ध्यान (Dhayan)

संकल्प से सृजन

संकल्प महान लक्ष्य की प्राप्ति कराते हैं। संकल्प में बड़ी शक्ति होती है। संकल्प के बल पर ही वानरों द्वारा

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हनुमत्ध्यानं ।।

नमस्ते देवदेवेश नमस्ते राक्षसान्तक। नमस्ते वानराधीश नमस्ते वायुनन्दन।। नमस्त्रिमूर्तिवपुषे वेदवेद्याय ते नमः। रेवानदी विहाराय सहस्रभुजधारिणे।। सहस्रवनितालोल कपिरूपाय ते नमः। दशाननवधार्थाय

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साक्षीभाव

मैं अपनी मैं को क्या देखता हूं ?जब मैं अपनी मैं को मैं देह हूं देखता हूं तो मैं पैदा

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