
भगवान मे समाना
हम भक्ति करना चाहते हैं भक्ति के लिए लक्ष्य का निर्धारित करना आवश्यक है। लक्ष्य क्या है मै भगवान के

हम भक्ति करना चाहते हैं भक्ति के लिए लक्ष्य का निर्धारित करना आवश्यक है। लक्ष्य क्या है मै भगवान के

परमात्मा श्रीराम परमानन्द के स्वरूप हैं। निराकार आनन्द ही नराकार। निराकार वस्तु आँख को दीखती नहीं। यह फूल साकार है,

एक भक्त की भगवान से प्रार्थना हे परमात्मा तुम परमेश्वर स्वामी भगवान नाथ हो। हे प्रभु प्राण नाथ तेरी ज्योती

भक्त की एक ही अभिलाषा होती है प्रभु भगवान के दर्शन कैसे हो प्रभु से मिलन हो तभी हृदय शान्त
एक भक्त अंतर्मन से भाव में है अन्तर्मन से भगवान का सतसंग चल रहा है भक्त भाव मे गहरा चला

एक भक्त की कर्म प्रधान साधना हैं। भक्त कर्म करते हुए जितना आनंद विभोर होता है । कर्म करते हुए

एक भक्त की कर्म प्रधान साधना हैं। भक्त कर्म करते हुए जितना आनंद विभोर होता है । कर्म करते हुए

भगवान में दिल का रमना भक्ति है। हमारे अन्दर भगवान राम भगवान कृष्ण से मिलन की तीव्र इच्छा में भगवान

भगवान में दिल का रमना भक्ति है। हमारे अन्दर भगवान राम भगवान कृष्ण से मिलन की तीव्र इच्छा में

एक साधक आत्म चिन्तन करते हुए अपने आप से पुछता मै किस लिए आया हूं मेरे जीवन का क्या लक्ष्य