Wisdom Story

भक्तराज प्रह्लाद और ध्रुव

विश्वके भक्तोंमें भक्तप्रवर श्रीप्रह्लाद और ध्रुवकी भक्ति, प्रेम, सहिष्णुता अत्यन्त ही अलौकिक थी। दोनों प्रातःस्मरणीय भक्त श्रीभगवान्‌के विलक्षण प्रेमी थे।

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आचरण की सुगन्ध

.स्वाति नक्षत्र था। वारिद जलबिंदु तेजी से‌ चला आ रहा था।.वृक्ष की हरित नवल कोंपल ने रोककर पूछा.. ‘‘प्रिय !

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शुद्ध हृदय…….

🌷”वृंदावन” में एक भक्त रहते थे जो स्वभाव से बहुत ही भोले थे। उनमे छल, कपट, चालाकी बिलकुल नहीं थी।

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“A train journey and two names to remember “

1990 की_घटना.. असम से दो सहेलियाँ रेलवे में भर्ती हेतु गुजरात रवाना हुई. रास्ते में स्टेशन पर गाडी बदलकर आगे

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