
भक्त कोकिल भाग – 6
गतांक से आगे- “भक्ति को गुप्त रखना चाहिये , मेरी भक्ति का प्रचार प्रसार हो ऐसी कामना निन्दनीय है”। इस

गतांक से आगे- “भक्ति को गुप्त रखना चाहिये , मेरी भक्ति का प्रचार प्रसार हो ऐसी कामना निन्दनीय है”। इस

जिस प्रकार कोई खाली दीप में तेल डाल दे,ज्योति रख देऔर उसे जला दें, तो दीपक की ज्योति से चारो

।। कथा अमृत ।। सिकन्दर उस जल की तलाश में था, जिसे पीने से मानव अमर हो जाते हैं। दुनियाँ

क्षीरसागर का कछुवा क्षीरसागर में भगवान विष्णु शेष शैया पर विश्राम कर रहे हैं और लक्ष्मी जी उनके पैर दबा

आशुतोष सशाँक शेखर चन्द्र मौली चिदंबरा, कोटि कोटि प्रणाम शम्भू कोटि नमन दिगम्बरा, निर्विकार ओमकार अविनाशी तुम्ही देवाधि देव ,जगत

हे कृष्णवदन हे मधुसूदन,घनश्याम कहे या मनमोहना। नन्दलाल, गोविन्द गोपाल तेरे दर्शन को तरस रहे नैना।श्यामल पंखी तेरा मोर मुकुट,

हे केशव! मुझ अधम की करुण पुकार सुन कर मेरा उद्धार कीजिए और अपने दीनानाथ नाम होने का,जो विश्व विख्यात

यह माँ महाकाली का स्तोत्र, भोग व मोक्ष प्रदायक, मोहिनी शक्ति देने वाला, अघों (पापों) का नाश करने वाला, शत्रु

गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कोई भी ग्रह , जादू टोना बुरी बला भूत प्रेत और जंतर तंत्र या

श्री गुरुगीता प्रास्ताविक भगवान शंकर और देवी पार्वती के संवाद में प्रकट हुई यह ‘श्रीगुरुगीता’ समग्र ‘स्कन्दपुराण’ का निष्कर्ष है।