🌳(विश्व पर्यावरण दिवस : ५ जून)🌳

🌿स्वास्थ्य एवं पर्यावरण रक्षक प्रकृति के अनमोल उपहार🌿

अन्न, जल और वायु हमारे जीवन के आधार हैं । सामान्य मनुष्य प्रतिदिन औसतन १ किलो अन्न और २ किलो जल लेता है परंतु इनके साथ वह करीब १०,००० लीटर (१२ से १३.५ किलो) वायु भी लेता है । इसलिए स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु शुद्ध वायु अत्यंत आवश्यक है ।

प्रदूषणयुक्त, ऋण-आयनों की कमीवाली एवं ओजोनरहित हवा से रोगप्रतिकारक शक्ति का ह्रास होता है व कई प्रकार की शारीरिक-मानसिक बीमारियाँ होती हैं ।

पीपल का वृक्ष दमानाशक, हृदयपोषक, ऋण-आयनों का खजाना, रोगनाशक, आह्लाद व मानसिक प्रसन्नता का खजाना तथा रोगप्रतिकारक शक्ति बढानेवाला है । बुद्धू बालकों तथा हताश-निराश लोगों को भी पीपल के स्पर्श एवं उसकी छाया में बैठने से अमिट स्वास्थ्य-लाभ व पुण्य-लाभ होता है । पीपल की जितनी महिमा गायें, कम है । पर्यावरण की शुद्धि के लिए जनता-जनार्दन एवं सरकार को बबूल, नीलगिरी (यूकेलिप्टस) आदि जीवनशक्ति का ह्रास करनेवाले वृक्ष सडकों एवं अन्य स्थानों से हटाने चाहिए और पीपल, आँवला, तुलसी, वटवृक्ष व नीम के वृक्ष दिल खोलके लगाने चाहिए । इससे अरबों रुपयों की दवाइयों का खर्च बच जायेगा । ये वृक्ष शुद्ध वायु के द्वारा प्राणिमात्र को एक प्रकार का उत्तम भोजन प्रदान करते हैं । पूज्य बापूजी कहते हैं कि ये वृक्ष लगाने से आपके द्वारा प्राणिमात्र की बडी सेवा होगी । यह लेख पढने के बाद सरकार में अमलदारों व अधिकारियों को सूचित करना भी एक सेवा होगी । खुद वृक्ष लगाना और दूसरों को प्रेरित करना भी एक सेवा होगी ।

पीपल : यह धुएँ तथा धूलि के दोषों को वातावरण से सोखकर पर्यावरण की रक्षा करनेवाला एक महत्त्वपूर्ण वृक्ष है । यह चौबीसों घंटे ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है । इसके

नित्य स्पर्श से रोग-प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि, मनःशुद्धि, आलस्य में कमी, ग्रहपीडा का शमन, शरीर के आभामंडल की शुद्धि और विचारधारा में धनात्मक परिवर्तन होता है । बालकों के लिए पीपल का स्पर्श बुद्धिवर्धक है । रविवार को पीपल का स्पर्श न करें ।

आँवला : आँवले का वृक्ष भगवान विष्णु को प्रिय है । इसके स्मरणमात्र से गोदान का फल प्राप्त होता है । इसके दर्शन से दुगना और फल खाने से तिगुना पुण्य होता है । आँवले के वृक्ष का पूजन कामनापूर्ति में सहायक है । कार्तिक में आँवले के वन में भगवान श्रीहरि की पूजा तथा आँवले की छाया में भोजन पापनाशक है । आँवले के वृक्षों से वातावरण में ऋणायनों की वृद्धि होती है तथा शरीर में शक्ति का, धनात्मक ऊर्जा का संचार होता है ।

आँवले से नित्य स्नान पुण्यमय माना जाता है और लक्ष्मीप्राप्ति में सहायक है । जिस घर में सदा आँवला रखा रहता है वहाँ भूत, प्रेत और राक्षस नहीं जाते ।

तुलसी : प्रदूषित वायु के शुद्धीकरण में तुलसी का योगदान सर्वाधिक है । तुलसी का पौधा उच्छ्वास में स्फूर्तिप्रद ओजोन (३) वायु छोडता है, जिसमें ऑक्सीजन (२) के दो के स्थान पर तीन परमाणु होते हैं । ओजोन वायु वातावरण के बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि को नष्ट करके ऑक्सीजन में रूपांतरित हो जाती है । तुलसी उत्तम प्रदूषणनाशक है । फ्रेंच डॉ. विक्टर रेसीन कहते हैं : ‘तुलसी एक अद्भुत औषधि है । यह रक्तचाप व पाचनक्रिया का नियमन तथा रक्त की वृद्धि करती है ।

वटवृक्ष : यह वैज्ञानिक दृष्टि से पृथ्वी में जल की मात्रा का स्थिरीकरण करनेवाला एकमात्र वृक्ष है । यह भूमिक्षरण को रोकता है । इस वृक्ष के समस्त भाग औषधि का कार्य करते हैं । यह स्मरणशक्ति व एकाग्रता की वृद्धि करता है । इसमें देवों का वास माना जाता है । इसकी छाया में साधना करना बहुत लाभदायी है । वातावरण-शुद्धि में सहायक हवन के लिए वट और पीपल की समिधा का वैज्ञानिक महत्त्व है ।

नीम : नीम की शीतल छाया कितनी सुखद और तृप्तिकर होती है, इसका अनुभव सभीको होगा । नीम में ऐसी कीटाणुनाशक शक्ति मौजूद है कि यदि नियमित नीम की छाया में दिन के समय विश्राम किया जाय तो सहसा कोई रोग होने की सम्भावना ही नहीं रहती ।

नीम के अंग-प्रत्यंग (पत्तियाँ, फूल, फल, छाल, लकडी) उपयोगी और औषधियुक्त होते हैं । इसकी कोंपलों और पकी हुई पत्तियों में प्रोटीन, कैल्शियम, लौह और विटामिन ‘ए पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं ।

हे समझदार मनुष्यो ! पक्षी एवं प्राणियों जितनी अक्ल तो हमें रखनी चाहिए । हानिकर वृक्ष हटाओ और तुलसी, पीपल, आँवला आदि लगाओ ।

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🌿Health and environment protectors are precious gifts of nature🌿

Food, water and air are the basis of our life. An average person consumes 1 kg of food and 2 kg of water per day, but along with these he also takes in about 10,000 liters (12 to 13.5 kg) of air. That’s why pure air is very important for the protection of health.

Polluted, negative-ion-deficient and ozone-less air leads to loss of immunity and many types of physical-mental diseases.

Peepal tree is anti-depressant, heart-nutritious, treasure of negative ions, disease-killer, treasure of joy and mental happiness and increases immunity. Foolish children and hopeless people also get indelible health-benefits and merit-benefits by touching the peepal tree and sitting under its shade. The more people sing the praise of Peepal, it is less. For the purification of the environment, the public, Janardan and the government should remove the trees like Acacia, Eucalyptus, etc., from the roads and other places, and trees like Peepal, Amla, Tulsi, Banyan tree and Neem should be planted with open heart. This will save the cost of medicines worth billions of rupees. These trees provide a kind of excellent food to the living beings through pure air. Respected Bapuji says that by planting this tree, you will be of great service to all living beings. After reading this article, it will also be a service to inform the officials and officers in the government. Planting trees yourself and motivating others will also be a service.

Peepal: It is an important tree that protects the environment by absorbing the impurities of smoke and dust from the atmosphere. It emits oxygen round the clock. Its

Regular touch leads to increase of immunity, purification of mind, reduction of laziness, relief of planetary pain, purification of body’s aura and positive change in ideology. Peepal’s touch is intellectual for children. Do not touch Peepal on Sunday.

Amla: Amla tree is dear to Lord Vishnu. The fruit of Godan is obtained by its mere remembrance. Seeing it doubles and eating its fruit triples the merit. Worship of Amla tree is helpful in fulfilling wishes. In Kartik, worshiping Lord Hari in the Amla forest and eating food under the shade of Amla is sinful. Amla trees increase the negative ions in the environment and there is a circulation of power and positive energy in the body.

Regular bath with Amla is considered auspicious and helps in attaining Lakshmi. Ghosts, devils and demons do not enter the house where Amla is always kept.

Tulsi: The contribution of Tulsi is maximum in the purification of polluted air. Tulsi plant exhales invigorating ozone (3) air, in which there are three atoms of oxygen (2) instead of two. Ozone is converted into oxygen by destroying the bacteria, virus, fungus etc. in the air environment. Tulsi is the best pollutant. French Dr. Victor Racine says: ‘Tulsi is a wonderful medicine. It regulates blood pressure and digestion and increases blood.

Banyan Tree: It is scientifically the only tree which stabilizes the amount of water in the earth. It prevents soil erosion. All the parts of this tree work as medicine. It increases memory power and concentration. It is believed to be the abode of the gods. It is very beneficial to do spiritual practice under its shadow. There is a scientific significance of the composition of Vat and Peepal for the Havan that helps in purification of the environment.

Neem: Everyone will experience how pleasant and satisfying the cool shade of Neem is. Neem has such a germicidal power that if one regularly rests in the shade of neem during the day time, then there is no possibility of getting any disease suddenly.

Neem’s parts (leaves, flowers, fruits, bark, wood) are useful and medicinal. Sufficient amounts of protein, calcium, iron and vitamin A are found in its buds and ripe leaves.

O wise men! We should have as much intelligence as birds and animals. Remove harmful trees and plant Tulsi, Peepal, Amla etc.

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