मेरी झोपड़ी के भाग आज जाग जायेंगे …..राम आयेंगे

मेरी झोपड़ी के भाग आज जाग जायेंगे …..राम आयेंगे …।सुबह से यही भजन सुन रहा। एक दो चार आठ बार।हर बार वही मधुरता। राम आयेंगे…राम आयेंगे। एक एक पंक्ति को सुनते हुए एहसास होता है राम का आना क्या है? यह विश्वास है। यह उम्मीद है। यह आशा है। राम आयेंगे एक सत्य है। राम आयेंगे एक चेतावनी है। राम आयेंगे एक प्रारब्ध है।

संतान के सुख से वंचित मां कौशल्या कितने दिन ये सोच सोच कर विचलित हुई होंगी कि राम आयेंगे। राम आयेंगे तो भरेगी मेरी सुनी कोख। नारी को ईश्वर को जन्म देने का सौभाग्य मिलेगा। वह जननी बनेगी। राजा दशरथ श्रवण के माता पिता का श्राप सुनकर घबराने से ज्यादा अभिभूत हुए होंगे कि हां पुत्र वियोग होगा। यानी पुत्र होगा। यानी राम आयेंगे। ऋषि ब्राह्मण ऐसा ही करते हैं, उनके दंड, उनके श्राप भी ईश्वर कृपा के साक्षी बनते हैं।

यज्ञ करते ऋषि मुनियों को भी प्रतीक्षा रही होगी कभी इन यज्ञों का फल मिलेगा। कभी राम आयेंगे। यज्ञ में अस्थि डालने वाले दैत्य भी सोचते होंगे कभी मुक्ति मिलेगी हमें, कभी राम आयेंगे। इस दृष्टि से देखता हूं तो दोनो के कर्म एक दूसरे के पूरक लगते हैं। दोनो के संयुक्त प्रयास से विधाता आते हैं। राम आए तो ऋषियों को यज्ञ का फल मिला। परमात्मा का दर्शन। लेकिन राम आए राक्षसों को दंड देने, उन्हें मुक्ति देने।

पाषाण बनी अहिल्या को भी उम्मीद थी राम आयेंगे। अरे गौतम के आशीर्वाद से बड़ा निकला उनका श्राप। राम आए। अहिल्या को दर्शन देने। क्या पता गौतम श्राप न देते तो राम आते ही न। केवट को पता था राम आयेंगे। उसके नाव की सवारी करने। गंगा को पता था आयेंगे। सबको पवित्र करने का सामर्थ्य बिना परम पवित्र राम से मिले कहां आता। सुतीक्ष्ण, अगस्त्य सबको ज्ञात था। मेरी कुटिया के भाग्य कभी खुलेंगे।

गुरुदेव के कहने पर गलियां बुहारती मां शबरी रटती रहीं राम आयेंगे। फूलों को चुनती। उन्हें बिछाती। एक आश। एक विश्वास। राम आयेंगे। उन्हें बेर खिलाऊंगी। कांटे वाले बेर को ही यह सुख मिलना था। प्रभु ने भोग लगाया तो भोलेनाथ ने सर पर धारण कर लिया। जलाभिषेक में बेर चढ़ने लगा।

सुग्रीव ने जैसे कष्ट सहे। उन्हें भी आशा थी। अब आयेंगे परमात्मा। उद्धार करने। बालि का जैसे अभिमान बढ़ा। उसे भी पता लग ही गया होगा। चल पड़े हैं मद चूर करने वाले। समुद्र को जितना दंभ था। उसे भी पता था राम उसे बांधने आ रहे हैं। असंभव को संभव तो परमात्मा ही करते हैं।

पक्षीराज जटायु इसीलिए तो लड़ गए। दे दिया प्राण। राम आयेंगे। गोद मिलेगी। जो सुख दशरथ को न मिला वह जटायु को मिल गया। जटायु की प्रतीक्षा बड़ी रही होगी। दसरथ ने जगदम्बा को जाने को कहा था। जटायु ने जगदम्बा को रोकने की कोशिश की।

अत्याचारी रावण को भी लगता रहा होगा कि राम आयेंगे। मुझे मुक्ति देंगे। अशोक वाटिका में बैठी मां जानकी को हमेशा पता था कि प्रभु आयेंगे और हर क्षण वहां पहरेदारी कर रही राक्षसियो को भी ज्ञात था की राम आयेंगे।

लात पड़ते ही विभीषण को पता लग गया। राम आयेंगे।
नंदीग्राम में बैठे महात्मा भरत जी को पता था करूणानिधान 14 साल बाद आयेंगे। अवध के हर नर नारी पशु पक्षी को पता था प्रभु आयेंगे।

प्रभु प्रतीक्षा का फल हैं। हर प्रतीक्षा के परिणाम के रूप में प्रभु आते हैं। अयोध्या में जले हर दीप की प्रतिक्षा पूर्ण हुई तो प्रभु आए। हर गीत, हर संगीत, हर लय, हर धुन है कि राम आयेंगे।

राम दुख को सहते हुए की गई प्रतीक्षाओ का फल हैं। सहने वालों, झेल रहे लोगों!

एक दिन तुम्हारे संघर्ष बड़े खूबसूरत ढंग से तुमसे टकरायेंगे …… राम आयेंगे।

पाप करने वाले खुद सबक सीख जायेंगे…..राम आयेंगे।

भारत में जल रहे हर दीप की प्रतीक्षा पूर्ण होगी…राम आयेंगे।

शुभ दीपोत्सव

जय श्री राम

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