
हांडी टेढ़ी हो तो दोष कुम्हार का होता है
जिस देह पर तुम हँसते हो,उसे ईश्वर ने स्वयं गढ़ा है।हांडी टेढ़ी हो तो दोष कुम्हार का होता है।— ऋषि

जिस देह पर तुम हँसते हो,उसे ईश्वर ने स्वयं गढ़ा है।हांडी टेढ़ी हो तो दोष कुम्हार का होता है।— ऋषि


पुरी के पास एक छोटा-सा गाँव था — वहाँ एक गरीब लेकिन परम भक्त बालक रहता था, नाम था माधव।
माओत्से-तुंग ने अपने बचपन की एक छोटी सी घटना लिखी है। लिखा है कि मेरी मां का एक बगीचा था।

पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे शयनम्।इह संसारे बहुदुस्तारे, कृपयाऽपारे पाहि मुरारेभजगोविन्दं भजगोविन्दं, गोविन्दं भजमूढमते।नामस्मरणादन्यमुपायं, नहि पश्यामो भवतरणे ॥

भक्तमाल ग्रन्थ रचना जानकी जी की प्रधान सखी चन्द्रकला जी ही आचार्य स्वामी श्रीअग्रदेवजी महाराज के रूप में प्रकट हुई
सत्त्वगुणसम्पन्न जीव साधना में उन्नति करते-करते जब इस दशा पर पहुँच जाते हैं कि श्रीभगवद्दर्शन के बिना उन्हें चैन नहीं

महात्मा बुद्ध का अंतिम दिन था। वह शांत और स्थिर थे, जैसे स्वयं मृत्यु का भी स्वागत कर रहे हों,

महर्षि वेदव्यासकृत ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणपति खण्ड में श्री गणेश जी के अद्भुत चरित्र का वर्णन है।(उस अद्भुत चरित्र के