रामचरितमानस राम नाम महिमा

– श्रीरामचरितमानस

——श्रीराम नाम महिमा ——-
नारद जानेउ नाम प्रतापू ।।
जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू ।
नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू ।
भगत सिरोमनि भे प्रहलादू ।।
( बालकांड 25/2)
राम राम बंधुओं राम नाम की महिमा बताते हुए गोस्वामी जी मानस के आरंभ में कहते हैं श्रीराम नाम की यह महिमा है कि नाम जप करने के कारण ही नारद जी नाम के प्रताप को जानते हैं । श्रीहरि तो सारे संसार को प्यारे हैं , श्रीहरि को शिव जी प्यारे हैं परंतु नाम जप प्रताप के कारण नारद जी श्रीहरि व शिव दोनों को प्रिय हैं । नाम जप के कारण ही प्रभु ने कृपा कर प्रह्लाद को भक्त शिरोमणि बना दिया ।
मित्रों, हम सब चाहते हैं कि भगवान हमें प्रेम करें । उनका नाम जपकर हमें वह प्रेम मिल सकता है । नाम जप से भगवान रीझते हैं , नाम जाप ने प्रह्लाद को शीर्ष भक्त बना दिया । राम नाम जप कर हम आप भी उनके कृपापात्र बनने सकते हैं अतएव राम प्रियता पाने हेतु जपें अथ श्रीराम , जय राम , जय जय राम

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