
सम्बन्ध बेटा बेटी से
मां पुत्र पुत्री का सम्बंध देखने में एक जैसा लगता है लेकिन जब बारिकी से पढते है तब हर सम्बन्ध
मां पुत्र पुत्री का सम्बंध देखने में एक जैसा लगता है लेकिन जब बारिकी से पढते है तब हर सम्बन्ध
भक्ति केवल एक साधना नहीं, बल्कि आत्मा का सबसे कोमल और गहन स्पंदन है। यह कोई रूढ़ि नहीं, बल्कि जीवन
अन्तर आत्मा की एक ही पुकार भगवान राम के दर्शन कैसे हो। हृदय में भगवान राम के दर्शन कर पाऊं
क्या आपने कभी सोचा है कि लोग जन्म-जन्मांतर तक जप करते रहते हैं, फिर भी ईश्वर उनके समक्ष प्रकट क्यों
भगवान राम के दर्शन कैसे हो। इस दिल में भी भगवान राम के दर्शन कर पाऊं, यह आत्मा की आवाज
हे परमात्मा जी मै कहती। भगवान् देख रहा है। मै जब भीघर में कार्य करती मेरा अन्तर्मन पुकारता भगवान् देखरहा
मोहन शान्त भाव में बैठा हुआ है जगदीश उसमे कैसे विचार डालना चाहता है। जगदीश उसमे विचार की झलक एक
एक भक्त आत्मचिंतन करते हुए अपने आप से बात कररहा है देख जब तक शरीर में आत्मा है तब तकप्राण
महाकुंभ साधू संतो तपस्वी त्यागीयो का महा स्नान 13 जनवरी को चार पांच लाख साधु महाकुंभ में स्नान करेगें हम
हमारे जीवन का लक्ष्य जीवनकाल में अन्तर यात्रा को करना है। अन्तर यात्रा का अर्थ है अपने भीतर की यात्रा