
आर्य-कन्याका आदर्श
मद्रदेशके राजा अश्वपतिने अपनी परम सुन्दरी कन्या सावित्रीको स्वतन्त्र कर दिया था कि वह अपने योग्य पति चुन ले तो

मद्रदेशके राजा अश्वपतिने अपनी परम सुन्दरी कन्या सावित्रीको स्वतन्त्र कर दिया था कि वह अपने योग्य पति चुन ले तो

माँ क्या चाहती है! एक दम्पती दीवालीकी खरीदारी करनेको हड़बड़ी में थे। पतिने पत्नीसे जल्दी करनेको कहा और कमरेसे बाहर

भक्त हरिदास हरिनामके मतवाले थे। ये जन्मसे मुसलमान थे, पर इनको भगवान्का नाम लिये बिना चैन नहीं पड़ता था। फुलिया

वकील भी सच्चे हो सकते हैं लोग कहते हैं कि वकीलका पेशा ही झूठका पेशा है। ‘घोड़ा घाससे यारी करेगा

आपसकी कलहसे विपत्ति आती है किसी समय एक चिड़ीमारने चिड़ियोंको फँसानेके लिये पृथ्वीपर जाल फैलाया। उस जालमें साथ-साथ रहनेवाले दो

परम पूज्यपाद प्रातः स्मरणीय पं0 श्रीडूंगरदत्तजी | महाराज बड़े ही उच्चकोटिके विद्वान् परम त्यागी, तपस्वी, पूर्ण सदाचारी, कर्मकाण्डी, अनन्य भगवद्भक्त

जीवनका कम्बल दो साधु थे। किसी भक्तने दोनोंको बहुमूल्य गर्म कम्बल उपहारमें दिये दिनभर यात्रा करनेके बाद दोनों साधु रातके

‘न देने योग्य गौके दानसे दाताका उलटे अमङ्गल होता है’ इस विचारसे सात्विक बुद्धि-सम्पन्न ऋषिकुमार नचिकेता अधीर हो उठे। उनके

चीनसे भारत आनेवाले यात्री ह्यु-एन-साँग केवल घुमक्कड़ यात्री नहीं थे। वे थे धर्मके जिज्ञासु विद्याकी लालसा ही उन्हें दुर्गम हिमालयके

सत्य और असत्य एक दिन छायाने मनुष्यसे कहा-‘लो देखो, तुम जितने थे, उतने के उतने ही रहे और मैं तुमसे