
भक्त का मौन और ईश्वर की व्याकुलता
बहुत समय पहले की बात है, एक छोटा सा गाँव था जहाँ ‘माधव’ नाम का एक गरीब कुम्हार रहता था।

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटा सा गाँव था जहाँ ‘माधव’ नाम का एक गरीब कुम्हार रहता था।

चोखामेला जी महाराष्ट्र के एक गृहस्थ संत थे। वो बड़ी मेहनत से गृह निर्माण कार्य से जो धन मिलता था

समाधि की अवस्था विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों एवं साधु संतों के लिए अपने ध्येय को प्राप्त करने की सर्वोत्कृष्ट अवस्था है l
आध्यात्मिक ज्ञान भक्त प्रह्लाद के पौत्र बलि यज्ञ कर रहे थे तभी उनकी यज्ञशाला में नारायण प्रभु (विष्णु जी )

जिस देह पर तुम हँसते हो,उसे ईश्वर ने स्वयं गढ़ा है।हांडी टेढ़ी हो तो दोष कुम्हार का होता है।— ऋषि


पुरी के पास एक छोटा-सा गाँव था — वहाँ एक गरीब लेकिन परम भक्त बालक रहता था, नाम था माधव।

माओत्से-तुंग ने अपने बचपन की एक छोटी सी घटना लिखी है। लिखा है कि मेरी मां का एक बगीचा था।

पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे शयनम्।इह संसारे बहुदुस्तारे, कृपयाऽपारे पाहि मुरारेभजगोविन्दं भजगोविन्दं, गोविन्दं भजमूढमते।नामस्मरणादन्यमुपायं, नहि पश्यामो भवतरणे ॥