राधे को उपहार

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   “अब मै अपनी आँखें खोलूं …कान्हा जी???…मै यहाँ पेड़ के पीछे और देर खड़ी नहीं रह सकती…” श्रीराधे बरगद के पेड़ के पीछे से चिल्लायीं….

     “बस कुछ पल और राधे!!!…. प्रतीक्षा का आनंद लो!!!” कृष्ण जल्दी जल्दी अपना काम निपटाते हुए बोले….

        कुछ ही देर में कृष्ण ने राधे की आँखों से अपना पीताम्बर हटाया… …और उन्हें अपना उपहार दिखाने कदम के वृक्ष के नीचे ले आये….

     राधे ने फूलों से सज़ा हुआ एक विशाल झूला देखा….जिसे श्री कृष्ण ने अपने हाथो से बनाया था…

    राधे एक नन्ही बच्ची की तरह मुसुकुराते हुए झटपट उस झूले पर जा बैठीं… “चलो कान्हा जी….अब मुझे ज़रा… धक्का भी लगा दो!!!”

     कृष्ण जी झूले को धक्का लगाने लगे …उन्होंने झूले को इस प्रकार यमुना जी के ऊपर बाँधा था…. की हर बार आगे-पीछे होते वक़्त राधे के कोमल चरण यमुना की लहरों को स्पर्श करते थे…

     श्री राधे ने झूले में सजे हुए…कुछ श्वेत फूलों को देखा….और ख़ुशी में भरकर कान्हा जी से पूंछा… “ये फूल तो हमारे ब्रज के नहीं हैं…कान्हा जी… इन्हें आप कहाँ से लाये???”

   “त्रेतायुग से….” कृष्ण जी ने उत्तर दिया…

    “क्या?… त्रेता युग से!!!…” श्रीराधे ने आश्चर्य में भरकर पूंछा….

  कृष्णा जी ने झूला रोका… और राधे के बगल बैठ गए…

  कृष्ण जी आँखों में प्रेम के अश्रु भरकर राधे को समझाने लगे “हाँ राधे…. त्रेता युग में जब मैंने पहली बार..तुम्हे पुष्प वाटिका में देखा था…. तो उसी पल मुझे अपने हाथो से सजाकर एक झूला तुम्हे उपहार में देने की इच्छा हुई….लेकिन रामावतार में ‘मर्यादा-पुरषोत्तम’ होने के कारण मै वो इच्छा पूरी ना कर सका…. और उसी समय से मैंने ये श्वेत पुष्प अपने पास आज के दिन के लिए संभाल के रखे थे….”

         श्रीराधे ने प्रेमघ में भरकर….कान्हा जी के दोनों कर-कमल चूम लिए….और फिर दोनों मिलकर झूला झूलने का आनद लेने लगे….



“Now should I open my eyes… Kanha ji???… I can’t stand here behind the tree any longer…” Shree Radhe shouted from behind the banyan tree….

“Just a few more moments Radhe!!!… Enjoy the wait!!!” Krishna said while quickly completing his work….

In no time, Krishna removed his pitambar from Radhe’s eyes… and brought him under the Kadam tree to show his gift.

Radhe saw a huge swing decorated with flowers….which was made by Shri Krishna with his own hands…

Smiling like a little girl, Radhe hurriedly sat on that swing… “Come on Kanha ji… now give me a little push…”

Krishna ji started pushing the swing … He had tied the swing on the Yamuna ji in such a way that every time while moving back and forth, Radhe’s soft feet touched the waves of Yamuna.

Shri Radhe, decorated in a swing, saw some white flowers. bring it from???”

“From Tretayuga…” Krishna replied…

“What?… from Treta Yuga!!!…” ShriRadhe asked in surprise.

Krishna ji stopped the swing… and sat next to Radhe…

Krishna ji began to explain to Radhe with tears of love in his eyes. I had a desire to give it… but due to being ‘Maryada-Purushottam’ in Ramavatar, I could not fulfill that wish… and from that time I had kept these white flowers with me for today’s day. ….”

Shri Radhe filled it in Premagh…..Kissed both the lotus and the lotus of Kanha ji….and then both of them started enjoying swinging together….

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