दशहरा क्‍यों मनाते हैं, जानें इसका शुभ मुहुर्त, इतिहास और महत्‍व

दशहरा का पर्व असत्य की सत्य पर जीत का पर्व है। दशहरा जिसे विजय दशमी भी कहते हैं यह पर्व अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है। विजयदशमी यानी दशहरा नवरात्रि खत्म होने के अगले दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने रावण का वध करने से पहले 9 दिनों तक मां दुर्गा की उपासनी की थी और 10वें दिन रावण का वध किया था।

विजयदशमी का पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाए जाने वाले मुख्य पर्वों में से है। श्री वाल्मीकि रामायण, श्री रामचरितमानस, कालिका उप पुराण और अन्य अनेक धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार भारतीय जनता के प्राण, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के साथ इस पर्व का गहरा संबंध है। विद्वानों के अनुसार श्री रामजी ने अपनी विजय यात्रा इसी तिथि को आरंभ की थी। इसलिए विजय यात्रा के लिए यह पर्व शास्त्र सम्मत माना जाता है। आइए दशहरे की मान्यताओं, इतिहास और शुभ मुहूर्त के बारे में जानते हैं विस्‍तार से।

दशहरे का शुभ मुहूर्त

इस साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 24 अक्टूबर मंगलवार के दिन है। आपको बता दें कि दशमी तिथि का आरंभ 23 अक्टूबर को शाम के समय 5 बजकर 44 मिनट पर होगा और इसका समापन 24 अक्टूबर को 3 बजकर 14 मिनट पर होगा। दशहरा का त्योहार 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। बता दें कि इस साल दशहरा पर दो बहुत ही शुभ योग बनने जा रहे हैं एक रवि योग और दूसरी वृद्धि योग का संयोग है।

दशहरे का इतिहास

भारतीय काल गणना के अनुसार इसका आरंभ आज से लगभग नौ लाख वर्ष पूर्व सिद्ध होता है। ज्योतिष के सिद्धान्तानुसार इस समय में ऐसे ग्रह नक्षत्रों का संयोग होता है, जिससे विजय यात्रा का श्रीगणेश करने पर विजय यात्री को जय की प्राप्ति होती है। इसलिए इस तिथि में राजागण अपने राज्यों की सीमा का अतिक्रमण करते रहे हैं और यूं भी भगवान श्री राम की विजय यात्रा के स्मरणार्थ मनाया जाने वाला विजयदशमी का पर्व आज भी अपने अनेक शाश्वत मूल्यों के कारण प्रासंगिक है। श्रीराम द्वारा रावण पर विजय दैवीय और मानवीय गुणों-सत्य, नैतिकता और सदाचार की राक्षसी और अमानवीय दुर्गुणों- अनैतिकता, असत्य, दंभ, अहंकार और दुराचार पर विजय है। यह पर्व न्याय की जीत एवं नारी जाति के अपमान करने वालों का संहारक है।

इसे लेकर एक अन्य पौराणिक कथा कहती है कि एक महिषासुर नाम का राक्षस था जिसने ब्रह्मा जी की उपासना करके वरदान प्राप्त किया था कि वह पृथ्वी पर कोई भी उसे पराजित नहीं कर पाएगा अर्थात उसका वध नहीं कर पाएगा। महिषासुर से अपने पाप से हाहाकार मचा दिया था। तब ब्रह्मा विष्णु महेश ने अपनी शक्ति से दुर्गा मां का सर्जन किया था। मां दुर्गा और महिषासुर के बीच में 9 दिनों तक मुकाबला चला और 10वें दिन मां दुर्गा ने असुर का वध कर दिया।

राम के पदचिह्नों पर चलने का शुभ मुहुर्त

इस तिथि की विजय यात्रा मात्र लंका या रावण पर की जाने वाली राजनीतिक जयमात्र नहीं है, बल्कि सनातन धर्म और मानवीय मूल्यों की विजय है। यह दुख में धैर्य करने और सुख के समय कभी न इतराने के उपदेश से आरंभ हुई थी। यह अवसर भगवान श्रीराम के पदचिह्नों पर चलने के लिए संकल्प लेने का शुभ मुहूर्त है। दशहरे का पर्व निरपराध लोगों को सतत रुलाने वाले रावण के अहंकार रूपी दस सिरों और पौरूष की दुरुपयोगिनी बीस भुजाओं के विनाश का प्रतीक है। विजयदशमी की पूर्वपीठिका का आरंभ आश्विन शुल्क पक्ष के पहले नवरात्र से ही हो जाता है।

नीलकंठ के दर्शन शुभ

लोकहित के लिए विष पीकर अपने कंठ को नीला कर लेने वाले भगवान शिव के रूप नीलकंठ के दशहरे के पर्व पर दर्शन बहुत ही सौभाग्यपूर्ण माने जाते हैं। मान्‍यताओं के अनुसार भगवान नीलकंठ दर्शनार्थियों को स्वस्थ, सुखी और यथावत रहने का आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि लोग सजधजकर स्वस्थ प्रसन्न मन से उनका दर्शन करते हैं।

रुके काम शुरू हो जाते हैं

इस पर्व से पहले बरसात के कारण राजाओं की यात्राएं और चातुर्मास के कारण सन्यासियों के आवागमन स्थगित होते हैं, लेकिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के आते-आते मार्ग सुगम हो जाते हैं। स्वच्छ अम्बर में पवन-संयोग के कारण मेघ बलाहक पक्षी की तरह उड़ने लगते हैं। ऋतु सुहावनी हो जाती है। फसलें लहलहाने लगती हैं।



The festival of Dussehra is the festival of victory of falsehood over truth. Dussehra, which is also called Vijay Dashami, this festival falls on the tenth day of Shukla Paksha of Ashwin month. Vijayadashami i.e. Dussehra is celebrated the next day after the end of Navratri. According to religious beliefs, Lord Rama worshiped Goddess Durga for 9 days before killing Ravana and killed Ravana on the 10th day.

The festival of Vijayadashami is one of the main festivals celebrated on the tenth day of Shukla Paksha of Ashwin month. According to Shri Valmiki Ramayana, Shri Ramcharitmanas, Kalika Upa Purana and many other religious texts, this festival has a deep connection with Lord Shri Ram, the life and dignity of the Indian people. According to scholars, Shri Ramji started his victory journey on this date. Therefore, this festival is considered according to the scriptures for Vijay Yatra. Let us know in detail about the beliefs, history and auspicious time of Dussehra.

Auspicious time of Dussehra

This year, Dashami Tithi of Shukla Paksha of Ashwin month is Tuesday, 24 October. Let us tell you that Dashami Tithi will start on October 23 at 5.44 pm and will end on October 24 at 3.14 pm. The festival of Dussehra will be celebrated on 24 October. Let us tell you that this year two very auspicious yogas are going to be formed on Dussehra, one is the combination of Ravi Yoga and the other is the combination of Vriddhi Yoga.

History of Dussehra

According to Indian time calculation, its beginning is proved to be about nine lakh years ago. According to the theory of astrology, during this time there is a combination of such planets and stars, due to which the Vijay Yatri gets victory when he starts the Vijay Yatra. Therefore, on this date, the kings have been encroaching the boundaries of their kingdoms and yet the festival of Vijayadashami, celebrated to commemorate the victory journey of Lord Shri Ram, is still relevant due to its many eternal values. The victory of Shri Ram over Ravana is the victory of the divine and human virtues – truth, morality and virtue – over the demonic and inhuman vices – immorality, untruth, arrogance, arrogance and misconduct. This festival is the victory of justice and the destruction of those who insult women.

Another mythological story regarding this says that there was a demon named Mahishasura who had received a boon by worshiping Lord Brahma that no one on earth would be able to defeat him i.e. would not be able to kill him. He had created an uproar from Mahishasura with his sin. Then Brahma Vishnu Mahesh created Goddess Durga with his power. The fight between Maa Durga and Mahishasura lasted for 9 days and on the 10th day, Maa Durga killed the demon.

Auspicious time to follow the footsteps of Ram

The Vijay Yatra of this date is not just a political victory over Lanka or Ravana, but a victory of Sanatan Dharma and human values. It started with the advice of being patient in sorrow and never boasting in times of happiness. This occasion is an auspicious time to take a resolution to follow the footsteps of Lord Shri Ram. The festival of Dussehra symbolizes the destruction of Ravana’s ten egoistic heads and twenty arms that misuse his masculinity, who constantly make innocent people cry. Purva Peethika of Vijayadashami starts from the first Navratri of Ashwin Shulk Paksha.

Darshan of Neelkanth is auspicious

On the festival of Dussehra, the sight of Neelkanth in the form of Lord Shiva, who turns his throat blue by drinking poison for the welfare of the people, is considered very auspicious. According to beliefs, Lord Neelkanth blesses the visitors to remain healthy, happy and stable. This is the reason why people dress up and visit him with a healthy and happy mind.

pending work begins

Before this festival, due to rains, the travels of kings and the movement of monks are postponed due to Chaturmas, but with the arrival of Shukla Paksha of Ashwin month, the routes become easier. Due to the combination of wind in clean amber, the clouds start flying like Balahak birds. The weather becomes pleasant. The crops start flourishing.

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