प्रातः काल आँख खुलने पर कर दर्शन करते हुए भगवान की प्रार्थना करना चाहिए-

।। प्रार्थना ।।

प्रातः काल आँख खुलने पर कर दर्शन करते हुए भगवान की प्रार्थना करना चाहिए-

कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमूले सरस्वती।
करमध्ये तु गोविन्दः, प्रभाते कर दर्शनम्।।

प्रातः काल उठकर कर दर्शन करते हुए मन में विचार करना चाहिए कि आज मै इन हाथो से सत्कर्म ही करुँगा ताकि परमात्मा मेरे घर पधारने की कृपा करें।

हाथ क्रिया शक्ति का प्रतीक है- भगवान से प्रार्थना करना चाहिए कि जिस प्रकार आपने अर्जुन का रथ हाँका था उसी प्रकार आप मेरे जीवन रथ के सारथी बनें।

फिर नवग्रहों का ध्यान करना चाहिए-

ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु।।

ब्रह्मा, विष्णु और शिव भगवान, सूर्य, चंद्रमा, भूमि सुत यानी मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु सभी ग्रह शांति कारक हों।

तब नासिका के पास हाथ ले जाकर देखना चाहिए, यदि दायाँ स्वर चल रहा हो दायाँ पैर, बायाँ स्वर चल रहा हो तो बायाँ पैर धरती पर रखना चाहिए, पैर रखने से पूर्व प्रार्थना करना चाहिए-

समुद्र वसने देवि, पर्वतस्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे।।

माता पिता एवं गुरुजनो को प्रणाम करना चाहिए।

नित्य क्रिया से (शौचादि) पहले बोलना चाहिए-

उत्तिष्ठन्तु सुरा: सर्वेयक्षगन्धर्व किन्नरा।
पिशाचा गुह्यकाश्चैव मलमूत्र करोम्यहं।।

निवृत्त होकर दातुन करते समय प्रार्थना करनी चाहिए-

हे जिह्वे रस सारज्ञे, सर्वदा मधुरप्रिये,
नारायणाख्य पीयूषम् पिव जिह्वे निरन्तरं।।

आयुर्बलं यशो वर्च: प्रजा पशुवसूनि च,
ब्रह्म प्रज्ञाम् च मेघाम् च त्वम् नो देहि वनस्पते।।

सेवा पूजा-

स्नान से पूर्व जल मे गंगादि का आवाहन करने हेतु पढ़ना चाहिए-

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन सन्निधिं कुरु।।

फिर निम्न मंत्रो को बोलते हुए स्नान करना चाहिए-

अतिनीलघनश्यामं नालिनायतलोचनम्।
स्मरामि पुण्डरीकाक्षं तेन स्नातो भवाम्यहम्।।

स्नानादि से निवृत्त होकर एकान्त मे भगवान की सेवा पूजा करने के लिए मानसिक शुद्धि के लिए निम्न मन्त्रों द्वारा अपने ऊपर जल छिड़कना चाहिए-

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतर: शुचिः।।

निम्न मंत्रो को पढ़ते हुए शिखा बन्धन करना चाहिए-

चिद्रूपिणि ! महामाये ! दिव्यतेज:समन्विते।
तिष्ठ देवि ! शिखामध्ये तेजो वृद्धिम् कुरुष्व मे।।

चन्दन लगाना चाहिए-

चन्दनस्य महत्पुण्यं पवित्रं पापनाशनम्।
आपदां हरते नित्यं लक्ष्मी तिष्ठति सर्वदा।।

भगवान की स्तुति करना चाहिए-

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,
विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गं।
लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिर्भिध्यानगम्यं,
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

शान्ताकारं- जिनकी आकृति अतिशय शांत है, वह जो धीर क्षीर गंभीर हैं,

भुजग-शयनं- जो शेषनाग की शैया पर शयन किए हुए हैं (विराजमान हैं),

पद्मनाभं- जिनकी नाभि में कमल है,

सुरेशं- जो ‍देवताओं के भी ईश्वर और

विश्वाधारं- जो संपूर्ण जगत के आधार हैं, संपूर्ण विश्व जिनकी रचना है,

गगन-सदृशं- जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं,

मेघवर्ण- नीलमेघ के समान जिनका वर्ण है,

शुभाङ्गम्- अतिशय सुंदर जिनके संपूर्ण अंग हैं, जो अति मनभावन एवं सुंदर हैं।

लक्ष्मीकान्तं- ऐसे लक्ष्मी के कान्त ( लक्ष्मीपति )

कमल-नयनं- कमलनेत्र (जिनके नयन कमल के समान सुंदर हैं)

योगिभिर्ध्यानगम्यम्- (योगिभिर- ध्यान- गम्यम्) – जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किए जाते हैं, (योगी जिनको प्राप्त करने के लिया हमेशा ध्यानमग्न रहते हैं)

वन्दे विष्णुं- भगवान श्रीविष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ (ऐसे परमब्रम्ह श्री विष्णु को मेरा नमन है)

भवभय-हरं- जो जन्म-मरण रूप भय का नाश करने वाले हैं, जो सभी भय को नाश करने वाले हैं।

सर्वलोकैक- नाथम्- जो संपूर्ण लोकों के स्वामी हैं, सभी चराचर जगत के ईश्वर है।

हे नाथ आपने जब अजामिल जैसे पापी का उद्धार कर
दिया तो फिर आप मेरी ओर क्यो नहीं देखते ?

स्तुति के बाद एकान्त में बैठकर प्रभु के नाम का कीर्तन करना चाहिए-

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे ….
हे नाथ नारायण वासुदेव।

अपना कामकाज करते समय भी प्रभु का स्मरण करते रहना चाहिए।

कथा श्रवण-

प्रभु के प्यारे संतो का समागम करके उनके श्रीमुख से कथा श्रवण करना चाहिए, हो सके तो रोज कथा सुननी चाहिए, यदि नही सुन सकते समयाभाव मे, तो रामायण, भागवत की कथा का वाचन करना चाहिए। प्रेम पूर्वक उसका पाठ करना चाहिए।

स्मरण-

समस्त कर्मो का समर्पण- रात को सोने से पहले किये हुए कर्मों का विचार करना चाहिए, कि क्या प्रभु को पसन्द आएँ ऐसे कर्म मेरे हाथ से आज हुए है ।

यदि अन्दर से नकारात्मक उत्तर मिले, तो मान लेना कि वह दिन जीते हुए नहीं बल्कि मरते हुए निकल गया।

अतः क्षमा प्रार्थना करना चाहिए-

अपराध सहस्राणि क्रियन्ते अर्हनिशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।

यदि कोई पाप हो जाय तो प्रायश्चित करना चाहिए, और किए हुए सभी कर्म को परमात्मा को अर्पित करना चाहिए-

अनेन कर्मणा श्रीलक्ष्मी नारायण प्रीयतां न मम्।

।। जय भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण ।।



, Prayer ..

When you open your eyes in the morning, you should look at God and pray to Him –

Lakshmi resides at the tip of the hand, Saraswati at the root of the hand. Govinda in the middle of the hand, seeing the hand in the morning.

After waking up in the morning and having darshan, I should think in my mind that today I will do good deeds with these hands so that God will bless me to visit my house.

Hand is a symbol of action power – I should pray to God that just as you drove Arjun’s chariot, in the same way you become the charioteer of my life’s chariot.

Then one should meditate on the nine planets-

Brahma, Murari, the destroyer of the three worlds, the sun, the moon, the son of the earth, and Mercury. May all the planets Guru, Venus, Saturn, Rahu and Ketu bring peace.

Lord Brahma, Vishnu and Shiva, Sun, Moon, Bhoomi Sut i.e. Mars, Mercury, Jupiter, Venus, Saturn, Rahu and Ketu, all the planets should be the factors of peace.

Then one should take one’s hand near the nostrils and see, if the right note is being played then the right foot, if the left note is being played then the left foot should be placed on the ground, before placing the foot one should pray –

O goddess in the sea garment, in the mountain breast circle. O wife of Vishnu I offer my obeisances to you Forgive me for touching your feet

Parents and teachers should be saluted.

Before doing daily activities (toilet) one should say-

Let all the gods, yakshas, ​​gandharvas and kinneras rise up. I make devils and guhyakas feces and urine

After retiring, one should pray while brushing teeth-

O tongue that knows the essence of taste, always loving sweetness, Drink the nectar of Narayana on your tongue constantly.

Long life, strength, fame, splendour, people, cattle and wealth, O tree, grant us Brahma, wisdom and clouds.

service puja-

To invoke Ganga in water before bathing, one should read-

Ganga and Yamuna and Godavari and Saraswati. O Narmada, Sindhu and Cauvery, make your presence felt in this water.

Then one should take bath while reciting the following mantras-

He was very blue and dark brown with wide eyes I remember the lotus-eyed Lord and I am bathed in Him.

After taking bath and worshiping God in solitude, one should sprinkle water on oneself for mental purification by reciting the following mantras:

ॐ Whether unclean or clean, in all circumstances. He who remembers the lotus-eyed Lord is purified externally and internally.

Shikha Bandhan should be done while reciting the following mantras-

Chidrupini! Mahamaya! Divine effulgence:combined. Stay, Goddess! Increase my splendor in the middle of my crest.

Sandalwood should be applied-

The great merit of sandalwood is holy and destroys sins. Lakshmi always removes calamities and always remains there

Should praise God-

Shantakaram bhujagashayanam padmanabham suresham, The basis of the universe is like the sky, the color of clouds is auspicious. Lakshmikantam kamalanayanam yogirbhidhyanagamyam, I worship Vishnu, the one lord of all the worlds, who removes the fear of this world.

Shantakaaran – One whose figure is very calm, one who is calm and serious,

Bhujag-shayanam – who is sleeping (seated) on the bed of Sheshnag,

Padmanabham- who has a lotus in her navel,

Suresh- who is the God of Gods and

Vishvaadharam – Who is the basis of the entire world, of whom the entire world is created,

Gagan-sadharm- who are pervasive like the sky,

Cloudy – Whose complexion is like blue clouds,

Shubhangam- Very beautiful, who has perfect body parts, who is very pleasing and beautiful.

Lakshmikantam- the lover of such Lakshmi ( Lakshmipati )

Kamal-Nayanam- Kamalnetra (whose eyes are as beautiful as lotus)

Yogibhirdhyanagamyam- (yogibhir- dhyana- gamyam) – which are attained by the yogis by meditating, (which the yogis are always meditating to attain)

Vande Vishnum- I bow to Lord Vishnu (I salute such Parabrahma Sri Vishnu)

Bhavabhaya-haram – the one who destroys the fear of birth and death, the one who destroys all fears.

Sarvlokaik-Natham- The one who is the lord of all the worlds, the God of all living beings.

O Lord, when you saved a sinner like Ajamil, If so then why don’t you look at me?

After praising, one should sit alone and chant the name of the Lord –

Shri Krishna Govinda Hare Murare…. O Nath Narayana Vasudeva.

One should keep remembering God even while doing his work.

Story listening-

One should gather the beloved saints of God and listen to the story from their mouth. If possible, one should listen to the story every day, if not due to lack of time, then one should read the story of Ramayana and Bhagwat. It should be recited with love.

Remembrance-

Surrender of all the deeds – Before sleeping at night, one should think about the deeds done by my hands to see whether God likes such deeds done by me today.

If you get a negative answer from within, then consider that the day passed not in living but in dying.

Therefore one should pray for forgiveness.

I commit thousands of crimes every day. Consider me as a servant and forgive me, O Lord.

If any sin is committed, then atonement should be done, and all the deeds done should be offered to God.

May Sri Lakshmi Narayana be pleased with this action.

, Jai Lord Sri Lakshminarayan.

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One Response

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