हनुमान (Hanuman)

श्रीराम के बालरूप के दर्शन के लिए शंकरजी की मदारी-वानर लीला

जेहि सरीर रति राम सों सोइ आदरहिं सुजान।रुद्रदेह तजि नेहबस बानर भे हनुमान।। (दोहावली १४२) अर्थात्–सज्जन उसी शरीर का आदर

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भगवान की लीला

श्रीकृष्ण भगवान द्वारका में रानीसत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे,निकट ही गरुड़ और सुदर्शन चक्र भी बैठे हुए थे।तीनों

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श्री हनुमत्कवचम्

एकदा सुखमासीनं शङ्करं लोकशङ्करम्।पप्रच्छ गिरिजाकान्तं कर्पूरधवलं शिवम्।।१।। पार्वत्युवाच-भगवन् देवदेवेश लोकनाथ जगत्प्रभो।शोकाकुलानां लोकानां केन रक्षा भवेद्ध्रुवम्।।२।। सङ्ग्रामे सङ्कटे घोरे भूतप्रेतादिके भये।दुःखदावाग्निसन्तप्तचेतसां

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हनुमत्ध्यानं ।।

नमस्ते देवदेवेश नमस्ते राक्षसान्तक। नमस्ते वानराधीश नमस्ते वायुनन्दन।। नमस्त्रिमूर्तिवपुषे वेदवेद्याय ते नमः। रेवानदी विहाराय सहस्रभुजधारिणे।। सहस्रवनितालोल कपिरूपाय ते नमः। दशाननवधार्थाय

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