गीता पर शपथ क्यों दिलाई जाती है

गीता का इतना महत्व क्यों है , कभी सोचा है ? आखिर इस पुस्तक पर हाथ रखकर शपथ क्यों दिलाई जाती है ?

इसके अनेक कारण हैं ! सबसे बड़ा कारण यह है ,कि गीता कोई साधारण ग्रंथ नहीं है !

सृष्टि व्यवस्था में नारायण को पालनकर्ता माना गया है ! पालनकर्ता अर्थात विधि-व्यवस्था को जो समुचित देखता रहे ! उसे गतिमान रखें ,तो जहां विधि-व्यवस्था बनाए रखने की बात होगी वहीं कानून व्यवस्था आएगी !

श्रीमद्भगवद्गीता के हर अध्याय नारायण के अंग हैं ! अगर यह कहा जाए कि गीता को स्पर्श करके हम एक प्रकार से नारायण की सौगंध ले रहे होते हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी !

कथा कुछ इस प्रकार से है :-

भगवान श्री हरि मूर दैत्य का नाश करने के बाद बैकुंठ लोक में शेष शय्या पर आंखें मूंदे लेटे मन ही मन मुस्कुरा रहे थे !

देवी लक्ष्मी उनकी चरण सेवा कर रही थीं ! भगवान को मन में ही मुस्काता देख देवी को कौतूहल हुआ !

देवी लक्ष्मी ने उनसे प्रश्न किया :-
भगवन आप संपूर्ण जगत का पालन करते हुए भी अपने ऐश्वर्य के प्रति उदासीन से होकर इस क्षीर सागर में नींद ले रहे हैं ! इसका क्या कारण है ?

श्री हरि पुनः मुस्कुराए और अपनी मोहक मुस्कान बिखेरते हुए बोले :-

हे प्रिये मैं नींद नहीं ले रहा बल्कि अपनी अंतर्दृष्टि से अपने उस तेज का साक्षात्कार कर रहा हूं , देवी जिसका योगी अपनी दृष्टि से दर्शन कर लेते हैं !

जिस शक्ति के अधीन यह समस्त संसार है ! मैं जब भी उसका मन में दर्शन करता हूं ! तब आपको ऐसा प्रतीत होता है कि मैं नींद में डूबा हूं परंतु ऐसा है ,नहीं !

भगवान ने इतनी रहस्यमय तरीके से बात कही कि लक्ष्मी जी को कुछ बातें समझ में आईं कुछ नहीं आईं !

उन्होंने पुनः प्रश्न किया :-

हे नाथ आपके अतिरिक्त भी कोई शक्ति है ,जिसका ध्यान स्वयं आप करते हों ! यह बात तो मुझे घोर विस्मय में डालती है

श्री हरि ने कहा :-

देवी इस बात को अच्छी प्रकार से समझने के लिए आपको गीता के रहस्य समझने होंगे ! आप सेवा करती हैं !

गीता के आरंभ के पांच अध्यायों को मेरे पांच मुख जानें !

छठे से पंद्रहवें अध्याय को मेरी दस भुजाएं समझिए !

सोलहवां अध्याय तो मेरा उदर है जहां क्षुधा शांत होती है !

अंतिम के दो अध्यायों को मेरे चरण कमल समझिए !

भगवान ने गीता के अध्यायों की इस प्रकार व्याख्या कर दी ! लक्ष्मी जी की उलझन घटने की बजाय और बढ़ने लगी ! भगवान ने भांप लिया कि देवी के मन में क्या चल रहा है ?

श्री हरि ने पुनः कहा :-

देवी जो व्यक्ति गीता के एक भी अध्याय अथवा एक श्लोक का भी प्रतिदिन पाठ करता है ! वह सुशर्मा की तरह सभी पापों से मुक्त हो जाता है !

अब तो देवी लक्ष्मी और उलझ गईं ! उन्होंने संयत भाव में अपनी अधीरता व्यक्त करते हुए :-

हे नाथ यह आपकी क्या लीला है एक के बाद एक आप पहेलियां ही कहते जा रहे हैं ! कृपया आप मेरी जिज्ञासा शांत करें !

भगवान पुनः मुस्कुराने लगे और उन्होंने लक्ष्मीदेवी को सुशर्मा की कथा सुनानी शुरू की !

सुशर्मा एक घोर पापी व्यक्ति था वह हमेशा भोग-विलास में डूबा रहता ! मदिरा और मांसाहार इसी में जीवन बिताता ! एक दिन सांप काटने से उसकी मृत्यु हो गई !

उसे नरक में यातनाएं झेलीं और फिर से पृथ्वी पर एक बैल के रूप में जन्म लिया !

अपने मालिक की सेवा करते बैल को आठ साल गुजर गए ! उसे भोजन कम मिलता लेकिन परिश्रम जरूरत से ज्यादा करनी पड़ती !

एक दिन बैल मूर्च्छित हो कर बाजार में गिर पड़ा ! बहुत से लोग जमा हो गए ! वहां उपस्थित लोगों में से कुछ ने बैल का अगला जीवन सुधारने के लिए अपने-अपने हिस्से का कुछ पुण्यदान करना शुरू किया !

उस भीड़ में एक वेश्या भी खड़ी थी ! उसे अपने पुण्य का पता नहीं था ! फिर भी उसने कहा उसके जीवन में जो भी पुण्य रहा हो उसका अंश बैल को मिल जाए !

बैल मर कर यमलोक पहुंचा ! हिसाब-किताब हुआ और वेश्या के दिए पुण्यदान के कारण वह नर्कलोक से मुक्त हो गया ! उसे मानव रूप में जन्म मिला !

उसने ईश्वर से कहा कि :-

मानवरूप में पृथ्वी पर भेजने से पहले उसे वह क्षमता दें कि उसे पूर्वजन्म की बातें याद रहेंगी ! ईश्वर ने वह योग्यता दे दी !

पृथ्वी पर आकर उसे उस वैश्या को तलाशा जिसके पुण्य से उसे मुक्ति मिली थी ! उसने वेश्या से पूछा कि उसने कौन सा पुण्य दान किया था ?

वेश्या ने एक तोते की ओर इशारा करके कहा :-

वह तोता प्रतिदिन कुछ पढ़ता है उसे सुनकर मेरा मन पवित्र हो गया ! वही पुण्य मैंने दान कर दिया !

सुशर्मा ने तोते से उसके ज्ञान का रहस्य पूछा ! तब तोते ने अपने पूर्वजन्म की कथा सुनाई !

पूर्वजन्म में मैं विद्वान होने के बावजूद अभिमानी था और सभी विद्वानों के प्रति ईर्ष्या रखता था उनका अपमान और अहित करता था !

मरने के बाद मैं अनेक लोकों में भटकता रहा ! फिर मुझे तोते के रूप में जन्म मिला लेकिन पुराने पाप के कारण बचपन में ही मेरे माता-पिता की मृत्यु हो गई !

मैं रास्ते में कहीं अचेत पड़ा था, तो कुछ मुनि मुझे उठा लाए ! एक पिंजरे में वहां रख दिया जहां विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाती थी ! मैंने वहां गीता का पूरा ज्ञान सीखा !

सुनते-सुनते गीता का प्रथम अध्याय मुझे कंठस्थ हो गया ! इससे पहले कि मैं अन्य अध्याय सीख पाता एक बहेलिये ने वहां से चुराकर इन देवी को बेच दिया

मैं अपने स्वभाव-वश इनको प्रतिदिन गीता के श्लोक सुनाता रहता हूं ! वही पुण्य इन्होंने आपको दान किया और आप मानवरूप में आए !

श्री हरि ने लक्ष्मीजी से कहा :-

देवी जो गीता का प्रथम अध्याय पढ़ता या सुनता है ! उसे भव-सागर पार करने में कोई कठिनाई नहीं होती !

तो इस प्रकार भगवान ने श्रीमद्भगवद्गीता के विभिन्न अध्यायों को अपने शरीर का अंग मानते हुए बताया है ! कि गीता में साक्षात उनका वास है !

गीता को स्पर्श करने का अर्थ है , आप श्री नारायण के अंगों का स्पर्श कर रहे हैं ! भगवान का स्पर्श करके सौंगंध लेने के बाद कोई असत्य नहीं कहेगा ! इसी विश्वास के साथ गीता की सौगंध दी जाती है !

🙏

🌻 Why oath is taken on Gita 🌻

Why is Gita so important, have you ever thought? After all, why is oath administered by keeping hands on this book?

There are several reasons for this ! The biggest reason is that Geeta is not an ordinary book.

In the system of creation, Narayan has been considered as the protector. Follower means the one who keeps watching the law and order properly! Keep it dynamic, then where there is talk of maintaining law and order, law and order will come!

Every chapter of Shrimadbhagwadgita is part of Narayan! It will not be an exaggeration if it is said that by touching the Gita, we are taking an oath of Narayan in a way!

The story goes something like this:-

Lord Sri Hari, after destroying the Moor demon, was lying on the remaining bed in Vaikunth Lok, smiling in his heart!

Goddess Lakshmi was serving his feet! The goddess was curious to see God smiling in her mind.

Goddess Lakshmi asked him a question :-
Lord, you are taking care of the whole world and yet being indifferent to your opulence, you are sleeping in this ocean of milk! What is the reason for this ?

Shri Hari smiled again and spreading his charming smile said :-

Oh dear, I am not sleeping, but with my insight I am interviewing that glory of mine, the goddess whom yogis can see with their vision!

The power under which this whole world is! Whenever I see him in my mind! Then it seems to you that I am drowning in sleep but it is so, no!

God spoke in such a mysterious way that Lakshmi ji understood some things and some did not!

He again asked :-

O Nath, there is some power other than you, which you yourself take care of! this thing amazes me

Shri Hari said :-

Devi, to understand this thing well, you have to understand the secrets of Gita! You serve!

My five faces know the five chapters of the beginning of the Gita!

Consider the sixth to fifteenth chapter as my ten arms!

The sixteenth chapter is my stomach where the appetite is calm!

Consider the last two chapters as my lotus feet!

God explained the chapters of Gita in this way! Instead of reducing the confusion of Lakshmi ji, it started increasing! God sensed what was going on in the mind of the Goddess.

Shri Hari again said :-

Goddess, the person who recites even a single chapter or even a verse of the Gita everyday! He becomes free from all sins like Susharma!

Now Goddess Lakshmi is even more confused! Expressing his impatience in a restrained manner, he said:

Hey Nath, what is this leela of yours, you are telling riddles one after the other! Please satisfy my curiosity!

God started smiling again and he started telling the story of Susharma to Lakshmidevi.

Susharma was a very sinful person, he was always immersed in enjoyment. Lives in alcohol and non-vegetarian! One day he died of snake bite.

He suffered tortures in hell and was born again on earth as a bull.

Eight years have passed since the bull served his master! He got less food but had to work harder than necessary.

One day the bull fainted and fell in the market. Many people gathered! Some of the people present there started doing some charity of their own share to improve the next life of the bull.

A prostitute was also standing in that crowd! He didn’t know his virtue! Still he said that whatever good deeds have been done in his life, the bull should get a part of it.

The bull reached Yamlok after dying! The settlement was done and due to the charity given by the prostitute, he was freed from hell. He was born in human form!

He said to God that :-

Before sending him to earth in human form, give him the ability to remember the things of his previous birth. God gave that ability!

After coming to the earth, he searched for the courtesan by whose virtue he had got freedom. He asked the prostitute what virtue she had donated?

The prostitute pointed to a parrot and said:

My mind became pure after hearing that parrot reads something every day! I donated the same virtue!

Susharma asked the parrot the secret of his knowledge. Then the parrot narrated the story of his previous birth.

In my previous birth, despite being a scholar, I was proud and jealous of all scholars, used to insult and harm them!

After death I kept wandering in many worlds. Then I was born as a parrot but due to old sin my parents died in childhood.

I was lying unconscious somewhere on the way, so some sage brought me up! Kept in a cage where the students were taught! I learned the complete knowledge of Gita there!

I got the first chapter of Gita by heart while listening to it! Before I could learn another chapter, a fowler stole from there and sold these to the goddess.

Due to my nature, I keep reciting the verses of Gita to them everyday. He donated the same virtue to you and you came in human form!

Shri Hari said to Lakshmiji :-

Devi who reads or listens to the first chapter of Gita! He does not have any difficulty in crossing the ocean of existence.

So in this way God has narrated the different chapters of Shrimadbhagwadgita considering them as part of his body. That he actually resides in the Gita!

Touching the Gita means, you are touching the parts of Shri Narayan! After touching God and taking an oath, no one will tell a lie! With this faith the oath of Gita is given.

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