
मृत्युकी खोज
‘टन्-टन्-टन्’ गिर्जाघरकी घंटी बजते ही तीनों मित्रोंने अचानक आमोद-प्रमोदसे मन फेर लिया। फलैंडरस जनपदमें किसी व्यक्तिकी मृत्युकी सूचना दी घण्टी-नादने

‘टन्-टन्-टन्’ गिर्जाघरकी घंटी बजते ही तीनों मित्रोंने अचानक आमोद-प्रमोदसे मन फेर लिया। फलैंडरस जनपदमें किसी व्यक्तिकी मृत्युकी सूचना दी घण्टी-नादने

कुसंगका परिणाम गंगाजी के किनारे गृध्रकूट नामक पर्वतपर एक विशाल पाकड़ वृक्ष था। उसके खोखले भाग (कोटर) में एक अन्धा

‘केहि कर हृदय क्रोध नहिं दाहा’ व्याकरणशास्त्र के शिरोमणि आचार्य महर्षि पाणिनि देवी दाक्षीके पुत्र एवं आचार्य उपवर्षके शिष्य थे।

[4] स्वभाव बदलो संत अबू हसनके पास एक व्यक्ति आया और बोला- ‘महाराज, मैं गृहस्थीके झंझटोंसे परेशान हो उठा हूँ।

अप्युन्नतपदारूढपूज्यान् नैवापमानयेत्। इक्ष्वाकूणां ननाशाग्नेस्तेजो वृशावमानतः ॥ (नीतिमञ्जरी 78) इक्ष्वाकु वंशके महीप त्रिवृष्णके पुत्र त्र्यरुणकी अपने पुरोहितके पुत्र वृशजानसे बहुत पटती

भारतवासियोंके समान ही अरब भी अतिथिका सम्मान करनेमें अपना गौरव मानते हैं। अतिथिका स्वागत-सत्कार वहाँ कर्तव्य समझा जाता है। अरबलोगोंकी

सिसलीके सिराक्यूज नगरके राजा ड्योंनिसियसने है सामान्य अपराधमें डेमन नामके एक युवकको प्राणदण्डकी आज्ञा दे दी। डेमनने प्रार्थना की- ‘मुझे

भगवान्की भक्तिमें तल्लीन नामदेवका घरसे बिलकुल ही ध्यान जाता रहा। उनकी पत्नी राजाईको पुत्र भी हो चुका था। घर दाने-दानेके

महाभारत युद्धके 10 वें दिन भीष्मपितामहके ही बतलाये मार्गसे शिखण्डीकी आड़ लेकर अर्जुनने उन्हें घायल कर दिया और अन्ततोगत्वा उन्हें

हाँ, मेरे पास 40 अशर्फियाँ हैं ! बात है कोई 900 साल पुरानी । ईरान देशमें एक स्थान है जीलान।