इसीलिए विश्व में सनातन धर्म के अलावा अन्य धर्मों को मानने वाले मनुष्य भी श्री मद् भगवत गीता और श्री कृष्ण के अनुयायी है। सनातन धर्म में श्री भगवान कृष्ण को सोलह कलाओं से पूर्ण अवतार माना गया है। मानव जीवन से जुड़े सभी प्रश्नो का उत्तर आपको श्रीकृष्ण के जीवन से मिल सकता है। श्री भगवत् गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद व उपदेशों का संकलन है। इन उपदेशों को आप अपने जीवन में समाहित कर परमात्मा से जुड़ सकते है।



Sandipani taught the art of awakening Kundalini through the power of Yoga.

Guru Sandipani, while teaching the method of Kundalini awakening to Shri Krishna and Balram, explains that there is a subtle body in the human body, inside which there are seven chakras, Muladhar Chakra located between the penis and anus, Swadhisthana located at the root of the penis. Chakras, Manipura Chakra located in the navel, Anahata Chakra located in the heart, Vishuddhi Padma located in the throat, Ajna Chakra located between the eyebrows and the seventh chakra Sahasrara Chakra located on the top of the head. While explaining the characteristics of all the Chakras, the Guru says that by the power obtained by awakening the powers of these Chakras through Yoga, man can see even very distant objects, can hear distant sounds, can communicate with the Yogi sitting far away. Can do interviews. On asking Shri Krishna’s question, the Guru explains that this gross body made up of five elements is bound by the laws of nature, but those who develop the powers of yoga within them can leave this gross body and go anywhere through the subtle body. In the evening, Sudama, after hearing from Shri Krishna about traveling through a subtle body, says that if he too was talented like him, then he would have assumed a subtle body and would have gone to his mother every day and eaten the butter made by her hands. The next day, on the orders of Mother Saraswati, the Guru, with the power of his penance, dedicates all the yogic powers and accomplishments within him to Shri Krishna and Balram and after that, he takes both of them in their subtle bodies to the Param Badri forest where the Siddhas are performing penance. Also gives darshan of yogis.

In this world, if a person wants to understand the correct harmony of religion with action, then there cannot be a bigger book than Shrimad Bhagwat Geeta. This book is divine, that is why people in the world who believe in religions other than Sanatan Dharma are also followers of Shri Mad Bhagwat Geeta and Shri Krishna. In Sanatan Dharma, Shri Lord Krishna is considered to be the complete incarnation of sixteen arts. You can get answers to all the questions related to human life from the life of Shri Krishna. Shri Bhagwat Geeta is a compilation of dialogues and teachings of Krishna and Arjun. You can connect with God by incorporating these teachings in your life.

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