महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र


(हिन्दी अर्थ सहित)

अयि गिरि-नन्दिनि नंदित-मेदिनि विश्व-विनोदिनि नंदनुते
गिरिवर विंध्य शिरोधि-निवासिनि विष्णु-विलासिनि जिष्णुनुते।
भगवति हे शितिकण्ठ-कुटुंबिनि भूरि कुटुंबिनि भूरि कृते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
हे गिरिपुत्री, पृथ्वी को आनंदित करने वाली, संसार का मन मुदित रखने वाली, नंदी द्वारा नमस्कृत,पर्वतप्रवर विंध्याचल के सबसे ऊंचे शिखर पर निवास करने वाली, विष्णु को आनंद देने वाली, इंद्रदेव द्वारा नमस्कृत, नीलकंठ महादेव की गृहिणी, विशाल कुटुंब वाली, विपुल मात्रा में निर्माण करने वाली देवी, तुम्हारी जय हो, जय हो। हे महिषासुर का घात करने वाली, सुन्दर जटाधरी गिरिजा तुम्हारी जय हो।

सुरवर-वर्षिणि दुर्धर-धर्षिणि दुर्मुख-मर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवन-पोषिणि शंकर-तोषिणि किल्बिष-मोषिणि घोषरते।
दनुज निरोषिणि दितिसुत रोषिणि दुर्मद शोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
हे सुरों पर वरदानों का वर्षंण करने वाली,
दुर्मुख और दुर्धर नामक दैत्यों का संहार करने वाली, सदा हर्षित रहने वाली, तीनों लोकों का पालन-पोषण करने वाली, शिवजी को प्रसन्न रखने वाली, कमियों को, दोषों को दूर करने वाली, हे (नाना प्रकार के आयुधों के) घोष से प्रसन्न होने वालीं, दनुजों के रोष को निरोष करने वाली- निःशेष करने वाली, तात्पर्य यह कि दनुजों को ही समाप्त करके उनके रोष (क्रोध) को समाप्त करने वाली, दितिपुत्र अर्थात् दैत्यों (माता दिति के पुत्र होने से वे दैत्य कहलाये) पर रोष (क्रोध) करने वाली, दुर्मद दैत्यों को, यानि मदोन्मत्त दैत्यों को, भयभीत करके उन्हें सुखाने वाली, हे सागर-पुत्री! हे महिषासुर का घात करने वाली, सुन्दर जटाधरी गिरिजा! तुम्हारी जय हो, जय हो।

अयि जगदंब मदंब कदंब वनप्रिय वासिनि हासरते
शिखरि शिरोमणि तुङ्ग हिमालय श्रृंग निजालय मध्यगते।
मधु मधुरे मधु कैटभ गंजिनि कैटभ भंजिनि रासरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैलसुते।

अर्थ-
हे जगन्माता, हे मेरी माता! अपने प्रिय कदम्ब-वृक्ष के वनों में वास व विचरण करने वाली हे हासरते! हासरते अर्थात उल्लासमयी, हास-उल्लास में रत। ऊंचे हिमाद्रि के मुकुटमणि सदृश सर्वोच्च शिखर के बीचोबीच जिसका गृह (निवासस्थान) है, ऐसी हे शिखर-मंदिर में रहने वाली देवी ! मधु के समान मधुर!मधु-कैटभ को पराभूत करने वाली, कैटभ का संहार करने वाली,
कोलाहल में रत रहने वाली, हे महिषासुरमर्दिनि, तुम्हारी जय हो, जय हो !

अयि शतखण्ड विखण्डित रुण्ड वितुण्डित शुण्ड गजाधिपते
रिपु गज गण्ड विदारण चण्ड पराक्रम शुण्ड मृगाधिपते।
निज भुज दण्ड निपातित खण्ड विपातित मुण्ड भटाधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
शत्रु सैन्य के उत्तम हाथियों की सूंड काट कर उनके खंड-खंड हुए धड़ों के सौ सौ टुकड़े कर डालने वाली, जिनका सिंह शत्रुओं के हाथियों के मुंह नोच कर चीर डालता है, अपनी भुजा में उठाये हुए दण्ड से शत्रुपक्ष के योद्धाओं के मुंड (सिर) काट फेंकने वाली, हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! तुम्हारी जय हो, जय हो !

अयि रण दुर्मद शत्रु वधोदित दुर्धर निर्जर शक्तिभृते
चतुर विचार धुरीण महाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते।
दुरित दुरीह दुराशय दुर्मति दानव दूत कृतांतमते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
हे युद्ध में उन्मत्त हो जाने वाली, शत्रुओं का वध करने के लिए आविर्भूत होने वाली, शक्ति को धारण करने वाली या शक्ति से सज्जित, बुद्धिमानों में अग्रणी भगवान शिव को, भूतनाथ को, दूत बना कर भेजने वाली तथा अधम वासना व कुत्सित उद्देश्य से दैत्यराज शुम्भ द्वारा भेजें गये दानव-दूतों का अंत करने वाली, हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा! तुम्हारी जय हो, जय हो !

अयि शरणागत वैरि वधूवर वीर वराभय दायकरे
त्रिभुवन मस्तक शूल विरोधि शिरोधि कृतामल शूलकरे।
दुमिदुमि तामर दुंदुभिनाद महो मुखरीकृत तिग्मकरे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
शरणापन्न शत्रुपत्नियों के योद्धा-पतियों को अभय प्रदान करने वाली, अपने त्रिशूल-विरोधी को, चाहे हे वह त्रिभुवन का स्वामी हो, अपने त्रिशूल से नतमस्तक करने वाली, दुन्दुभि से उठते दुमि-दुमि के ताल के लगातार बहते ध्वनि-प्रवाह से दिशाओं को महान रव से भरने वाली, हे महिषासुर का घात करने वाली, हे सुन्दर जटाधरी गिरिनन्दिनि तुम्हारी जय हो, जय हो।

अयि निज हुँकृति मात्र निराकृत धूम्र विलोचन धूम्र शते
समर विशोषित शोणित बीज समुद्भव शोणित बीज लते।
शिव शिव शुंभ निशुंभ महाहव तर्पित भूत पिशाचरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
अपनी केवल हुंकार मात्र से धूम्रविलोचन (एक दैत्य का नाम) को आकारहीन करके सौ सौ धुंए के कणों में बदल कर रख देने वाली, युद्ध में रक्तबीज (एक दैत्य का नाम) और उसके रक्त की बूँद-बूँद से पैदा होते हुए और बीजों की बेल सदृश दिखने वाले अन्य अनेक रक्तबीजों का संहार करने वाली, शुम्भ-निशुम्भ दैत्यों की शुभ आहुति देकर महाहवन करते हुए भूत-पिशाच आदि को तृप्त करने वाली देवी, हे महिषासुर का घात करने वाली, हे सुन्दर जटाधरी गिरिजा, तुम्हारी जय हो, जय हो !

धनुरनु संग रणक्षणसंग परिस्फुर दंग नटत्कटके
कनक पिशंग पृषत्क निषंग रसद्भट शृंग हतावटुके।
कृत चतुरंग बलक्षिति रंग घटब्दहुरंग रटब्दटुके
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

अर्थ-
रणभूमि में, युद्ध के क्षणों में, धनुष थामे हुए जिनके घूमते हुए हाथों की गति-दिशा के अनुरूप जिनके कंकण हाथ में नर्तन करने लगते हैं, ऐसी हे देवी! रण में गर्जना करते शत्रु योद्धाओं की देहों के साथ मिलाप होने से और उन हतबुद्धि (मूर्खों) को मार देने पर, जिनके स्वर्णिम बाण (दैत्यों के लहू से) लाल हो उठते हैं, ऐसी हे देवी तथा स्वयं को घेरे खड़ी, बहुरंगी शिरों वाली और गरजते हुए शत्रुओं की चतुरंगिणी सेना को नष्ट कर जिन्होंने विनाश-लीला मचा दी, ऐसी हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! तुम्हारी जय हो, जय हो !

जय जय जप्य जयेजय शब्द परस्तुति तत्पर विश्वनुते
झण झण झिञ्जिमि झिंगकृत नूपुर सिंजित मोहित भूतपते।
नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटित नाट्य सुगानरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
जय जय की हर्षध्वनि और जयघोष से देवी की स्तुति करने में तत्पर है रहने वाले अखिल विश्व द्वारा वन्दिता, झन-झन झनकते नूपुरों की ध्वनि से (रुनझुन से) भूतनाथ महेश्वर को मुग्ध कर देने वाली देवी, और जहाँ नट-नटी दोनों प्रमुख होते हैं, ऐसी नृत्यनाटिका में नटेश्वर (शिव) के अर्धभाग के रूप में नृत्य करने वाली एवं सुमधुर गान में रत, हे महिषासुर का घात करने वाली देवी, हे सुन्दर जटाधरी गिरिजा, तुम्हारी जय हो, जय हो !

अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहर कांतियुते
श्रितरजनी रजनी-रजनी रजनी-रजनी कर वक्त्रवृते।
सुनयन विभ्रमर भ्रमर भ्रमर-भ्रमर भ्रमराधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
सुन्दर मनोहर कांतिमय रूप के साथ साथ सुन्दर मन से संयुत और रात्रि के आश्रय अर्थात् चन्द्रमा जैसी उज्जवल मुख-मंडल की आभा से युक्त हे देवी, काले, मतवाले भंवरों के सदृश, अपितु उनसे भी अधिक गहरे काले और मतवाले-मनोरम तथा चंचल नेत्रों वाली, हे महिषासुर का घात करने वाली देवी, हे सुन्दर जटाधरी गिरिजा, तुम्हारी जय हो, जय हो।

सहित महाहव मल्लम तल्लिक मल्लित रल्लक मल्लरते
विरचित वल्लिक पल्लिक मल्लिक भिल्लिक भिल्लिक वर्ग वृते।
सितकृत पुल्लिसमुल्ल सितारुण तल्लज पल्लव सल्ललिते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।

अर्थ-
एक विशाल रूप से आयोजित महासत्र (महायज्ञ) की भांति ही रहे घोर युद्ध में, फूल-सी कोमल किन्तु रण-कुशल साहसी स्त्री-योद्धाओं सहित जो संग्राम में रत हैं और भील स्त्रियों ने झींगुरों के झुण्ड की भांति जिन्हें घेर रखा है, जो उत्साह और उल्लास से भरी हुई हैं और जिनके उल्लास की लालिमा से (प्रभातकालीन अरुणिमा की भांति) अतीव सुन्दर-सुकोमल कलियां पूरी तरह खिल खिल उठती हैं, ऐसी हे लावण्यमयी देवी, हे महिषासुर का घात करने वाली, हे सुन्दर जटाधरी गिरिजा, तुम्हारी जय हो, जय हो !

अविरल गण्ड गलन्मद मेदुर मत्त मतङ्गज राजपते
त्रिभुवन भूषण भूत कलानिधि रूप पयोनिधि राजसुते।
अयि सुद तीजन लालसमानस मोहन मन्मथ राजसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।

अर्थ-
कर्ण-प्रदेश या कनपटी से सतत झरते हुए गाढ़े मद की मादकता से मदोन्मत्त हुए हाथी-सी (उत्तेजित), हे गजेश्वरी, हे त्रिलोक की भूषण यानि शोभा, सभी भूत यानि प्राणियों, चाहे वे दिव्य हों या मानव या दानव, की कला का आशय, रूप-सौंदर्य का सागर, हे (पर्वत) राजपुत्री, हे सुन्दर दन्तपंक्ति वाली, सुंदरियों को पाने के लिए मन में लालसा और अभिलाषा उपजाने वाली तथा कामना जगाने वाली, मन को मथने वाले हे कामदेव की पुत्री (के समान), हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा! तुम्हारी जय हो, जय हो !

कमल दलामल कोमल कांति कलाकलितामल भाललते
सकल विलास कलानिलयक्रम केलि चलत्कल हंस कुले।
अलिकुल सङ्कुल कुवलय मण्डल मौलिमिलद्भकुलालि कुले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
कमल के फूल की निर्मल पंखुड़ी की सुकुमार, उज्जवल आभा से सुशोभित (कान्तिमती) है भाल-लता जिनकी, ऐसी हे देवी, जिनकी ललित चेष्टाओं में, पग-संचरण, में कला-विन्यास है, जो कला का आवास है, जिनकी चाल-ढाल में राजहंसों की सी सौम्य गरिमा है, जिनकी वेणी में, भ्रमरावली से आवृत कुमुदिनी के फूल और बकुल के भंवरों से घिरे फूल एक साथ गुम्फित हैं, ऐसी हे महिषासुर का घात करने वाली, सुन्दर जटाधरी, हे गिरिराज पुत्री, तुम्हारी जय हो, जय हो !

कर मुरली रव वीजित कूजित लज्जित कोकिल मंजुमते
मिलित पुलिन्द मनोहर गुंजित रंजितशैल निकुंज गते।
निजगुण भूत महाशबरीगण सदगुण संभृत केलितले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
जिनकी करगत मुरली से निकल कर बहते स्वर से कोकिल-कूजन लज्जित हो जाता है, ऐसी हे माधुर्यमयी तथा जो पर्वतीय जनों द्वारा मिल कर गाये जाने वाले, मिठास भरे, गीतों से गुंजित रंगीन पहाड़ी निकुंजों में विचरण करती हैं, वे और अपने सद्गुणसम्पन्न गणों व वन्य प्रदेश में रहने वाले, शबरी आदि जाति के लोगों के साथ जो पहाड़ी वनों में क्रीड़ा (आमोद-प्रमोद) करती हैं, ऐसी हे महिषासुर का घात करने वाली, सुंदर जटाधरी गिरिजा, तुम्हारी जय हो, जय हो !

कटितट पीत दुकूल विचित्र मयूखतिरस्कृत चंद्र रुचे
प्रणत सुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुल सन्नख चंद्र रुचे।
जित कनकाचल मौलिपदोर्जित निर्भर कुंजर कुंभकुचे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
जिन रेशमी वस्त्रों से फूटती किरणों के आगे चन्द्रमा की ज्योति कुछ भी नहीं है, ऐसे दुकूल (रेशमी परिधान) से जिनका कटि-प्रदेश आवृत है और जिनके पद-नख चन्द्र-से चमक रहे हैं उस प्रकाश से, जो देवताओं तथा असुरों के मुकुटमणियों से निकलता है, जब वे देवी-चरणों में नमन करने के लिए शीश झुकाते हैं साथ ही जैसे कोई गज (हाथी) सुमेरु पर्वत पर विजय पा कर उत्कट मद (घमंड) से अपना सिर ऊंचा उठाये हो, ऐसे देवी के कुम्भ-से (कलश-से) उन्नत उरोज प्रतीत होते हैं, ऐसी हे देवी, हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! तुम्हारी जय हो, जय हो!

विजित सहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
कृत सुरतारक संगरतारक संगरतारक सूनुसुते।
सुरथ समाधि समान समाधि समाधि समाधि सुजातरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
अपने सहस्र हाथो से देवी ने जिन सहस्र हाथों को अर्थात् सहसों दानवों को विजित किया उनके द्वारा और (देवताओं के) सहस्र हाथों द्वारा वन्दित, अपने पुत्र को सुरगणों का तारक (बचाने वाला) बनानेवाली, तारकासुर के साथ युद्ध में,(देवताओं के पक्ष में) युद्ध बचाने वाले पुत्र से पुत्रवती अथवा ऐसे पुत्र की माता एवं उच्चकुलोत्पन्न सुरथ और समाधि द्वारा समान रूप से की हुई तपस्या से प्रसन्न होने वाली देवी, हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! तुम्हारी जय हो, जय हो !

पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं स शिवे
अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत्।
तव पदमेव परंपदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
हे सुमंगला, तुम्हारे करुणा के धाम सदृश (के जैसे) चरण-कमल की पूजा जो प्रतिदिन करता है, हे कमलवासिनी, वह कमलानिवास (श्रीमंत) कैसे न बने? अर्थात कमलवासिनी की पूजा करने वाला स्वयं कमलानिवास अर्थात धनाढ्य बन जाता है। तुम्हारे पद ही (केवल) परमपद हैं, ऐसी धारणा के साथ उनका ध्यान करते हुए हे शिवे ! मैं परम पद कैसे न पाउँगा ? हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! तुम्हारी जय हो, जय हो !

कनकल सत्कल सिन्धु जलैरनु सिंचिनुते गुण रंगभुवम
भजति स किं न शचीकुच कुंभ तटी परिरंभ सुखानुभवम्।
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवं
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
स्वर्ण-से चमकते व नदी के बहते मीठे जल से जो तुम्हारे कला और रंग-भवन रुपी मंदिर मे छिड़काव करता है वह क्यों न शची (इन्द्राणी) के कुम्भ-से उन्नत वक्षस्थल से आलिंगित होने वाले (देवराज इंद्र) की सी सुखानुभूति पायेगा? हे वागीश्वरी, तुम्हारे चरण-कमलों की शरण ग्रहण करता हूँ, देवताओं द्वारा वन्दित हे महासरस्वती, तुममें मांगल्य का निवास है। ऐसी हे देवी, हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! तुम्हारी जय हो, जय हो !

तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूत पुरीन्दुमुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते।
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
तुम्हारा मुख-चन्द्र, जो निर्मल चंदमा का सदन है, सचमुच ही सभी मल-कल्मष को किनारे पर कर देता है अर्थात् दूर कर देता करता है। इन्द्रपुरी की चंद्रमुखी हो या सुन्दर आनन वाली रूपसी, वह (तुम्हारा मुख-चन्द्र) उससे (अवश्य) विमुख कर देता है। हे शिवनाम के धन से धनाढ्या देवी, मेरा तो मत यह है कि आपकी कृपा से क्या कुछ संपन्न नहीं हो सकता। हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! तुम्हारी जय हो, जय हो !

अयि मयि दीनदयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते।
यदुचितमत्र भवत्युररि कुरुतादुरुतापमपा कुरुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।

अर्थ-
दीनों पर सदैव दयालु रहने वाली हे उमा, अब मुझ पर भी कृपा कर ही दो, (मुझ पर भी तुम्हें कृपा करनी ही होगी)। हे जगत की जननी जैसे तुम कृपा से युक्त हो वैसे ही धनुष-बाण से भी युत हो, अर्थात् स्नेह व संहार दोनों करती हो। जो कुछ भी उचित हो यहाँ, वही आप कीजिए, हमारे ताप (और पाप) दूर कीजिए, अर्थात् नष्ट कीजिए। हे महिषासुर का घात करने वाली सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! तुम्हारी जय हो, जय हो। ।। इति श्री महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।



(With Hindi meaning)

Ayi Giri-Nandini Nandita-Medini Visva-Vinodini Nandanute The mountain Vindhya, the inhabitant of the head, is Vishnu-vilasini jishnunute. O Lord, O Shitikantha-Kutubini, for the sake of abundant family. Jaya Jaya O Mahishasura-mardini Ramya Kapardini Shailasute.

Meaning- O Giriputri, the Earth, who enjoys the Earth, the heart of the world, moist by the Nandi, the mountainstructure residing at the highest peak of Vindhyachal, enjoying Vishnu, nampered by Indradev, the housewife of Neelkanth Mahadev, the huge kutumba, a giant kutumba, a deity, a goddess, the goddess, you are happy. O Mahishasura, the beautiful Jatadhari Girija Hail to you.

Overcome with the rain of the gods, the evil-faced, the evil-faced, the joyful. The three worlds, the nourishment of Lord Shiva, are the source of all sins. Danuja Niroshini Ditisuta Rashini Durmada Shoshini Sindhusute Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramya Kapardini Shailasute.

Meaning- Hey, who yearn on the boons, The destroyer of the demons called Durmukh and Durdhar, who is always happy, who is happy, pleased Shiva, pleased Shiva, removing the deficiencies, who is pleased with the Ghosh (of Nana type of armaments), who is pleased with the Ghosh of the Danujas, that is careless, that is, that it is that the end of his anger (anger), that the anger ends, Ditiputra means that he was called a demon (he was called a demon by being the son of Mata Diti), anger, the Durmad demons, that is, the Madonamatta demons, fearfully and dry them, O ocean-daughter! Hey Mahishasura, a beautiful, beautiful Jatadhari Girija! Hail to you, hail.

O Jagdamba Madamba Kadamba Vanpriya Vasini Hasarate Shikhari Shiromani Tung Himalaya Sring Nijlaya middle. Madhu Madhure Madhu Kaitabh Ganjini Kaitabh Bhanjini Rasarate Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramya Kapardini Shailasute.

Meaning- Hey Jaganmata, O my mother! Oh Hasarte who resides and wander in the forests of your beloved Kadamb-tree! Hasarate means Ullasmayi, in Has-Ullas. In the midst of the highest peak-like supreme peak of the high Himadri, whose house is (residence), such a goddess living in the temple! Madhu like honey! O Mahishasuramardini, you are happy, hail, hail!

O Shatakhanda, broken, rund, distorted, shund, lord of the elephants. The enemy elephant, cheek, fierce, fierce, valour, beast, lord of the deer. His own arm staff dropped the piece of the sword, the lord of the Bhatadhipate. Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- The enemy cuts the trunk of the best elephants of the military and cut a hundred hundred pieces of the factions, whose lion rips the enemies’ elephants and rip the mund (head) of the warriors of the enemy with the punishment raised in his arm, O Mahishasura, who rebuked the beautiful Jatadhari Girija! Hail you, hail!

Ayi Rana Duramad Shatru Vadhod Durdhara Nirjar Shaktibhrute Four thoughts of the axle, O great Lord Shiva, O lord of the Pramatha. Durita duriha durasha durmas angel messenger kritantamate Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Hey, who is frantic in war, emerging to kill the enemies, wearing power or equipped with power, to Lord Shiva, a leading Lord Shiva, to Bhootnath, who sent the messenger, and sent a beautiful Jatadhari Girija, who is sent by demon and dannyaraj shumbh for the dedicated lust and surprise,, O Mahishasura Girija! Hail you, hail!

Ayi sharanagata vairi vadhuvara veer varabhaya dayakare The head of the three worlds is opposed to the head of the head. Dumidumi Tamar Dundubhinada Maho Mukharikriti Tigmakare Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- शरणापन्न शत्रुपत्नियों के योद्धा-पतियों को अभय प्रदान करने वाली, अपने त्रिशूल-विरोधी को, चाहे हे वह त्रिभुवन का स्वामी हो, अपने त्रिशूल से नतमस्तक करने वाली, दुन्दुभि से उठते दुमि-दुमि के ताल के लगातार बहते ध्वनि-प्रवाह से दिशाओं को महान रव से भरने वाली, हे महिषासुर का घात करने वाली, हे सुन्दर जटाधरी गिरिनन्दिनि तुम्हारी जय हो, जय हो।

O my own humming only rejected smoke smoky smoky smoky The seeds of the war brief blood are produced by the blood of the seeds. Shiva Shiva Shumbha Nishumbha Mahahava Tarpit Bhoota Pishacharate Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- With the mere mere humor, by shaping the smokelochan (the name of a monster), to keep it into a hundred hundred smoke particles, the bloodbies (name of a monster) in the war (a monster) and the drop of his blood and destroying the other blood-like-like and the bell of the seeds, the goddess, and the goddess, giving the auspicious goddess, offering auspicious souls, giving auspicious auspicious god Out of Mahishasura, O beautiful Jatadhari Girija, hail you, hail!

Dhanuranu Sang Ranakshanasang Parisphura Dang Natkakeke Kanak Pishanga Prishtka Nisang Rasabhat Horn Hatavatuke. krit chaturang balakshiti rang ghatabdahurang ratabdatuke Victory O daughter of the mountains O destroyer of buffaloes and demons

Meaning- In the battlefield, in the moments of war, holding the bow, whose sparklers start to dance in their hands, O Goddess! Thundering in the battle, the enemy warriors are mixed with the body and killing those homicidated (fools), whose golden arrows (from the blood of the demons), such as the goddess and the surrounded, the surrounded, multicolored and thundering enemies, who created the fleeting army, who created a destruction, such a beautiful juris , Hail you, hail!

Jai Jai Japya Jayejaya Shabd Parastuti Tatpara Visvanute Jhan jhan jhinjimi jhinkkritan nupur sinjita mohit bhutapate. Actor Actor Actor Nat Hero Actor Drama Suganarate Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Jai Jai is ready to praise the goddess with joy and Jayaghosha, with the sound of Vandita, the sound of Vandita, Jhan-Jhankate Nupur (from Runjhun), the goddess who enthrals Bhootnath Maheshwar, and where both Nat-Nati are prominent, Nateshwar (Shiva) in such a dance and dance in such a dancer. Goddess who ambuses, O beautiful Jatadhari Girija, Hail to you, hail!

O Sumana Sumana Suman Suman Sumanohar Kantiyute Srirajni rajani rajani rajani kara vaktravrite. Sunayan whirling beaver beetles-beets beetles lord Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Along with the beautiful beautiful spinning form, the beautiful mind with a beautiful mind and the shelter of the night, ie the moon-like bright mouth, like a bright mouth-mandal aura, like a goddess, black, drunken vortex, but also more dark black and mathematical-monoram and fickle eyes, Goddess, O Mahishasura, O Beautiful Jatadhari Girija, be your joy.

with Mahahav Mallam Tallik Mallit Rallak Mallarte The Vallik Pallic Mallic Bhillik Bhillika class is covered. Sitakrit pullisamulla Sitaruna talaj pallav sallalite Jai Jai O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Like a hugely organized Mahayagya (Mahayagya), in a severe war, flower-like gentle but battle-skilled women who are engaged in the war, and the Bhil women have surrounded like a herd of shrimp, which are filled with enthusiasm and gaiety and whose redness of gaiety (Prabhat period is like this). Lavanyamayi Devi, O Mahishasura, who ambuses, O beautiful Jatadhari Girija, Hail to you, hail!

Aviral Gand Galmad Medu Mat Matta Matangaj Rajapate Tribhuvan Bhushan Bhoot Kalanidhi Roop Payonidhi Rajasute. Ayi Sud Tijan Lalsamanas Mohan Manmatha Rajsute Jai Jai O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Elephant-Si (agitated), O Gajeshwari, O Trilok’s Bhushan i.e. Shobhan i.e. Shobhan, all ghosts, whether they are divine or human or demon, the ocean of the art, O (mountain), hesitant, O Gajeshwari, O Gajeshwari, O Gajeshwari, O Gajeshwari, O Gajeshwari, O Gajeshwari, O Gajeshwari. The beautiful Jatadhari Girija, the daughter of the producing and awakening, the daughter of Cupid, O Cupid, O Mahishasura! Hail you, hail!

Kamal Dalamal Komal Kanti Kalakalitamal Bhallate Sakal Vilas Kalanilayakrama Keli Chalatkal Hans Kule. Alikul Sankul Kuvalaya Mandal Maulimilmilabhakulali Kule Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- The lotus flower’s pure petals are sukumar, a bright aura is beautified (Kantimati), Bhal-Lala, who, hey goddess, in the fine efforts, in the fine consciousness, there is art, which is the habitat of art, which has a gentle dignity of Rajhans, whose gentle is a gentle dignity, in which the flowers of Kumudini flowers and bakhuli in the viney The flowers surrounded by whirlpools are uncomfortable together, like this, the ambush of Mahishasura, beautiful Jatadhari, O Giriraj daughter, you hail, hail!

Kar Murli Rav Vijit Koojit Kokil Manjumate Meet Pulind Manohar Gunjit Ranjit Shail Nikunj went. Nijguna Bhoota Mahashabarigan Gunguna Sambhrte Kelitale Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Whose kargat is shameful with a flowing tone from the vowel, such as the melody and the mountainous people who sung together, sweet, filled with songs, they wander in colorful mountains, they and their virtuous ganas and their virtuous ganas and wildlife, etc., are the people of the caste, who are in such a mountainous people, who are such Mahishasura’s ambush, beautiful Jatadhari Girija, Hail to you, hail!

Katitat yellow dukula strange mayukhatiraskrita moon ruche Pranata Surasura Maulimanisphura Danshu Sannakha Chandra Ruche. Jit Kanakachal Maulipadarjit dependent Kunjar Kumbhakuche Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- The silver clothing with which the light of the moon is nothing in front of the rays, whose kati is covered with a dilea (silk dress) and whose positions are shining with the moon, which comes out of the lights of gods and asuras, when they bow to the gods and offerings, as well as the same as a gaja (elephant) to bow down to the goddess. (Pride) raise your head elevated, such a goddess’s Aquarius (urn) seems to be advanced uros, O Goddess, O Goddess, O Mahishasura, a beautiful jatadhari girija! Hail you, hail!

Vijit Sahasrakaraika Sahasrakaraika Sahasrakaraikanute Krit Surataraka Sangarataraka Sangarataraka Sunusute. Suratha Samadhi Samadhi Samadhi Samadhi Sujatrate Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- With her thousands of hands, the Goddess who won the Sahasra hands, ie the Sahasra hands ie the cohops, and (of the gods) (of the gods), vanded by the thousand hands, made her son a star who makes her son (saving), in the war with Tarakasura, (in favor of the gods) from the son of a son or a son of a son and a somain, a son who is happy with the same as a son of a son or a son of such a son and a samadhi, is pleased with the same as a pen Beautiful Jatadhari Girija, who ambuses Mahishasura! Hail you, hail!

The lotus of the lotus in the abode of compassion is the one who is the day of Shiva every day O lotus, in the abode of the lotus, how can he not be the abode of the lotus? What is not mine, O Shiva, who is studying that Your step is the supreme step. Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Hey Sumangala, how does you not become Kamalavasini (Srimanta), O Kamalwasini, who worships Charan-Kamal (like) of your compassion, (like)? That is, the person who worships Kamalwasini becomes Kamalanivas, that is, wealth. Your position (only) is the supreme, meditating on them with such perception, O Shiva! How would I not get the ultimate position? O beautiful Jatadhari Girija, who ambuses Mahishasura! Hail you, hail!

Kankal Satkal Sindhu Jalairnu Sinchinute Guna Rangbhuvam Does he worship not Sachikucha Kumbha bank embracing the experience of happiness? I take refuge in Your feet, O Shiva, I bow down to you. Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Why will it not get the pleasure of (Devraj Indra), who is not shaken by the glowing and flowing of the river in your art and color of the river in the temple of your art and color in the temple of Rang (Indrani)? O Vagishwari, I take shelter of your feet, Mahasaraswati, Vandit by the gods, is the abode of Mangalya in you. This is like a beautiful Jatadhari Girija, O Goddess, O Mahishasura! Hail you, hail!

Your pure moon is the moon of the moon, and the whole is surely cultivated What is the Puruhut Purindumukhi, the beautiful faces of the beautiful faces. My opinion is that you are in the name of Shiva, what kind of grace you are doing Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Your mouth-moon, which is the House of Nirmal Chandma, really makes all the feces on the shore, that is, it removes it. Be it Chandramukhi of Indrapuri or beautiful ridicule, he (your face) alleviates from him (of course). O Dhanadhya Devi with the wealth of Shivaam, my opinion is that nothing can be done by your grace. O beautiful Jatadhari Girija, who ambuses Mahishasura! Hail you, hail!

Oh, you should be kind to me, the poor and compassionate, and you must be merciful to me. O mother of the world, you are compassionately as you are inferred. Whatever you suit here, you do it, your enemies, you will do it. Jaya Jaya O Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute.

Meaning- Oma, who is always kind on the days, now please be kind to me, (you will have to be kind to me too). O mother of the world, as you are with grace, you are also from the bow and arrow, that is, both affection and destruction. Whatever is appropriate here, you do the same, remove our heat (and sin), that is, destroy it. O beautiful Jatadhari Girija, who ambuses Mahishasura! Hail to you, hail. , Iti Sri Mahishasura Mardini Stotram Sampurnam.

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