
शिव धनुषशक्तिशाली और चमत्कारिक
रावण ने कैलाश पर्वत को उठा लिया फिर धनुष क्यों नहीं उठा पाया और श्रीराम ने कैसे धनुष तोड़ दिया..??

रावण ने कैलाश पर्वत को उठा लिया फिर धनुष क्यों नहीं उठा पाया और श्रीराम ने कैसे धनुष तोड़ दिया..??

एक राजा बहुत दिनों से विचार कर रहा था कि वह राजपाट छोड़कर अध्यात्म (ईश्वर की खोज) में समय लगाए

एक बार अर्जुन अपने सखा श्री कृष्ण के साथ वन में विहार कर रहे थे। अचानक ही अर्जुन के मन

आज भगवान वाल्मीकि जी के पास आए हैं, पूछते हैं, गुरु जी मैं कहाँ रहूँ?वाल्मीकि जी कहते हैं, आप पूछते

लंका में हनुमानजी ने आगे बढ़ते हुए एक छोटी कुटिया देखी। “श्रीराम” का नाम कुटीर की दीवार पर अंकित था,

ॐ श्री सच्चिदात्मने नमः 🙏आज का शब्द-: दुख पर हर सुख घर ले जा……..! अर्थ-: जैसे किसी बड़े डॉक्टर के

देखा भरत विसाल अति निसिचर मन अनुमानि।बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।। सामान्य जनों की तरह, हनुमानजी को

महाभारत काल अर्थात द्वापर युग में हनुमानजी की उपस्थित और उनके पराक्रम का वर्णन मिलता है।उन्हीं में से पांच प्रमुख

कपिश्रेष्ठाय शूराय सुग्रीवप्रियमन्त्रिणे।जानकीशोकनाशाय आञ्जनेयाय मङ्गलम्।।१।। मनोवेगाय उग्राय कालनेमिविदारिणे।लक्ष्मणप्राणदात्रे च आञ्जनेयाय मङ्गलम्।।२।। महाबलाय शान्ताय दुर्दण्डीबन्धमोचन।मैरावणविनाशाय आञ्जनेयाय मङ्गलम्।।३।। पर्वतायुधहस्ताय राक्षःकुलविनाशिने।श्रीरामपादभक्ताय आञ्जनेयाय मङ्गलम्।।४।।

एक असुर था – दम्बोद्भव । उसने सूर्यदेव की बड़ी तपस्या की । सूर्य देव जब प्रसन्न हो कर प्रकट