
श्रीकृष्ण कोमल चरण
एक बार श्रीकृष्ण के गुरु दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे। रास्ते में किसी जंगल में

एक बार श्रीकृष्ण के गुरु दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे। रास्ते में किसी जंगल में

।।श्रीहरिः।। एक दिन ताज बीबी गोविंददेव मंदिर आयी और चौखट पर प्रणाम कर कुछ प्रणय कोप से श्री गोविंददेव जी

शबरी बोली, यदि रावण का अंत नहीं करना होता तो हे राम! तुम यहाँ कहाँ से आते ? राम गंभीर

हूँ तो चेरी राधे कौ, नाम रटूँ राधे कौ,सुमिरन नित राधे कौ राधे कौ ध्यान जू ।भजन करूं राधे कौ,

‘हे भारत ! तू सर्वभाव से उस परमात्मा की शरण जा, उसकी कृपा से तू परम शान्ति को, अविनाशी स्थान

बांके बिहारी के दर्शन करें तो आंखें बंद करने के बजाय उनसे नजरें मिलाएं, तब सफल होंगे दर्शन, जानिए क्यों?मथुरा

दार्शनिक सुकरात दिखने में कुरुप थे। वह एक दिन अकेले बैठे हुए आईना हाथ मे लिए अपना चेहरा देख रहे

मेरी और ठौर गति नाहीं तुम्हरोई दास कहाऊँ ॥सदा-सदा में शरण तुम्हरी तुम्हरो जस नित गाऊँ।तुम्हरे मृदुल चरण कमलन में

*ज्ञान हमेशा झुककर ही हासिल कियाजा सकता है खुद को ज्ञानी समझने से नहीं।। एक शिष्य गुरू के पास आया।

सूरा सो पहचानिये, जो लड़े दीन के हेत । पूर्जा पूर्जा कट मरे, कबहू न छोड़े खेत ।। हमारा देश