गोपियों का दिन रात हर क्षण प्रभु के साथ मिलन है। रोम रोम से कृष्ण नाम की ध्वनि गुंज रही हैं। हाथ से कार्य करते हुए ध्वनि की गुंज में खो जाती हैं। भगवान स्वयं गोपी रूप में प्रकट हो कर सब करके जाते हैं। हृदय से भगवान श्री हरि के साथ सम्बन्ध बन जाता है तब सब कुछ प्रभु ही हैं। हे मेरे स्वामी भगवान् नाथ भुलु तो मैं अपने आप को भुल जाऊं,तुम्हे कैसे भुलाऊं तुम प्राणों में बसे हो मेरे नाथ जय श्री राम
अनीता गर्ग
Every moment day and night of the gopis is a union with the Lord. The sound of the name Krishna is reverberating from Rome and Rome. While working with the hand, get lost in the buzz of sound. The Lord Himself appears in the form of a Gopi and does everything. When a relationship is formed with Lord Shri Hari from the heart, then everything is GOD. Oh my lord Lord Nath, I forget myself, how can I forget you, you have lived in my life, my Nath Jai Shri Ram
Anita Garg