
कैयटकी निःस्पृहता
महाभाष्यतिलकके कर्ता संस्कृतके प्रकाण्ड विद्वान् कैयटजी नगरसे दूर एक झोंपड़ीमें निवास करते थे। उनके घरमें सम्पत्तिके नामपर एक चटाई और

महाभाष्यतिलकके कर्ता संस्कृतके प्रकाण्ड विद्वान् कैयटजी नगरसे दूर एक झोंपड़ीमें निवास करते थे। उनके घरमें सम्पत्तिके नामपर एक चटाई और

भगवान् गौतम बुद्ध श्रावस्ती में बिहार कर रहे थे। एक दिन विशेष उत्सव था। धर्मकथा श्रवणके लिये विशाल जन समूह

गुलामकी परीक्षा एक बादशाहने दो गुलाम खरीदे। उनमें से एक गुलाम दीखनेमें अच्छा था और दूसरा बदसूरत था। बादशाहने पहले

मालवेश्वर भोजको राजसिंहासनपर बैठे कुछ ही दिन हुए थे। एक दिन प्रातः काल वे अपने रथपर समासीन होकर राजकीय उद्यानकी

महाराज जनकके राज्यमें एक ब्राह्मण रहता था। उससे एक बार कोई भारी अपराध बन गया। महाराज जनकने उसको अपराधके फलस्वरूप

एक बार कैलासाश्रम ऋषिकेशसे ब्रह्मलीन महात्मा स्वामीजी श्रीप्रकाशानन्दपुरीजी होशियारपुर से हरद्वार पधार रहे थे। रेलके अम्बाला छावनी स्टेशनपर खड़ी होते

ग्वारिया बाबा वृन्दावनके एक प्रसिद्ध परम भक्त थे। वे पागलकी तरह रहते थे। एक दिन वे अपनी मस्तीमें कहीं पड़े

रामतारण चक्रवर्ती नामके एक सज्जन कलकत्ते में किसी व्यापारी फर्ममें काम करते थे। उनके घरमें स्त्री और दस-बारह वर्षकी एक

श्रीगोपालकृष्ण गोखले जब बालक थे और पाठशाला में पढ़ते थे, उस समय एक दिन उनके अध्यापकने कुछ अङ्कगणितके प्रश्न विद्यार्थियोंको

गरीबोंकी सेवा एक बार महात्मा गौतम बुद्धने उपदेश देते हुए कहा-‘देशमें अकाल पड़ा है। लोग अन्न एवं वस्त्रके लिये तरस