ठाकुर जी मीरा के हुए When Thakur Ji Became Meera’s
प्रेम की विजय प्रातःकाल की बेला थी। सूर्य की पहली किरणें अभी धरती को छूने ही वाली थीं कि मीरा,
प्रेम की विजय प्रातःकाल की बेला थी। सूर्य की पहली किरणें अभी धरती को छूने ही वाली थीं कि मीरा,

मरुदेवी माता की उचाई 500 धनुष्य की थी। उनके पिता और माता का नाम श्रीकांत और मरूदेव था। मरुदेवी माता

एक पुरानी कहानीं घणी गई थोड़ी रही, या में पल पल जाय।एक पलक के कारणे, युं ना कलंक लगाय।एक राजा

श्रीआनंदी बाई जीश्रीआनंदी बाई जी का मंदिर अठखम्भा पुराने शहर में श्री राधावल्लभ जी के घेरा पुराने मंदिर की दायी
जब प्रेम सच्चा हो, तो भगवान स्वयं वस्त्र पहनने आते हैं। त्रिपुरदास जी ब्रजभूमि के शेरगढ़ में एक राजा के

जीवन में कभी कभी आप गोपाल जी की कृपा से उनके अदभूत भक्तों से मिल जाते है ! ऐसा ही

बरसाना में गोविन्द दास नाम का एक भक्त रहता था।उसकी एक पुत्री थी, जिसका नाम था मुनिया।*गोविन्द दास के परिवार

कुबेर का घर एक साधु, विचित्र स्वभाव का था। वह बोलता कम था। उसके बोलने का ढंग भी अजीब था।

जय श्री कृष्ण एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक गरीब विधवा महिला रहती थी। उसका
भक्ति कथा गुरु रविदास की महिमा सुनकर और पवित्र जीवन को देखकर बहुत से राजा-रानी उनके शिष्य बन गए थे।