
ब्राह्मण
श्रीसङ्गामजीको तप करते कितने दिन बीत गये। स्त्री, पुत्र एवं जगत्की किसी भी वस्तुके प्रति उनके मनमें आसक्ति नहीं रह

श्रीसङ्गामजीको तप करते कितने दिन बीत गये। स्त्री, पुत्र एवं जगत्की किसी भी वस्तुके प्रति उनके मनमें आसक्ति नहीं रह

भारत-सावित्री [महाभारतका सार ] महर्षिर्भगवान् व्यासः कृत्वेमां संहितां पुरा । श्लोकैश्चतुर्भिर्धर्मात्मा पुत्रमध्यापयच्छुकम् ॥ धर्ममूर्ति ऋषिप्रवर भगवान् व्यासदेवने पूर्वकालमें महाभारतसंहिताका प्रणयन

मृत्यु तो सृष्टिका अनिवार्य सत्य है एक समयकी बात है, भगवान् बुद्ध श्रावस्ती नगरीमें ठहरे हुए थे। उनकी सायंकालीन सभा

एक सेठ रात्रिमें सो रहे थे। स्वप्नमें उन्होंने देखा कि लक्ष्मीजी कह रही हैं-‘सेठ! अब तेरा पुण्य समाप्त हो गया

प्रसिद्ध बादशाह हारून- अल रशीदके एक लड़केने एक दिन आकर अपने पितासे कहा कि ‘अमुक सेनापतिके लड़केने मुझको माँकी गाली

‘माताजी! इतनी गम्भीरतासे क्या देख रही हैं ?’ ‘कुछ नहीं शिवा! यही कि आस-पास सभी किलोंपर तेरी विजय- वैजयन्ती फहरा

करीब डेढ़ सौ वर्ष बीत चुके होंगे। चम्पारनमें केशरिया थानाके अन्तर्गत एक ढेकहा गाँव है। वहीं गण्डक नदीके किनारे श्रीकर्त्ताराम

आर्यसमाजके संस्थापक श्रीस्वामी दयानन्दजी सरस्वतीके अत्यन्त निकटके श्रद्धालु भक्तोंमें थे पंजाबके पण्डित श्रीगुरुदत्तजी विद्यार्थी । स्वामीजीके देहावसान के अनन्तर उनके

एक किसानकी कथा एक बार कबीरने एक किसानसे पूछा कि क्या तुम पूजा-पाठ, भगवद्धजनके लिये कुछ समय देते हो ?

महाराज युधिष्ठिर कौरवोंको युद्धमें पराजित करके समस्त भूमण्डलके एकच्छत्र सम्राट् हो गये थे। उन्होंने लगातार तीन अश्वमेध यज्ञ किये। उन्होंने