
भगवान्की प्रसन्नता
महात्मा रामलिङ्गम् इस बातको सोचकर सदा | वे खिन्न रहते थे कि मेरे पापोंका क्षय नहीं हो रहा है। वे

महात्मा रामलिङ्गम् इस बातको सोचकर सदा | वे खिन्न रहते थे कि मेरे पापोंका क्षय नहीं हो रहा है। वे

शब्द वापस नहीं लौटते एक किसानकी एक दिन अपने पड़ोसीसे खूब जमकर लड़ाई हुई। बादमें जब उसे अपनी गलतीका अहसास

सौन्दर्यके अहंकारका फल शंखासुरका एक पुत्र था, जो ‘अघ’ नामसे विख्यात था। महाबली अघ युवावस्थामें अत्यन्त सुन्दर होनेके कारण साक्षात्

माला कैसे फेरें ? पंजाबके राजा रणजीतसिंह बहुत प्रतापी शासक थे। उनके स्वभावकी खास बात यह थी कि वे बुरे

आधे विश्वाससे काम नहीं होता एक ग्वालिन एक पण्डितजीके यहाँ दूध पहुँचाया करती थी। ग्वालिनका घर नदीके उस पार था

किसी समय कन्नौजमें अजामिल नामका एक तरुण ब्राह्मण रहता था। वह शास्त्रोंका विद्वान् था, शीलवान् था, कोमल स्वभावका उदार, सत्यवादी

महाभारतका युद्ध जिस दिन समाप्त हो गया, उस दिन श्रीकृष्णचन्द्र पाण्डवोंके साथ उनके शिविरमें नहीं लौटे। वे सात्यकि तथा पाण्डवोंको

पापका फल स्वयंको ही भोगना पड़ता है प्राचीन कालमें सुमति नामक एक भृगुवंशी ब्राह्मण थे। उनकी पत्नी कौशिकवंशकी कन्या थी।

परम संत श्रीबाबा वैष्णवदासजी महाराज बड़े ही उच्चकोटिके श्रीरामभक्त संत थे। आपका सारा समय श्रीरामभजनमें व्यतीत होता था। जो भी

(2) लाल पत्थर एक किसानको अपने खेतमें रंगीन पत्थरोंका एक र मिल गया। वे गोल-गोल पत्थर थे, सो उसने बटोर