
ईस्वर अंस जीव अबिनासी
।। । भगवान् ने गीतामें कहा है‒ ‘ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः’ (गीता १५ / ७) । ‘इस संसार में जीव
।। । भगवान् ने गीतामें कहा है‒ ‘ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः’ (गीता १५ / ७) । ‘इस संसार में जीव
जब महात्मा गोकर्ण जी ने महाप्रेत धुंधुकारी के उद्धार के लिए श्रीमद् भागवत की कथा सुनायी थी, तब धुंधुकारी के
।। श्रीहरि: ।। सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलंसपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम्।सहारवक्षस्स्थलशोभिकौस्तुभंनमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम्।। अनंत, वासुकी, शेषं, पद्मनाभं च कम्वलं।शंखपालं, धृतराष्ट्रकंच, तक्षकं, कालियं तथा।। एतानि
*आत्म विकास प्राप्त करने के लिए हमें कौन से कदम उठाने होंगे? सीधा सरल जवाब है कि अच्छे काम करने
ब्रह्माजी द्वारा भगवान नारायण की स्तुति किये जाने पर प्रभु ने उन्हें सम्पूर्ण भागवत-तत्त्व का उपदेश केवल चार श्लोकों मे
सच्चिदानंदरूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे ।तापत्रयविनाशाय श्री कृष्णाय वयं नुमः ।। (माहात्म्य अ- 1 श्लोक -1) जो जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश