
मैं भी बोलूं राम तुम भी बोलो ना,
मैं भी बोलूं राम तुम भी बोलो ना, राम है अनमोल मुख को खोलो ना ॥ तू मृत्यु लोक में
मैं भी बोलूं राम तुम भी बोलो ना, राम है अनमोल मुख को खोलो ना ॥ तू मृत्यु लोक में
नाम राम को अंक है सब साधन हैं सून।अंक गएँ कछु हाथ नहिं अंक रहें दस गून॥ शून्य के पहले
मेरी चौखट पे चल के आजचारो धाम आये हैंबजाओ ढोल स्वागत मेंमेरे घर राम आये हैं कथा शबरी की जैसेजुड़
राम शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना जैसे अपने मार्ग से भटका हुआ कोई पथिक
जपो राम राम भजो राम राम,दुखी मन को मिलेगा आराम,जिस घडी काम कोई ना आये,उस घड़ी राम आएंगे काम,जपो राम
श्री राम लक्ष्मण व सीता सहित चित्रकूट पर्वत की ओर जा रहे थे ! राह बहुत पथरीली और कंटीली थी
करउँ सदा तिन्ह कै रखवारी।जिमि बालक राखइ महतारी॥ प्रभु श्री राम देवर्षि नारदजी को समझाते हुए कहते हैं कि..हे मुनि!
जब तेहिं कीन्हि राम कै निंदा।क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।। हरि हर निंदा सुनइ जो काना।होइ पाप गोघात समाना।। कटकटान कपिकुंजर
माता पार्वती की स्वीकारोक्ति – श्री राम ब्रह्म हैं।शंकर जी कहते हैं –तुम्ह रघुबीर चरन अनुरागी।कीन्हिहु प्रस्न जगत हित लागी।।हे
भक्त मन को, दिल को, नैनो को, राम नाम अमृत का रसपान कराना चाहता है । आत्मा कहती हैं, कि