बोध कथा (Bodh Katha)

समाधि की अवस्था

समाधि की अवस्था विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों एवं साधु संतों के लिए अपने ध्येय को प्राप्त करने की सर्वोत्कृष्ट अवस्था है l

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जीवन भीतर है

माओत्से-तुंग ने अपने बचपन की एक छोटी सी घटना लिखी है। लिखा है कि मेरी मां का एक बगीचा था।

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पुनरपि जननं पुनरपि मरणं,

पुनरपि जननं पुनरपि मरणं,     पुनरपि जननी जठरे शयनम्।इह संसारे बहुदुस्तारे,        कृपयाऽपारे पाहि मुरारेभजगोविन्दं भजगोविन्दं,          गोविन्दं भजमूढमते।नामस्मरणादन्यमुपायं,       नहि पश्यामो भवतरणे ॥

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