
सत्यवादितासे उन्नति
पोप पाइस नवमको एक दिन विचित्र पत्र मिला जिसमें स्याहीके अनेक धब्बे थे। बहुत-सी भूलें थीं। कागज अत्यन्त मैला था।

पोप पाइस नवमको एक दिन विचित्र पत्र मिला जिसमें स्याहीके अनेक धब्बे थे। बहुत-सी भूलें थीं। कागज अत्यन्त मैला था।

पहले समयकी बात है। किसी देशके एक छोटे से गाँव में एक व्यक्ति रहता था। उसके पास एक गधा था।

पिता वेदव्यासजीकी आज्ञासे श्रीशुकदेवजी आत्मज्ञान प्राप्त करनेके लिये विदेहराज जनककी मिथिला नगरीमें पहुँचे। वहाँ खूब सजे-सजाये हाथी, घोड़े, रथ और

‘भगवती स्वर्णलेखा और गोदावरी सरिताके मध्यदेश – कलिङ्गकी प्रजाने विद्रोह कर दिया है, महाराज! यदि यह विद्रोह पूर्णरूपसे दबा नहीं

मिथिला नरेश महाराज जनक अपने राजभवनमें शयन कर रहे थे। निद्रामें उन्होंने एक अद्भुत स्वप्न देखा मिथिलापर किसी शत्रु नरेशने

एक बार भक्त श्रीरूपगोस्वामीजी ध्यानमें यह झाँकी कर रहे थे कि श्रीराधाजी तथा भगवान् श्रीकृष्ण खड़े हैं और आपसमें एक

महानताके लिये पद जरूरी नहीं रूसी क्रान्तिके जनक लेनिन उन दिनों पेरिसमें रूसी क्रान्तिके लिये प्रयासरत थे। दो दिनोंतक भूखे

मनुष्य जीवनमें संयमकी बड़ी आवश्यकता है। गृहस्थ, तपस्वी और संन्यासी-सब-के-सब इन्द्रिय संयम और सात्त्विक आचार-विचारसे समुन्नति करते हैं। जीवन क्षणभरके

जो तू चाहे सुख सदा एक बार हकीम लुकमानसे उनके बेटेने पूछा ‘अगर मालिकने फरमाया कि कोई चीज माँग, तो

राजपूतोंमें विजयादशमीके दिन आखेट करनेकी प्रथा चली आ रही है। मेवाड़के राणा प्रताप तथा उनके छोटे भाई शक्तसिंह सैनिकोंके साथ