
ईश्वर का स्वरूप
ईश्वर एक है या अनेक ! वह साकार है या निराकार ! इस विषय के क्रम में निवेदन है कि-

ईश्वर एक है या अनेक ! वह साकार है या निराकार ! इस विषय के क्रम में निवेदन है कि-
बिना ज्ञान के मुक्ति नहींमै का मर जाना ही ज्ञान है। कर्ता का मिटना ज्ञान है। भगवान की भक्ति करते

!! श्री हनुमान जी !! रामायण के महान वानर देवता हनुमान अनुशासित और भक्ति से परिपूर्ण मन का प्रतीक है।

भगवान, कहावत है, ‘मानिए तो देव, नहीं तो पत्थर।’ क्या सब मानने की ही बात है? मैं कहावत को

तत्त्व के साक्षात्कार के लिए सम्पूर्ण प्रयास होते हैं। तत्त्व जिज्ञासा होने के बाद ही श्रवण-मननादि होता है और भगवत्तत्त्व

बताया गया है शास्त्रों में की इस जीवात्मा को तब तक जन्म लेने पड़ते हैं जब तक उन्हें भगवान का

ऐ आत्मा! ये शरीर तेरा घर नहीं है। ऐ आत्मा! तुझे परम तत्व परमात्मा से साक्षात्कार करना है। ऐ आत्मा,

एक फकीर नानक के पास आया और उसने कहा कि मैंने सुना है कि तुम चाहो तो क्षण में मुझे

आज का युग भौतिक पदार्थों में खुशी ढुंढता है। वह बाहर की खुशी के साथ जीवन जीते हैं उनकी कल्पना

किसे कहते है आभामंडल-औरा -प्रभामंडल-प्राणशक्ति या विद्युत शक्ति औरा का लेटीन भाषा मे अर्थ बनता है “सदैव बहने वाली हवा”।