
पंचाध्यायी–महारासलीला पोस्ट – 04
भगवान् का प्रकट होकर गोपियों को सान्त्वना देना भगवान की प्यारी गोपियाँ विरह के आवेश में इस प्रकार भाँति-भाँति से

भगवान् का प्रकट होकर गोपियों को सान्त्वना देना भगवान की प्यारी गोपियाँ विरह के आवेश में इस प्रकार भाँति-भाँति से

श्री हरि: गत पोस्ट से आगे………..परीक्षित ! पापी पुरुष की जैसी शुध्दि भगवान् को आत्मसमर्पण करने से और उनके भक्तों

. (अन्तिम) महारास गोपियाँ भगवान की इस प्रकार प्रेम भरी सुमधुर वाणी सुनकर जो कुछ विरहजन्य ताप शेष था, उससे

भगत कबीर जी की बेटी की शादी का समय नजदीक आ रहा था।सभी नगर वासीयों में काना फूसी चल रही

अन्न के सम्मान का संदेश है नवरात्रि पूजा में जवारे बोना नवरात्रि के दिनों में जवारों की पूजा का बहुत

. गोपिकागीत गोपियाँ विरहावेश में गाने लगीं–‘प्यारे! तुम्हारे जन्म के कारण वैकुण्ठ आदि लोकों से भी व्रज की महिमा बढ़

|| श्री हरि: || गत पोस्ट से आगे………..राजा परीक्षित ने पूछा – भगवन ! मनुष्य राजदण्ड, समाजदण्ड आदि लौकिक और

राजा परीक्षित ने कहा – भगवन ! आप पहले (दिव्तीय सकन्ध में) निवृतिमार्ग का वर्णन कर चुके हैं तथा यह

. श्रीकृष्ण के विरह में गोपियों की दशा भगवान् को न देखकर व्रज युवतियों की वैसी ही दशा हो गयी,

. रासलीला का आरम्भ शरद् ऋतु थी। उसके कारण बेला, चमेली आदि सुगन्धित पुष्प खिलकर महक रहे थे। भगवान ने